GoDaddy Concern: क्या फर्जी वेबसाइटों पर भारत की सख्ती इंटरनेट को बना देगी असुरक्षित? जानिए गोडैडी को क्या आशं
क्या फर्जी वेबसाइटों पर भारत सरकार की नई नीति इंटरनेट को असुरक्षित बना देगी? जानिए क्यों दुनिया की सबसे बड़ी डोमेन कंपनी गोडैडी ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती और क्या होंगे इसके वैश्विक परिणाम। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते प्रसार के साथ भारत में साइबर धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है, जहां पिछले साल करीब 2.4 अरब डॉलर से जुड़ी 24 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। इस समस्या से निपटने के लिए एक अदालती आदेश के जरिए इंटरनेट संचालन (गवर्नेंस) के स्थापित नियमों को बदल दिया है। हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े डोमेन विक्रेता गोडैडी ने आशंका जाहिर की है कि फर्जी वेबसाइटों पर इस कड़े प्रहार से वैध व्यवसाय असुरक्षित हो सकते हैं और इसके गंभीर वैश्विक परिणाम होंगे।
अदालती आदेश में ऐसा क्या है जिससे टेक कंपनियां परेशान हैं?
यह विवाद अमेजन, मैकडॉनल्ड्स, माइक्रोसॉफ्ट, श्याओमी जैसी 20 से अधिक कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं के बाद शुरू हुआ, जिनकी नकल कर फर्जी वेबसाइटें बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर रही थीं। इसके बाद अदालत ने दिसंबर में 1,100 से अधिक फर्जी वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया।
हालांकि, अदालत ने कुछ अतिरिक्त दूरगामी निर्देश भी जारी किए, जिन पर अब विवाद है:
- डोमेन विक्रेताओं को खरीदारों को डिफॉल्ट रूप से मुफ्त गोपनीयता सुरक्षा देने पर रोक।
- वैध हित होने पर किसी भी व्यक्ति को 72 घंटे के भीतर खरीदार का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य।
- सुरक्षित ब्रांड नामों से मिलते-जुलते अल्फ़ान्यूमेरिक बदलावों वाले डोमेन नामों की बिक्री पर प्रतिबंध।
गोडैडी और अन्य कंपनियों को इस फैसले पर क्या आपत्ति है?
अमेरिका स्थित गोडैडी ने इन निर्देशों को दिल्ली उच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के सामने चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि 'डिफॉल्ट गोपनीयता' खत्म करने से वैध वेबसाइट मालिकों के नाम, पते, फोन नंबर और ईमेल सार्वजनिक हो जाएंगे, जिससे उन्हें उत्पीड़न और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इससे केवल वैध उपयोगकर्ता जैसे पत्रकार या छोटे व्यवसायी प्रभावित होंगे, असली जालसाज नहीं।
गोडैडी का यह भी तर्क है कि मात्र 72 घंटों में 'वैध हित' की पहचान करना उसके सामर्थ्य के बाहर है। कंपनी ने अपने 5,121 पन्नों के अपील दस्तावेज में इन निर्देशों को व्यावसायिक रूप से अस्थिर करने वाला बताते हुए चेतावनी दी है कि यह उन्हें 'भारत से कारोबार समेटने' 'पर मजबूर कर सकता है। नेमचीप और होस्टिंग कॉन्सेप्ट्स जैसी गोडैडी की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने भी इस आदेश को चुनौती दी है।
क्या ब्रांड नामों के हर विकल्प पर प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक है?
गोडैडी के अनुसार, ब्रांड नामों के हर अल्फान्यूमेरिक वेरिएशन को रोकना असंभव है। उदाहरण के लिए, 'मैकडॉनल्ड्स' मूल रूप से एक लोकप्रिय स्कॉटिश नाम है जिसका अर्थ 'दुनिया के शासक का पुत्र' होता है। इस पर पूरी तरह रोक लगाने से एक सामान्य भाषाई नाम पर एकाधिकार बन जाएगा।
यूनिलीवर के ट्रेडमार्क 'एचयूएल' के संरक्षण से 'hulk' या 'moghul' जैसे अंग्रेजी के कम से कम 118 शब्द प्रभावित होंगे। गोडैडी का कहना है कि ट्रेडमार्क के टकराव के बिना अंग्रेजी का कोई नया डोमेन पंजीकृत करना लगभग असंभव हो जाएगा।
भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का इस पर क्या रुख है?
भारत के गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, देश में हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है, जिससे यह एक "राष्ट्रीय संकट" बन सकता है। गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय दोनों ही त्वरित जांच के लिए डोमेन पंजीकरण विवरण को आसानी से उपलब्ध कराने और वेरिफिकेशन को कड़ा करने के पक्ष में हैं। यह रुख सरकार की वैश्विक टेक कंपनियों के साथ पूर्व में हुई विवादों की कड़ियों से मेल खाता है। अब इस अहम कानूनी लड़ाई की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है, जो भारत में डिजिटल सुरक्षा और इंटरनेट नियमों का भविष्य तय करेगी।