NPS: टैक्स बचत ही नहीं, रिटायरमेंट तक तीन बड़े फायदे; कैसे मिलता है ट्रिपल टैक्स का फायदा? आसान भाषा में समझें
Triple Tax Advantage: नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस को आमतौर पर टैक्स बचाने वाले निवेश के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ निवेश के समय मिलने वाली छूट तक सीमित नहीं है। इसमें निवेश, निवेश के दौरान पोर्टफोलियो में बदलाव और रिटायरमेंट के समय निकासी से जुड़े तीन अलग-अलग टैक्स फायदे बताए गए हैं। क्या एनपीएस लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए संपत्ति बनाने का ज्यादा असरदार तरीका बन सकता है?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस को अक्सर टैक्स बचाने वाले निवेश के तौर पर देखा जाता है। कई लोगों को लगता है कि अगर तत्काल मिलने वाली टैक्स छूट बहुत बड़ी नहीं है तो एनपीएस में पैसा लगाने का कोई खास फायदा नहीं है। लेकिन रिटायरमेंट के लिए किसी निवेश को केवल इस आधार पर देखना सही नहीं है कि निवेश करते समय कितनी टैक्स छूट मिल रही है। असल सवाल यह है कि अगले 25 या 30 वर्षों में वह निवेश आपके लिए कितनी कुशलता से संपत्ति बनाने में मदद करता है। एनपीएस की खासियत यही है कि इसमें निवेश के अलग-अलग चरणों में टैक्स से जुड़े फायदे मिलते हैं।
एनपीएस में पहला टैक्स लाभ कैसे मिलता है?
एनपीएस में कर्मचारी का योगदान आयकर की धारा 80C के तहत उपलब्ध 1.5 लाख रुपये की कुल सीमा के भीतर कटौती के लिए पात्र है। इसके अलावा 80C की सीमा से ऊपर कर्मचारी के एनपीएस योगदान पर 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कटौती का लाभ मिलता है। यानी पात्रता के अनुसार एनपीएस के जरिए कर्मचारी अपनी कर योग्य आय को और कम कर सकता है। इसके साथ ही नियोक्ता की ओर से एनपीएस में किया गया योगदान भी तय सीमा तक कटौती के लिए पात्र होता है। पुरानी कर व्यवस्था में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत, जबकि नई कर व्यवस्था में यही सीमा 14 प्रतिशत बताई गई है।
ये भी पढ़ें- AI ने पहली बार इंसान को नौकरी से निकाला: 23 शिफ्ट में 17 बार देर से पहुंचा था कर्मचारी; क्या बदलेगा कामकाज?
नियोक्ता के एनपीएस योगदान पर क्या फायदा मिलता है?
- एनपीएस में कर्मचारी के अलावा नियोक्ता की ओर से किया गया योगदान भी महत्वपूर्ण है।
- एनपीएस, मान्यता प्राप्त भविष्य निधि और सुपरएनुएशन फंड में नियोक्ता के कुल टैक्स-फ्री योगदान की एक संयुक्त वार्षिक सीमा 7.5 लाख रुपये तय है।
- इसका मतलब है कि पात्र कर्मचारियों को अपने वेतन के साथ मिलने वाले नियोक्ता योगदान के जरिए भी रिटायरमेंट के लिए बड़ी रकम बनाने का मौका मिल सकता है।
- इस तरह एनपीएस का पहला टैक्स फायदा केवल कर्मचारी के अपने निवेश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नियोक्ता के योगदान को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
एनपीएस में दूसरा टैक्स फायदा क्या है?
एनपीएस का दूसरा बड़ा फायदा निवेश के दौरान पोर्टफोलियो को बदलने से जुड़ा है। इक्विटी और डेट में निवेश के अनुपात को समय-समय पर बदलने की प्रक्रिया को पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग कहा जाता है। एनपीएस में नियमों के तहत इस तरह के बदलाव पर कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता है। यानी निवेशक अपनी जरूरत और बाजार की स्थिति के अनुसार इक्विटी और डेट के बीच बदलाव कर सकता है, बिना इसे सामान्य तौर पर अलग से कर योग्य घटना बनाए। इसी तरह पेंशन फंड मैनेजर बदलने पर भी इन प्रबंधन फैसलों को कर योग्य घटना नहीं माना जाता है। इससे लंबे समय के निवेश में पोर्टफोलियो को व्यवस्थित करना आसान हो सकता है।
रिटायरमेंट के समय एनपीएस का तीसरा टैक्स लाभ क्या है?
एनपीएस का तीसरा फायदा रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम से जुड़ा है। दिए गए विवरण के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत गैर-सरकारी निवेशक कुल जमा राशि का 80 प्रतिशत तक टैक्स-फ्री एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी राशि का इस्तेमाल आमतौर पर एन्युटी खरीदने के लिए किया जाता है और एन्युटी की खरीद को भी लागू व्यवस्था के तहत अनुकूल टैक्स लाभ मिलता है। इस तरह एनपीएस में निवेश करने वाले व्यक्ति को केवल पैसा जमा करते समय ही टैक्स लाभ नहीं मिलता, बल्कि रिटायरमेंट के समय रकम निकालते हुए भी टैक्स से जुड़ी राहत का फायदा मिल सकता है।
एनपीएस का ट्रिपल टैक्स एडवांटेज क्यों महत्वपूर्ण है?
- एनपीएस के तीनों टैक्स फायदे को एक साथ देखें तो इसका असर केवल तत्काल टैक्स बचत तक सीमित नहीं रहता।
- पहला फायदा निवेश के समय योगदान पर मिलने वाली कटौती से जुड़ा है।
- दूसरा फायदा निवेश के दौरान इक्विटी और डेट के बीच पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग पर कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगने से मिलता है।
- तीसरा फायदा रिटायरमेंट के समय पात्र एकमुश्त निकासी और एन्युटी से जुड़ी टैक्स व्यवस्था में मिलता है।
- यही वजह है कि एनपीएस को लंबे समय के रिटायरमेंट निवेश के तौर पर देखा जाता है।
- लगातार 25 या 30 वर्षों तक निवेश करने वाले व्यक्ति के लिए ये फायदे निवेश की कुल लागत और रिटायरमेंट के बाद उपलब्ध रकम पर असर डाल सकते हैं।
क्या एनपीएस सिर्फ आज का टैक्स बचाने के बजाय भविष्य की संपत्ति बनाने का साधन है?
एनपीएस को समझने का सबसे अहम तरीका यही है कि इसे केवल आज की टैक्स बचत के नजरिए से न देखा जाए। रिटायरमेंट के लिए लंबे समय तक निवेश करने में पैसा कितनी कुशलता से बढ़ता है, पोर्टफोलियो में बदलाव पर कितना टैक्स लगता है और अंत में रकम निकालने पर क्या टैक्स व्यवस्था रहती है, ये सभी बातें महत्वपूर्ण हैं। एनपीएस में बताए गए तीन टैक्स फायदे इन तीनों चरणों को जोड़ते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के लिए एनपीएस कितना उपयोगी होगा, यह उसकी आय, कर व्यवस्था, निवेश अवधि, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट लक्ष्य पर निर्भर करेगा।