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Fitch Ratings: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, फिच ने सॉवरेन रेटिंग बरकरार रखी

Tue, 11 Aug 2026 04:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 11 Aug 2026 04:18 PM IST
सार

फिच रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन रेटिंग 'BBB-' पर स्थिर दृष्टिकोण के साथ बरकरार रखी है। एजेंसी ने पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान संघर्ष की चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और वृद्धि की संभावनाओं की सराहना की। सरकार का ऋण-से-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात कम करने का लक्ष्य भी बताया गया। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Fitch Affirms India's Sovereign Rating, Citing Strong Domestic Economy Despite Global Headwinds
भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने मंगलवार को भारत की सॉवरेन रेटिंग 'BBB-' पर बरकरार रखी है। एजेंसी ने देश के लिए 'स्थिर दृष्टिकोण' भी बनाए रखा है। फिच ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न ऊर्जा संकट की चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

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फिच को अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता से भारत की वृद्धि की संभावनाओं पर कोई स्थायी जोखिम नहीं दिखता है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाल के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था झटकों के प्रति लचीली रही है। फिच को उम्मीद है कि यह सकारात्मक प्रवृत्ति भविष्य में भी जारी रहेगी। 'BBB-' रेटिंग सबसे कम निवेश ग्रेड रेटिंग मानी जाती है।

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भारत की रेटिंग किन बातों को दर्शाती है?

भारत की यह रेटिंग उसके मजबूत वृद्धि दृष्टिकोण को दर्शाती है। इसके साथ ही, यह देश के मजबूत बाहरी वित्त बुनियादी सिद्धांतों को भी परिलक्षित करती है। फिच ने मौजूदा वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2027) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 6.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। यह वित्त वर्ष मार्च 2027 में समाप्त होगा। व्यापक आर्थिक स्थिरता प्रदान करने का मजबूत होता रिकॉर्ड भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

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आर्थिक लचीलापन कैसे बढ़ेगा?

नीतिगत विश्वसनीयता में सुधार निरंतर मजबूत वृद्धि का आधार बनेगा। यह देश के आर्थिक लचीलेपन को भी बढ़ाएगा। फिच ने बताया कि यह सब निकट अवधि की व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद संभव होगा। उच्च वृद्धि संरचनात्मक ऋण मानदंड में निरंतर सुधार का समर्थन करेगी। इससे सरकारी ऋण के नीचे की ओर जाने की संभावना भी बढ़ेगी।

सरकार का ऋण घटाने का क्या लक्ष्य है?

वित्त वर्ष 2027 के बजट में सरकार ने ऋण-से-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात 55.6 फीसदी अनुमानित किया था। यह वित्त वर्ष 2026 के 56.1 फीसदी से कम है। सरकार ने मार्च 2031 तक अपने ऋण-से-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात को 50 फीसदी तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य देश की वित्तीय स्थिरता को और मजबूत करेगा।

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