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आर्थिक मोर्चे पर भारत की रफ्तार तेज: GDP से GST तक दमदार प्रदर्शन, हर पैमाने पर मजबूत हुई भारतीय अर्थव्यवस्था
Fri, 03 Jul 2026 05:23 AM IST
अमन तिवारी
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 03 Jul 2026 05:23 AM IST
सार
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते सार्वजनिक निवेश और रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह के सहारे तेजी से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 फीसदी जीडीपी वृद्धि के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा।
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GDP, GST और निवेश में मजबूती
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वैश्विक अनिश्चितताओं और युद्ध संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश और स्थिर राजस्व संग्रह के दम पर आने वाले महीनों में भी विकास की रफ्तार बनी रहेगी।
सरकारी आर्थिक संकेतकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 7.7 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर्ज कर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बरकरार रखा। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में विस्तार, औद्योगिक उत्पादन में तेजी, मजबूत जीएसटी संग्रह और बढ़ते पूंजीगत व्यय ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है।
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 7 फीसदी थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, खपत और निवेश में सुधार के कारण दर्ज की गई।
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राजकोषीय अनुशासन पर भरोसा...सरकार को भरोसा है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में आई नरमी से वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य (जीडीपी का 4.3%) को हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों ने भी मजबूती दिखाई। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां तेज होने से बिजली की मांग मई में 11.2 फीसदी बढ़ी। बंदरगाहों पर माल ढुलाई वृद्धि दर 6.6 फीसदी पहुंच गई। वाहनों की मांग में भी तेजी बनी रही। गावों में वाहनों की बिक्री मई में 7.8 फीसदी बढ़ी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत है।
जीएसटी और कर संग्रह में मजबूती
जून 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 13.9 फीसदी बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि 17 जून तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 फीसदी बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रहा। मई में ई-वे बिल जनरेशन 10.9 फीसदी बढ़ा।
बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ा
अप्रैल-मई 2026 के दौरान पूंजीगत व्यय बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से करीब 29,650 करोड़ अधिक है। अकेले भारतीय रेलवे ने 84,000 करोड़ से अधिक खर्च किया।
ये भी पढ़ें: सिक्किम-बंगाल के रिश्तों को नई रफ्तार?: शुभेंदु से मिले प्रेम तमांग, तीस्ता ड्रेजिंग व इन मुद्दों पर बनी सहमति
विनिर्माण व सेवा क्षेत्र का विस्तार
जून 2026 में एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 54.2 पर रहा। लगातार 37वें महीने यह 50 के ऊपर बना हुआ है, जो विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत है। सेवा क्षेत्र भी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बना। नए ग्राहकों की संख्या बढ़ने, मांग में सुधार और निर्यात ऑर्डरों में बढ़ोतरी से गतिविधियां तेज हुई हैं। औद्योगिक उत्पादन पांच महीने के उच्च स्तर पर देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) मई 2026 में बढ़कर 5.1 फीसदी हो गया, जो पांच महीनों का उच्चतम स्तर है। मोटर वाहन, इलेक्ट्रिक उपकरण और बेसिक मेटल उद्योगों ने बेहतर प्रदर्शन किया।
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सरकारी आर्थिक संकेतकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 7.7 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर्ज कर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बरकरार रखा। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में विस्तार, औद्योगिक उत्पादन में तेजी, मजबूत जीएसटी संग्रह और बढ़ते पूंजीगत व्यय ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है।
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वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 7 फीसदी थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, खपत और निवेश में सुधार के कारण दर्ज की गई।
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राजकोषीय अनुशासन पर भरोसा...सरकार को भरोसा है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में आई नरमी से वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य (जीडीपी का 4.3%) को हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों ने भी मजबूती दिखाई। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां तेज होने से बिजली की मांग मई में 11.2 फीसदी बढ़ी। बंदरगाहों पर माल ढुलाई वृद्धि दर 6.6 फीसदी पहुंच गई। वाहनों की मांग में भी तेजी बनी रही। गावों में वाहनों की बिक्री मई में 7.8 फीसदी बढ़ी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत है।
जीएसटी और कर संग्रह में मजबूती
जून 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 13.9 फीसदी बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि 17 जून तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 फीसदी बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रहा। मई में ई-वे बिल जनरेशन 10.9 फीसदी बढ़ा।
बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ा
अप्रैल-मई 2026 के दौरान पूंजीगत व्यय बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से करीब 29,650 करोड़ अधिक है। अकेले भारतीय रेलवे ने 84,000 करोड़ से अधिक खर्च किया।
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विनिर्माण व सेवा क्षेत्र का विस्तार
जून 2026 में एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 54.2 पर रहा। लगातार 37वें महीने यह 50 के ऊपर बना हुआ है, जो विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत है। सेवा क्षेत्र भी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बना। नए ग्राहकों की संख्या बढ़ने, मांग में सुधार और निर्यात ऑर्डरों में बढ़ोतरी से गतिविधियां तेज हुई हैं। औद्योगिक उत्पादन पांच महीने के उच्च स्तर पर देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) मई 2026 में बढ़कर 5.1 फीसदी हो गया, जो पांच महीनों का उच्चतम स्तर है। मोटर वाहन, इलेक्ट्रिक उपकरण और बेसिक मेटल उद्योगों ने बेहतर प्रदर्शन किया।