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Hindi News ›   Business ›   Bonus ›   SEBI Why do shares fall 30 days after IPO listing what role foreign investors have in Stock market pricing

सेबी का खुलासा: आईपीओ लिस्टिंग के 30 दिन बाद क्यों गिरते हैं शेयर, बाजार में विदेशी निवेशकों की भूमिका क्या?

Sat, 15 Aug 2026 03:40 PM IST
ज्योति भास्कर बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 15 Aug 2026 03:40 PM IST
सार

किन सवालों के जवाब
  • ईपीओ लिस्टिंग के 30 दिन बाद क्यों गिरते हैं शेयर?
  • बाजार में विदेशी निवेशकों की भूमिका क्या है?
  • विदेशी निवेशकों के हिस्सेदारी बेचने से बाजार कीमतों पर कितना असर?

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SEBI Why do shares fall 30 days after IPO listing what role foreign investors have in Stock market pricing
शेयर बाजार (सांकेतिक) - फोटो : amarujala.com

विस्तार

जब कोई आईपीओ शेयर बाजार में धमाकेदार मुनाफे के साथ लिस्ट होता है, तो ठीक 30 से 35 दिनों के भीतर अचानक उसमें तेज गिरावट आने लगती है। छोटे और खुदरा निवेशक अक्सर इसको देखकर घबरा जाते हैं और समझ नहीं पाते कि जिस शेयर में पहले दिन जबरदस्त खरीदारी थी, वह अचानक औंधे मुंह क्यों गिरने लगा।

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यदि आप आईपीओ में पैसा लगाते हैं, तो बाजार नियामक सेबी का नया अध्ययन आपको हैरान कर देगा। सेवी ने अप्रैल 2022 से अक्तूबर 2025 के बीच लिस्ट हुए 242 मेनबोर्ड आईपीओ पर एक विस्तृत अध्ययन किया है। इसके मुताबिक, आईपीओ में 30 दिन की लॉक-इन (बिक्री पर रोक) अवधि खत्म होते ही बड़े विदेशी निवेशक (एफपीआई) सबसे तेजी से मुनाफावसूली कर बाहर निकलते हैं, जिससे शेयर की कीमतों पर भारी दबाव बनता है।
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वर्तमान सेबी नियमों के अनुसार, बड़े निवेशकों को जो शेयर अलॉट होते हैं, उनमें से 50 फीसदी पर 30 दिन और बाकी 50 फीसदी पर 90 दिन का लॉक इन पीरियड (शेयर न बेचने की रोक) होता है। सेबी के अध्ययन के अनुसार, लिस्टिंग के 29वें दिन से 33वें दिन (टी+29 से टी+33) के बीच, जहां एंकर निवेशकों ने 10 फीसद से ज्यादा हिस्सेदारी बेची, वहां शेयर की कीमतों में औसतन 3.5 फीसदी से लेकर 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। जैसे-जैसे बिकवाली की रफ्तार बढ़ती है, शेयरों की सप्लाई अचानक बढ़ जाती है और कीमतें नीचे आ जाती हैं।
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एक साल में आधे शेयर बेच देते हैं बड़े निवेशक

  • सेबी ने पाया कि एंकर या बड़े निवेशकों की बिकवाली सिर्फ 30 या 90 दिन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे साल जारी रहती है।
  • 30 दिन बाद 3.5 फीसदी निकासी, 60 दिन बाद 9.3 फीसदी, 90 दिन बाद 18.5 फीसदी, 180 दिन बाद 34.4 फीसदी और 365 दिन बाद कुल आवंटन का 50.7 फीसदी हिस्सा बेच दिया जाता है।

निवेशकों के लिए सबक...
किसी आईपीओ में बड़े निवेशकों का नाम देखकर यह न मान लें कि वे लंबे समय तक शेयर रोकेंगे। लिस्टिंग होने के महीने भर बाद सतर्क हो जाएं। यदि आप खुले बाजार से शेयर खरीद रहे हैं, तो 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने का इंतजार करें। इस दौरान शेवर डिस्काउंट या बेहतर भाव पर मिल सकता है। कंपनी का कारोबार मजबूत है, तो अल्पकालिक दबाव से घबराने की जरूरत नहीं है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
सेबी के मुताबिक, पहली अनलॉक अवधि में शेयर बेचने वालों में सबसे आगे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक रहे। इन्होंने अपने आवंटन का अनलॉक खुलते ही बेच डाला। करीब 24.5 फीसदी हिस्सा

  • कॉरपोरेट निवेशकों ने 23.1 फीसदी और अन्य योग्य संस्थागत खरीदारों ने 21.6 फीसदी शेयर बेचे।
  • एक साल के भीतर विदेशी निवेशकों ने 37,491 करोड़ के कुल आवंटन में से करीब 22,474 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर मुनाफा वसूला।
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