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धान-मक्का-सोयाबीन का रकबा घटा: हल्दी भी महंगी; आने वाले दिनों में क्या होगा असर?
Thu, 01 Oct 2026 07:05 AM IST
निर्मल कांत
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 01 Oct 2026 07:05 AM IST
सार
खरीफ सीजन में धान, मक्का और सोयाबीन की बुआई का रकबा घटा है, जबकि उड़द, तुअर और बाजरा की बुआई बढ़ी है। वहीं हल्दी के दाम एक साल में 42 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 21,400 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं। आने वाले दिनों में इसका असर आपकी रसोई और बाजार पर कितना पड़ेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
देश में खरीफ सीजन की फसलों के बुआई क्षेत्र में इस बार आए उतार-चढ़ाव का सीधा असर आने वाले महीनों में आपकी रसोई और बाजार पर पड़ सकता है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, धान के रकबे में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। यह 438.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 421.82 लाख हेक्टेयर रह गया है। इससे चावल के कुल उत्पादन पर असर पड़ना तय है।
मक्का का रकबा 94.08 लाख हेक्टेयर से घटकर 91.09 लाख हेक्टेयर हो गया है, यानी इसमें 2.99 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मक्का का इस्तेमाल न केवल खाद्य बल्कि पोल्ट्री (मुर्गी पालन) और स्टार्च उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। इसकी घरेलू उपलब्धता प्रभावित होने पर दाम चढ़ सकते हैं। इसके अलावा, सोयाबीन का रकबा 122.98 लाख हेक्टेयर से घटकर 121.82 लाख हेक्टेयर रह गया है, यानी इसमें 1.16 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है।
16.37 % लाख हेक्टेयर घटा धान का बुआई क्षेत्र
उड़द, बाजरा की बढ़ी बुआई
एक तरफ जहां प्रमुख फसलों का रकबा घटा है, वहीं दूसरी तरफ दालों, मोटे अनाजों और तिलहन के मोर्चे पर कुछ राहत भरी खबरें भी हैं। उड़द की बुआई 22.46 लाख हेक्टेयर से 11.9% बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर हो गई है। तुअर का रकबा भी 44.93 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। इसके अलावा, बाजरा का क्षेत्र 62.87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 64.86 लाख हेक्टेयर हो गया है, यानी इसमें 1.99 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे मोटे अनाजों की उपलब्धता मजबूत होगी।
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ये भी पढ़ें: सर्राफा बाजार: सोना-चांदी में भारी गिरावट, क्या भू-राजनीतिक तनाव से निवेशकों में बढ़ी चिंता?
हल्दी में उबाल कीमतें 21400 रुपये प्रति क्विंटल के पार
उधर, हल्दी की कीमतों को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। एनसीडीईएक्स पर हल्दी के भाव बढ़कर 21,400 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं। पिछले एक साल में हल्दी के दाम 42% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, इस सीजन की शुरुआत में हल्दी का ओपनिंग स्टॉक करीब 26.5 लाख बोरी था। 2025-26 के दौरान कुल उत्पादन करीब 90 लाख बोरी रहने का अनुमान लगाया गया। इसमें से लगभग 32 लाख बोरी का निर्यात हुआ और 69.5 लाख बोरी की घरेलू खपत दर्ज की गई। इससे सीजन के अंत में बचा हुआ स्टॉक घटकर सिर्फ 15 लाख बोरी रह गया।
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मक्का का रकबा 94.08 लाख हेक्टेयर से घटकर 91.09 लाख हेक्टेयर हो गया है, यानी इसमें 2.99 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मक्का का इस्तेमाल न केवल खाद्य बल्कि पोल्ट्री (मुर्गी पालन) और स्टार्च उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। इसकी घरेलू उपलब्धता प्रभावित होने पर दाम चढ़ सकते हैं। इसके अलावा, सोयाबीन का रकबा 122.98 लाख हेक्टेयर से घटकर 121.82 लाख हेक्टेयर रह गया है, यानी इसमें 1.16 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है।
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16.37 % लाख हेक्टेयर घटा धान का बुआई क्षेत्र
उड़द, बाजरा की बढ़ी बुआई
एक तरफ जहां प्रमुख फसलों का रकबा घटा है, वहीं दूसरी तरफ दालों, मोटे अनाजों और तिलहन के मोर्चे पर कुछ राहत भरी खबरें भी हैं। उड़द की बुआई 22.46 लाख हेक्टेयर से 11.9% बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर हो गई है। तुअर का रकबा भी 44.93 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। इसके अलावा, बाजरा का क्षेत्र 62.87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 64.86 लाख हेक्टेयर हो गया है, यानी इसमें 1.99 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे मोटे अनाजों की उपलब्धता मजबूत होगी।
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हल्दी में उबाल कीमतें 21400 रुपये प्रति क्विंटल के पार
उधर, हल्दी की कीमतों को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। एनसीडीईएक्स पर हल्दी के भाव बढ़कर 21,400 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं। पिछले एक साल में हल्दी के दाम 42% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, इस सीजन की शुरुआत में हल्दी का ओपनिंग स्टॉक करीब 26.5 लाख बोरी था। 2025-26 के दौरान कुल उत्पादन करीब 90 लाख बोरी रहने का अनुमान लगाया गया। इसमें से लगभग 32 लाख बोरी का निर्यात हुआ और 69.5 लाख बोरी की घरेलू खपत दर्ज की गई। इससे सीजन के अंत में बचा हुआ स्टॉक घटकर सिर्फ 15 लाख बोरी रह गया।