Air India: फुकेत-दिल्ली विमान टर्बुलेंस मामले में सख्त सरकार, आउटगोइंग CEO कैंपबेल विल्सन तलब; जानिए अपडेट
एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट (AI2379) में हवा में अचानक आई भीषण हलचल (टर्बुलेंस) और विमान के 300 फीट नीचे गिरने की घटना के बाद सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। अब इस मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन और टाटा संस के कार्यकारी सलाहकार प्रदीप सिंह खरोला को तलब किया। जानिए पायलट की जांच और इस खौफनाक हादसे से जुड़े सभी नए खुलासे।
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हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान में सफर करना यात्रियों के लिए तब एक बेहद खौफनाक बुरे सपने में बदल गया, जब एअर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट अचानक हिचकोले खाते हुए करीब 300 फीट नीचे गिर गई। इस गंभीर हादसे में कम से कम 17 लोग बुरी तरह घायल हो गए। सरकार ने इस सुरक्षा चूक को बेहद गंभीरता से लिया है और मंगलवारको एअर इंडिया के आउटगोइंग सीईओ कैंपबेल विल्सन सहित एयरलाइन के शीर्ष अधिकारियों को दिल्ली स्थित नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से तलब किया। टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त मालिकाना हक वाली इस घाटे में चल रही एयरलाइन पर सरकार ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
उड्डयन मंत्रालय की इस बड़ी बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?
मंगलवार को बुलाई गई इस आपात बैठक में नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने एअर इंडिया के तीन सबसे बड़े अधिकारियों से आमने-सामने जवाब-तलब किया। बैठक में एअर इंडिया के सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन (जो अगले महीने एयरलाइन छोड़ सकते हैं), टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकारी सलाहकार व पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला, और एअर इंडिया के फ्लाइट सेफ्टी हेड दीपक जोशी शामिल हुए। सरकार की तरफ से बैठक में नागर विमानन महानिदेशालय (जीडीसीए) के महानिदेशक वीर विक्रम यादव और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) के महानिदेशक जी.वी.जी. युगंधर भी मौजूद रहे। हालांकि, बैठक के भीतर हुई बातचीत के खास विवरण अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसमें एअर इंडिया के समग्र सुरक्षा और परिचालन मानकों की कड़ी समीक्षा की गई।
बैठक के बाद एअर इंडिया के सीईओ ने क्या प्रतिक्रिया दी?
एअर इंडिया के निवर्तमान सीईओ कैंपबेल विल्सन ने फुकेत-दिल्ली उड़ान घटना के संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के बाद कहा, "हम सिर्फ जांच की स्थिति के बारे में जानकारी दे रहे थे...आगे की जानकारी देना मंत्रालय का काम है।"
4 अगस्त को आसमान में फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के साथ क्या हुआ था?
यह हादसा 4 अगस्त को एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के साथ हुआ, जो फुकेत (थाईलैंड) से दिल्ली आ रही थी। VT-EXO रजिस्ट्रेशन वाले इस एयरबस A320 विमान में 137 यात्री (जिनमें 3 छोटे बच्चे शामिल थे) और 8 क्रू मेंबर्स सवार थे। जब विमान अपनी तय ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी अचानक उसे तेज हवाई हलचल (टर्बुलेंस) का झटका लगा और विमान पलक झपकते ही करीब 300 फीट नीचे गिर गया। इस भीषण झटके में विमान के अंदर सवार 17 लोग घायल हो गए, जिनमें चार केबिन क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। हालांकि, पायलटों ने सूझबूझ से विमान को नियंत्रित किया और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई।
क्या विमान में टर्बुलेंस के अलावा कोई तकनीकी खराबी भी थी?
जी हां, इस हादसे के बाद एक और बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को यह जानकारी सामने आई कि इस प्रभावित विमान ने केवल टर्बुलेंस का ही सामना नहीं किया, बल्कि उड़ान के दौरान इसमें कई तकनीकी खामियां और हाइड्रोलिक फेलियर की समस्याएं भी देखी गई थीं। इन गंभीर समस्याओं ने विमान की सुरक्षा और रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पायलट के मेडिकल टेस्ट ने इस मामले में क्या नया मोड़ ला दिया है?
इस पूरे हादसे में सबसे संवेदनशील और चौंकाने वाला पहलू विमान के मुख्य पायलट से जुड़ा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 9 अगस्त को बताया कि पायलट के शुरुआती साइकोएक्टिव पदार्थ (नशीले/मानसिक प्रभाव वाले पदार्थ) की स्क्रीनिंग टेस्ट की रिपोर्ट ऐसी आई है जिससे लगता है कि इसकी और बारीकी से जांच जरूरी है। इसके बाद उनके सैंपल को पुख्ता जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल इस अंतिम पुष्टि करने वाली टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल हादसे की जांच में कौन सी विदेशी एजेंसियां मदद कर रही हैं?
भारत की मुख्य जांच एजेंसी, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। चूंकि यह विमान एक एयरबस था, इसलिए इस जांच में मदद करने के लिए फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी बीईए और खुद एयरबस की विशेषज्ञ टीमें भी भारतीय जांच दल (AAIB) की सहायता कर रही हैं। ये टीमें तकनीकी पहलुओं और ब्लैक बॉक्स के डेटा का विश्लेषण कर हादसे की असली वजह का पता लगाने में मदद करेंगी।