Report: केंद्र का राजकोषीय घाटा अप्रैल-मई में बढ़ने का कारण सब्सिडी और ब्याज भुगतान, जानिए रिपोर्ट में क्या
इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2027 के अप्रैल-मई में केंद्र का राजकोषीय घाटा 1.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सब्सिडी और ब्याज भुगतान में वृद्धि तथा राजस्व वृद्धि में कमी इसका मुख्य कारण रही। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
वित्तीय वर्ष 2027 के शुरुआती दो महीनों में केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। इक्विरस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-मई में राजकोषीय घाटा बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 9.6 फीसदी है। उच्च सब्सिडी और ब्याज भुगतान के साथ राजस्व वृद्धि में कमी इसका मुख्य कारण रही।
रिपोर्ट बताती है कि कुल व्यय में लगभग 18 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई है। वहीं, कुल प्राप्तियों में लगभग दो फीसदी की कमी दर्ज की गई। यह कमी कर और पूंजीगत प्राप्तियों दोनों में गिरावट के कारण हुई। सार्वजनिक वित्त पर दबाव के बावजूद, पूंजीगत व्यय मजबूत बना रहा। अप्रैल-मई में पूंजीगत व्यय में 13.4 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई। यह वित्तीय वर्ष 2027 के बजट अनुमान का 20.5 फीसदी रहा। इसमें मुख्य रूप से रेलवे पर खर्च और राज्यों को हस्तांतरण शामिल है।
राजस्व वृद्धि चिंता का विषय क्यों बनी?
राजस्व वृद्धि एक बड़ी चिंता के रूप में सामने आई है। सकल कर राजस्व में केवल 1.8 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई। जीएसटी और उत्पाद शुल्क संग्रह में कमी देखी गई। सीमा शुल्क और कॉरपोरेट कर संग्रह में अच्छी वृद्धि हुई। हालांकि, रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि कच्चे तेल की कीमतें गिरने पर सीमा शुल्क राजस्व नरम हो सकता है। आयकर संग्रह भी सुस्त रहा, जिससे वार्षिक लक्ष्यों को पूरा करने पर सवाल उठे हैं।
सब्सिडी और ब्याज भुगतान का क्या असर रहा?
सब्सिडी का खर्च वित्तीय दृष्टिकोण के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी वैश्विक इनपुट कीमतों में वृद्धि के कारण उर्वरक सब्सिडी बढ़ी है। खाद्य सब्सिडी में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। यह उच्च खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण हुआ। ब्याज भुगतान भी इस अवधि में लगातार बढ़े हैं। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि खाद्य और उर्वरक सब्सिडी मिलकर छह लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती हैं।
क्या वित्तीय स्थिति में सुधार की उम्मीद है?
अधिकारियों के अनुसार, यह अधिक खर्च बाद में पूंजीगत या अन्य विवेकाधीन खर्चों में कटौती के लिए मजबूर कर सकता है। हालांकि, इक्विरस का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में नरमी आई है। इससे सरकार के वित्तीय दृष्टिकोण में सुधार हुआ है। वित्तीय वर्ष 2027 के शेष भाग के लिए स्थिति बेहतर दिख रही है। सरकार के 4.3 फीसदी सकल घरेलू उत्पाद के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुछ व्यय समेकन की आवश्यकता हो सकती है। राजस्व संग्रह में सुधार न होने पर पूंजीगत व्यय पर इसका असर पड़ सकता है।