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New Tax Era: बदल गई टैक्स की दुनिया, जानिए कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में क्या हुआ बदलाव

द बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Mon, 13 Apr 2026 09:20 PM IST
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सार

एक अप्रैल से सिर्फ कैलेंडर नहीं बदला, बल्कि भारत में टैक्स का पूरा संविधान बदल गया है। 1961 का पुरान इनकम टैक्स एक्ट अब रिटायर हो चुका है और उसकी जगह ले ली है इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

New Income Tax Act 2025 Income tax slab 12.75 lakh tax free HRA exemption Tax return
Income Tax Return documents - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

सरकार ने टैक्स की भाषा आसान बनाने के साथ कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में भी बदलाव किया है। चलिए समझते हैं, नए टैक्स युग में आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा

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एक अप्रैल, 2026 से आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार लागू हुआ है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 सिर्फ पुराने कानून की मरम्मत नहीं है, बल्कि टैक्स की पूरी नई इमारत है। भाषा आसान की गई है और पुराने पड़ चुके प्रावधानों को हटाया गया है। तो आइए, समझते हैं उन बड़े बदलावों को, जो आपकी वित्तीय योजना को पूरी तरह बदल देंगे-
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12.75 लाख तक कोई टैक्स नहीं
नए टैक्स कानून में नई टैक्स व्यवस्था को मुख्य आधार बनाया गया है, जो अब अधिकांश करदाताओं के लिए डिफॉल्ट बन चुकी है। भले ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन धारा 87A के तहत छूट को 60,000 रुपये तक बढ़ाया गया है। इसका सीधा असर यह है कि यदि किसी की कर योग्य आय 12 लाख रुपये तक है, तो उस पर लगने वाला पूरा टैक्स इस छूट के कारण शून्य हो जाता है।
वेतनभोगी के लिए नई व्यवस्था में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन इस राहत को और बढ़ाता है, जिससे प्रभावी रूप से 12.75 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य हो सकता है।

कब होगी टैक्स प्लानिंग की जरूरत 
जैसे ही आय 13 लाख या इससे अधिक होती है, टैक्स देनदारी शुरू हो जाती है और यहीं से वास्तविक टैक्स प्लानिंग की जरूरत होगी। धारा 87A की छूट हर प्रकार की आय पर लागू नहीं है। कैपिटल गेन, क्रिप्टो आय या लॉटरी से प्राप्त आय पर यह छूट उपलब्ध नहीं होगी। इसलिए करदाताओं को केवल अपनी सैलरी नहीं, बल्कि अपनी पूरी आय की संरचना को समझते हुए ही टैक्स प्लानिंग करनी होगी, नहीं तो बाद में अप्रत्याशित टैक्स देनदारी सामने आ सकती है।

एचआरए का बढ़ा दायरा 
अब तक केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई को ही 50% एचआरए छूट के लिए 'मेट्रो' माना जाता था। अब इस लिस्ट में बंगलूरू, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी जोड़ा गया है। यानी इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी बेसिक सैलरी का 50% हिस्सा एचआरए के रूप में क्लेम कर सकेंगे। 

सावधानी भी जरूरी

  • अब मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना अनिवार्य होगा ताकि फर्जी रेंट रसीदों के खेल को रोका जा सके।

विदेश यात्रा और पढ़ाई में राहत

  • विदेश पैसे भेजने (LRS) के नियमों को सरल बनाया गया है और TCS की दरें कम की गई हैं।

शिक्षा और इलाज

  • पहले 7 लाख रुपये के ऊपर 5% लगता था, अब 2% लगेगा। 

विदेश यात्रा

  • पहले 10 लाख के ऊपर 20% का भारी बोझ था। अब बिना किसी सीमा के 2% फ्लैट रेट लागू होगा। 
  • रिटर्न भरने की समय सीमा में बदलाव
  • ITR-3 और ITR-4 (छोटे कारोबारी और प्रोफेशनल) आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त।

रिवाइज्ड रिटर्न
रिटर्न सुधारने के लिए अब 9 महीने के बजाय 12 महीने (अगले साल 31 मार्च तक) का समय !

निवेशकों का बढ़ेगा खर्च
शेयर बाजार के खिलाड़ियों के लिए खर्च बढ़ गया है। सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) की दरें बढ़ा दी गई हैं-

  • ऑप्शंसः प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़कर 0.15% 
  • फ्यूचर्सः 0.02% से बढ़कर 0.05% 
  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्डः अगर गोल्ड बॉन्ड बाजार से खरीदे गए हैं, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। पहले यह पूरी तरह टैक्स-फ्री था।

कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों और पर्क्स की सीमाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। भत्तों को अब हकीकत के करीब लाने की कोशिश की गई है।
 

शिक्षा (दो बच्चे) 100 रुपये/महीना प्रति बच्चा 3,000 रुपये/महीना प्रति बच्चा
हॉस्टल भत्ता (दो बच्चे) 300 रुपये/महीना प्रति बच्चा 9,000 रुपये/महीना प्रति बच्चा
फ्री मील (प्रति भोजन) 50 रुपये 200 रुपये
गैर-नकद उपहार (सालाना) 5,000 रुपये 15,000 रुपये
विदेश में इलाज आय 2 लाख से कम होने पर छूट आय 8 लाख से कम होने पर छूट
कार लीज (1.6 L इंजन से छोटा) 2,700 रुपये (ड्राइवर सहित) 8,000 रुपये (ड्राइवर सहित)

नए युग की शुरुआत

पहले निवेश का मुख्य उद्देश्य टैक्स बचाना होता था, अब फोकस बदलकर वेल्थ क्रिएशन है, जिसमें रिटर्न, जोखिम और जरूरत तीनों को संतुलित करना आवश्यक है। ये बदलाव ईमानदार करदाताओं के लिए राहत लेकर आए हैं। हर व्यक्ति आय और निवेश का सही और पारदर्शी विवरण दे। यदि इस नए सिस्टम को समझदारी और योजना के साथ अपनाया जाए, तो यह न केवल टैक्स बोझ को कम करेगा, बल्कि एक मजबूत और सुरक्षित वित्तीय भविष्य की दिशा भी तय करेगा।

जानकारों का क्या कहना?

चार्टर्ड अकाउंटेंट मुकेश जैन के अनुसार यह एक वास्तविक और महत्वपूर्ण पहल है। इसे विशेष रूप से पुराने विदेशी खातों वाले छात्र, विदेशी इक्विटी (RSUS/ESOPs) वाले टेक कर्मचारी और भारत लौटने वाले अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए तैयार किया गया है, जो अनजाने में विदेशी संपत्तियों की रिपोर्ट करने में विफल रहे थे।

अघोषित संपत्ति और आय का कुल मूल्य एक करोड़ रु. तक है, तो करदाता को 30% कर और 100% अतिरिक्त लेवी (संपत्ति मूल्य का कुल 60%) देना होगा। यदि संपत्तियों की घोषणा निवासी बनने पर नहीं की गई थी, तो वे एक लाख रु. का मामूली शुल्क देकर इसे नियमित कर सकते हैं (बशर्ते मूल्य 5 करोड़ तक हो)। ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के प्रावधानों के तहत दंड और मुकदमे से पूर्ण सुरक्षा।

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