सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Bonus ›   Intraday Trading and F&O Income: Understanding the Tax Rules Before You Trade

Stock Market Tax Rules: शेयर बाजार से रोज कमाते हैं पैसा? इंट्राडे और F&O पर टैक्स का गणित समझना बेहद जरूरी

बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 08 Jun 2026 04:39 AM IST
विज्ञापन
सार

बहुत से लोग शेयर बाजार में रोजाना के उतार-चढ़ाव से पैसा कमाने के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग और वायदा व विकल्प का सहारा लेते हैं। नए लोग बाजार की इस तेज रफ्तार को देखकर कूद तो पड़ते हैं, लेकिन वित्त वर्ष के अंत में जब टैक्स चुकाने की बारी आती है, तो उनके पसीने छूट जाते हैं।

Intraday Trading and F&O Income: Understanding the Tax Rules Before You Trade
STOCK MARKET - फोटो : STOCK MARKET
विज्ञापन

विस्तार

क्या आपको पता है, इन दोनों तरीकों से होने वाली कमाई पर आयकर के नियम पूरी तरह अलग हैं? अगर आप भी बिना समझे इस खेल में कूद रहे हैं, तो टैक्स विभाग के नियमों को समझ लीजिए, ताकि बाद में पछताना न पड़े।



इंट्राडे और एफएंडओ है एक व्यवसाय  
अधिकांश लोग इस कमाई को पूंजीगत लाभ मान लेते हैं। टैक्स विभाग इंट्राडे और वायदा-विकल्प की ट्रेडिंग को निवेश नहीं, बल्कि एक व्यवसाय मानता है। इसलिए होने वाले फायदे या नुकसान को आयकर रिटर्न में व्यापार या पेशे के लाभ और वृद्धि की श्रेणी में दिखाना होता है। इस पर कुल सालाना आय के हिसाब से तय टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इंट्राडे ट्रेडिंग को माना जाता है सट्टा
आयकर अधिनियम की धारा 43(5) के तहत एक ही दिन में शेयर खरीदकर बेच देने से होने वाली कमाई को सट्टा व्यवसाय से होने वाली आय माना जाता है। यह कमाई आपकी कुल सालाना आय में जोड़ी जाती है और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। सट्टे से हुए नुकसान की भरपाई केवल सट्टे से होने वाले मुनाफे से ही की जा सकती है। इस घाटे को केवल 4 वर्षों के लिए आगे ले जा सकते हैं।
विज्ञापन
Trending Videos


वायदा और विकल्प नहीं है सट्टा आय

  • आयकर कानून के अनुसार, वायदा और विकल्प (F&O) से होने वाली आय या घाटे को गैर-सट्टा व्यवसाय आय माना जाता है। इसे सामान्य व्यापार से होने वाली आय की तरह ही देखा जाता है।
  • इसमें राहत यह है कि इस घाटे को आप उसी वित्तीय वर्ष में वेतन की आय को छोड़कर किसी भी अन्य आय (जैसे मकान का किराया या अन्य व्यापारिक लाभ) के साथ समायोजित कर सकते हैं। बचे हुए घाटे को आगे के 8 वर्षों तक ले जाना संभव है।

समय पर रिटर्न न भरना पड़ेगा भारी

  • आयकर रिटर्न भरने के लिए ITR-3 या ITR-4 का इस्तेमाल होता है। अगर आपकी आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है या आपका कुल टर्नओवर 25 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको अनिवार्य रूप से बुक्स ऑफ अकाउंट्स रखनी होगी।  
  • टैक्स ऑडिट लागू नहीं है, तब रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। टैक्स ऑडिट की जरूरत होने पर अंतिम तिथि 31 अक्तूबर, 2026 तय की गई है। समय पर रिटर्न न भरने पर घाटे को आगे ले जाने का लाभ नहीं मिलेगा।

तारीख पता है?
मेनबोर्ड/एसएमई आईपीओ लिस्टिंग
8 जून: एसएमआर ज्वेल्स लि. (64 करोड़ रुपये), मेरीट्रोनिक्स लि. (70 करोड़ रुपये)
9 जून:  हेक्जागोन न्यूट्रिशन लि. (139 करोड़ रुपये)
11 जून: वाह केमिकल्स (13 करोड़), यूएचएम वेकेशन लि. (36 करोड़)
12 जून: सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजी (631 करोड़ रुपये), जेनएक्सएआई एनालिटिक्स लि. (53 करोड़ रुपये)

वित्तीय घोषणा
12 जून: उपभोक्ता महंगाई

डिस्क्लेमर : अपना पैसा में छपे विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन कीं सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबारे या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed