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Air India: एअर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर घटाया फ्यूल सरचार्ज, जानें यात्रियों को कैसे मिलेगी राहत

Fri, 03 Jul 2026 06:17 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 03 Jul 2026 06:17 PM IST
सार

एअर इंडिया ने चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर ईंधन अधिभार में कटौती की है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए यात्रियों को अब कम भुगतान करना होगा, जिससे यात्रा सस्ती होगी।

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Air India Reduces Fuel Surcharge on International Flights
एअर इंडिया फ्यूल सरचार्ज - फोटो : amarujala.com

विस्तार

हवाई यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। एअर इंडिया ने अपने चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर लगने वाले फ्यूल सरचार्ज यानी ईंधन अधिभार में बड़ी कटौती की घोषणा की है। इस कदम से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा अब सस्ती हो जाएगी।

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यह कटौती यात्रियों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाएगी। अप्रैल महीने में यूरोप के लिए प्रति यात्री ईंधन अधिभार 205 डॉलर था। उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए यह 280 डॉलर प्रति यात्री था। अब इन दरों में उल्लेखनीय कमी की गई है। यूरोप के लिए नया अधिभार 125 डॉलर प्रति यात्री होगा।
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उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए यह 200 डॉलर प्रति यात्री कर दिया गया है। यह बदलाव हवाई यात्रा को अधिक किफायती बनाएगा। एयरलाइन का यह निर्णय यात्रियों को आकर्षित करने में सहायक होगा।

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यात्रियों को कितना फायदा होगा?

इस कटौती से यात्रियों को प्रति टिकट काफी बचत होगी। यूरोप जाने वाले यात्रियों को अब 80 डॉलर कम देने होंगे। उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए यात्रा करने वालों को भी 80 डॉलर की बचत होगी। यह कमी सीधे तौर पर हवाई किराए को प्रभावित करेगी। इससे लंबी दूरी की यात्राएं अधिक सुलभ हो जाएंगी।

फ्यूल सरचार्ज क्या होता है?

फ्यूल सरचार्ज वह अतिरिक्त शुल्क है, जिसे एयरलाइंस यात्रियों से विमान के ईंधन (एविएशन टरबाइन फ्यूल- ATF) की लागत को पूरा करने के लिए टिकट किराये के अलावा वसूलती हैं।

आसान भाषा में समझें

मान लीजिए किसी फ्लाइट का मूल किराया ₹4,000 है।
इसके अलावा टिकट में यह शुल्क भी जुड़ सकते हैं:

  • बेस फेयर: ₹4,000
  • फ्यूल सरचार्ज: ₹800
  • एयरपोर्ट शुल्क: ₹600
  • GST/अन्य टैक्स: ₹300

कुल टिकट कीमत: ₹5,700

यानी फ्यूल सरचार्ज टिकट की कुल कीमत का एक हिस्सा होता है, लेकिन यह मूल किराए से अलग दिखाया जा सकता है।

एयरलाइंस इसे क्यों वसूलती हैं?

विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा ईंधन पर होता है। जब:

  • एटीएफ की कीमत बढ़ती है,
  • कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं,
  • या डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आती है,

तो एयरलाइंस पर ईंधन का खर्च बढ़ जाता है। इस अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए वे फ्यूल सरचार्ज लगा सकती हैं।

क्या हर टिकट पर फ्यूल सरचार्ज लगता है?

जरूरी नहीं। कुछ एयरलाइंस इसे अलग से दिखाती हैं। कुछ इसे बेस फेयर में ही शामिल कर देती हैं। कई बार प्रमोशनल ऑफर या प्रतिस्पर्धा के कारण इसे कम या शून्य भी रखा जा सकता है।

क्या सरकार फ्यूल सरचार्ज तय करती है?

नहीं। अधिकांश मामलों में यह एयरलाइन की व्यावसायिक नीति पर निर्भर करता है। हालांकि एयरलाइंस को लागू नियमों और पारदर्शिता संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना होता है।

क्या फ्यूल सरचार्ज टैक्स है?

नहीं। यह सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स नहीं है। यह एयरलाइन द्वारा लिया जाने वाला एक अतिरिक्त शुल्क है। फ्यूल सरचार्ज वह अतिरिक्त राशि है, जिसे एयरलाइंस विमान के ईंधन की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए टिकट किराए के साथ यात्रियों से वसूलती हैं।

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