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मिडकैप शेयरों में लौटी रौनक: क्या तेजी की नींव मजबूत है या निवेशक उठा रहे हैं बड़ा जोखिम? जानिए कहां है मौका

बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 08 Jun 2026 05:54 AM IST
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सार

निफ्टी और सेंसेक्स में तेज उतार-चढ़ाव के बीच मिडकैप शेयरों में चमक लौटी है। क्या यह तेजी मजबूत है या फिर बड़े स्टॉक कमजोर हैं, तो मिडकैप में मौके तलाशे जा रहे हैं। क्या कहते हैं आंकड़े, कहां है जोखिम और कहां है ताकत?

Midcap Stocks Rebound Strongly: Real Growth Story or Just a Market Rally?
Share Market - फोटो : ANI
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विस्तार

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर उरई के रहने वाले राकेश शेयर बाजार में निवेश करते हैं और बड़े स्टॉक्स में पैसा लगाते हैं। मिडकैप स्टॉक्स में निवेशकों की बीते एक साल में बुरी गत बनी है। म्यूचुअल फंड निवेशक भी घाव सहला रहे हैं। इस बीच बाजार में कुछ बदला। बड़े सूचकांक तो निराश कर रहे थे मगर मझोली कंपनियों यानी मिडकैप शेयरों में तेजी लौटी। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स ने अपने हालिया निचले स्तरों से करीब 17 से 18 फीसदी की शानदार रिकवरी दिखाई है। अब राकेश असमंजस में हैं, बड़े स्टॉक तो चल नहीं रहे क्या मिडैकप में जाया जाए। क्या इन स्टॉक्स के बुरे दिन खत्म हो गए हैं?

मिडकैप में स्थिरता और मजबूती लार्जकैप से ज्यादा

अगर इस साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो समझ आता है कि क्यों निवेशक लार्जकैप को छोड़कर मिडकैप की तरफ भाग रहे हैं। इस साल अब तक जहां बड़े शेयरों वाले इंडेक्स निफ्टी-50 ने नकारात्मक 10.92% का निराशाजनक रिटर्न दिया है, वहीं इसके मुकाबले निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स महज -0.17% पर टिका हुआ है। यानी गिरावट के दौर में भी मझोले शेयरों ने निवेशकों की पूंजी को बिखरने से बचाया है।
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इस दौरान बाजार की हलचल को देखें तो निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स की सीमा 60,467 से 60,750 अंकों के बीच रही है, जबकि निफ्टी 50 की सीमा 26,146 से 23,390 अंकों के बीच दर्ज की गई। यह साफ दिखाता है कि बड़े शेयरों के मुकाबले मझोले शेयरों में स्थिरता और मजबूती कहीं ज्यादा रही है।
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इन दो खंभों पर टिकी है तेजी
  • हाल ही में आए चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों ने पूरे बाजार को चौंका दिया है। मझोली कंपनियों ने अपने कामकाज के खर्चों को नियंत्रित कर मुनाफे के मार्जिन में शानदार सुधार किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
  • विदेशी संस्थागत निवेशक भले ही भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर जा रहे हों, लेकिन देश के आम खुदरा निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने बाजार को गिरने नहीं दिया। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये हर महीने आने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा  मिडकैप फंड में जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस बंपर तेजी में सब कुछ असली है या फिर हवा ही है? चौथी तिमाही के परिणाम बताते हैं कि मिडकैप कंपनियों ने इस बार 29% की सालाना आय वृद्धि दर्ज की है। यह रफ्तार लार्जकैप कंपनियों की 14% की वृद्धि से दोगुनी है। करीब 60% मिडकैप कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। सिर्फ 12% कंपनियां ही ऐसी रहीं जिनके नतीजे खराब आए। पीई के पैमाने पर बाजार में कई कंपनियां ऐसी हैं, जो निवेश के लिए आकर्षक हैं। हालांकि इन्हें सोच समझ कर चुनना होगा।

दिखाएं समझदारी और अनुशासन
मिडकैप की इस चमचमाती रिकवरी में जोखिम जरूर हैं लेकिन इसका बुनियादी ढांचा बेहद मजबूत है। बाजार से डरकर भागने की जरूरत नहीं है, बल्कि पूरी सतर्कता, समझदारी और अनुशासन के साथ निवेशित रहने का यह एकदम सही समय है।

कहां है जोखिम
  • जोखिम कुछ चुनिंदा सरकारी और डिफेंस क्षेत्र की कंपनियों में साफ दिख रहा है, जहां शेयरों की कीमतें उनकी वास्तविक कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा ऊपर जा चुकी हैं। यानी पीई रेशियो ऐतिहासिक औसत से बहुत ज्यादा है। इसमें भेल, पीटीसी जैसे कुछ उदाहरण हैं।
  • मिडकैप की यह पूरी रैली 29 फीसदी की ठोस आय वृद्धि पर टिकी है, इसलिए इसे पूरी तरह से हवाई कहना गलत होगा, लेकिन सावधानी जरूरी है। वैश्विक तनावों के कारण बीच-बीच में 5 से 10 फीसदी की गिरावट आ सकती है, जो बाजार की सेहत के लिए अच्छी ही है।

ट्रेडर्स, मौजूदा और नए निवेशकों के लिए क्या हो रणनीति?

निवेशक श्रेणी क्या रणनीति अपनाएं? ध्यान रखें
ट्रेडर्स बाजार अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के पास है, इसलिए बिना स्टॉपलॉस के कोई भी सौदा न करें। तेजी वाले शेयरों के पीछे जरूर भागें, लेकिन जहां रेजिस्टेंस दिखे, वहां खरीदारी से तौबा करें। समय-समय पर अपने मुनाफे को बुक करते रहें।
मौजूदा निवेशक अगर आपके पास अच्छे मुनाफे व मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियां हैं, तो उन्हें होल्ड करें। अगर किसी एक मिडकैप शेयर की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ने से आपके पूरे पोर्टफोलियो में उसका हिस्सा बढ़ गया है, तो सतर्क हो जाएं। वहां से आंशिक मुनाफा वसूलें और पैसे को सुरक्षित लार्जकैप शेयरों में लगा दें।
नए निवेशक बाजार के इस ऊंचे स्तर पर कभी भी पूरी  रकम एक साथ मिडकैप में न झोंकें। म्यूचुअल फंड के जरिये हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश करें। गिरावट में भी कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी और जोखिम कम होगा। केवल उन्हीं कंपनियों को चुनें जिनका बिजनेस मॉडल साफ-सुथरा हो, कर्ज का बोझ न हो और चौथी तिमाही के नतीजे दमदार रहे हों।

म्यूचुअल फंड्स के जरिये कितना हुआ निवेश
फंड श्रेणी AUM (जनवरी 2026) AUM (अप्रैल 2026) बदलाव
लार्जकैप फंड ₹4,08,303 करोड़ ₹3,98,834 करोड़ -2.32%
मिडकैप फंड ₹4,49,438 करोड़ ₹4,75,011 करोड़ +5.69%
 
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