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Explainer: दावा- आधार से जुड़ी जानकारी डार्क नेट पर, क्या है बैंक ऑफ बड़ौदा में डेटा लीक का सच; जानें सबकुछ

Tue, 28 Jul 2026 05:53 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 28 Jul 2026 05:53 PM IST
सार

क्या बैंक ऑफ बड़ौदा का 1 टीबी डेटा लीक हुआ है? जानिए एक कर्मचारी के ईमेल कॉम्प्रोमाइज से शुरू हुए इस विवाद, ग्राहकों की आधार सुरक्षा और बैंक के 750 करोड़ रुपये के साइबर इंश्योरेंस दावे का पूरा सच। विस्तृत बिजनेस एक्सप्लेनर यहाँ पढ़ें।

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Bank of Baroda 1TB Data Leak Explainer: Reason, Customer Aadhaar Safety and Rs 750 Crore Cyber Insurance Claim
बैंक ऑफ बड़ौदा से डेटा लीक की पूरी कहानी। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

क्या देश के बड़े सरकारी बैंकों में से एक, बैंक ऑफ बड़ौदाके ग्राहकों का संवेदनशील डेटा सच में डार्कनेट पर बिक रहा है? हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उड़े एक दावे ने देश के बैंकिंग सेक्टर और करोड़ों बैंक ग्राहकों के बीच सनसनी फैला दी है। दावा किया गया है कि बैंक का करीब 1 टेराबाइट  निजी और संवेदनशील डेटा, जिसमें ग्राहकों की आधार डिटेल्स भी शामिल हैं, इंटरनेट के डार्कनेट प्लेटफॉर्म पर लीक हो गया है। 

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लेकिन क्या वाकई आपका पैसा और बैंक खाता खतरे में है? इस कथित डेटा लीक के पीछे की असली वजह क्या है और बैंक ने ग्राहकों के हितों की रक्षा और अपने वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए क्या बड़े कदम उठाए हैं? आइए, आसान बोलचाल की भाषा में इस पूरे विषय को सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं।

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क्या वाकई बैंक ऑफ बड़ौदा का 1TB डेटा लीक हो गया है?

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कुछ पोस्ट वायरल होने लगीं, जिनमें दावा किया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा एक संभावित डेटा लीक का शिकार हुआ है। इन पोस्ट्स में आरोप लगाया गया कि बैंक का करीब 1 टेराबाइट संवेदनशील डेटा अनधिकृत रूप से हासिल कर लिया गया है, जिसमें ग्राहकों के आधार कार्ड की जानकारियां भी शामिल हैं। इसके तुरंत बाद, इंटरनेट सुरक्षा पर नजर रखने वाली वेबसाइटों ने भी रिपोर्ट किया कि इस कथित सुरक्षा चूक से जुड़ा एक डेटासेट ऑनलाइन उपलब्ध हो गया है। इस खबर ने डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को लेकर ग्राहकों और विशेषज्ञों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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Bank of Baroda 1TB Data Leak Explainer: Reason, Customer Aadhaar Safety and Rs 750 Crore Cyber Insurance Claim
इंटरनेट टिप्स - फोटो : freepik

इस कथित डेटा लीक की असली वजह क्या है?

डेटा लीक के दावों पर स्पष्टीकरण देते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्थिति साफ की है। बैंक के अनुसार, यह डेटा लीक उनके पूरे बैंकिंग नेटवर्क या कोर इंफ्रास्ट्रक्चर की किसी बड़ी तकनीकी खामी के कारण नहीं हुआ है। इस घटना के पीछे की असली वजह एक अकेले कर्मचारी का ईमेल अकाउंट हैक होना है। इसी एक कर्मचारी के ईमेल खाते से अनधिकृत पहुंच बनाकर कुछ डेटा तक पहुंच हासिल की गई थी। बैंक ने जोर देकर कहा है कि उनके पास सूचना सुरक्षा के बेहद मजबूत और पुख्ता प्रोटोकॉल मौजूद हैं और जैसे ही इस घटना की पहचान हुई, तुरंत संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए।

क्या बैंक में जमा ग्राहकों का पैसा और मुख्य बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित है?

करोड़ों ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि बैंक का मुख्य लेनदेन सिस्टम सुरक्षित है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि उनके कोर बैंकिंग सिस्टम पर इस हमले का कोई असर नहीं पड़ा है। मुख्य बैंकिंग सिस्टम को हैकर्स द्वारा न तो एक्सेस किया गया है और न ही उसमें किसी प्रकार की सेंध लगी है, इसलिए ग्राहकों के वित्तीय लेनदेन और जमा पूंजी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अनधिकृत पहुंच को कर्मचारी के ईमेल स्तर पर ही रोक दिया गया था।

Bank of Baroda 1TB Data Leak Explainer: Reason, Customer Aadhaar Safety and Rs 750 Crore Cyber Insurance Claim
नए आधार एप में मोबाइल सेवाएं बढ़ीं - फोटो : अमर उजाला

सुरक्षा चूक के बाद बैंक ने क्या कानूनी और तकनीकी कदम उठाए हैं?

डेटा लीक की खबर सामने आने के बाद, बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी सुरक्षा और कानूनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए कई बड़े कदम उठाए हैं:

  • फॉरेंसिक जांच की शुरुआत: बैंक ने इस घटना की पूरी सच्चाई और इसके दायरे का पता लगाने के लिए एक व्यापक फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है।
  • नियामकों को सूचना: नियामक नियमों का पालन करते हुए बैंक ने संबंधित नियामकों को इस घटना की समय पर जानकारी दे दी है।
  • एजेंसियों के साथ सहयोग: बैंक इस सुरक्षा चूक की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार काम कर रहा है।
  • सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता: बैंक ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि वे सूचना सुरक्षा मानकों को बनाए रखने और ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

बैंक का 750 करोड़ रुपये का साइबर इंश्योरेंस दावा क्या है?

इस डेटा लीक के कारण होने वाले किसी भी संभावित वित्तीय नुकसान और देनदारियों से खुद को बचाने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक बड़ा वित्तीय कदम उठाया है। बैंक ने अपने साइबर इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत बीमा कंपनी को नुकसान की सूचना दे दी है।

Bank of Baroda 1TB Data Leak Explainer: Reason, Customer Aadhaar Safety and Rs 750 Crore Cyber Insurance Claim
शिक्षक हुए साइबर फ्रॉड के शिकार

इस साइबर इंश्योरेंस कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • कुल बीमा कवरेज: बैंक ऑफ बड़ौदा के पास करीब 750 करोड़ रुपये का एक विशाल साइबर इंश्योरेंस प्रोग्राम है।
  • लीड बीमाकर्ता: इस पूरे बीमा कार्यक्रम का नेतृत्व सरकारी बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कर रही है, जो दावों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।
  • सालाना प्रीमियम: इस उच्च स्तरीय साइबर सुरक्षा कवर के लिए बैंक सालाना लगभग छह करोड़ रुपये का प्रीमियम चुकाता है, जिसे कई घरेलू बीमा और री-इंश्योरेंस कंपनियों का समर्थन प्राप्त है।
  • पॉलिसी के तहत नुकसान की सीमा: इस बीमा पॉलिसी के तहत बैंक के लिए नुकसान की सीमा करीब 300 करोड़ रुपये निर्धारित है।
  • दावे का भुगतान किस आधार पर होगा?: इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत अंतिम भुगतान इस बात पर निर्भर करेगा कि इस डेटा लीक के कारण बैंक को कितना वास्तविक वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, नियामकों द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है, कामकाज में कितना व्यवधान आता है और ग्राहकों या तीसरे पक्ष के प्रति बैंक की कितनी देनदारी बनती है। फिलहाल, फॉरेंसिक जांच जारी रहने के कारण इसे केवल एक पूर्व-सूचना के रूप में दर्ज कराया गया है।

इस साइबर हमले के बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या मायने हैं?

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि साइबर सुरक्षा में मानवीय भूल या एक कमजोर कड़ी भी कितनी भारी पड़ सकती है। भले ही बैंक का कोर बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह अभेद्य हो, लेकिन केवल एक कर्मचारी के ईमेल खाते में सेंध लगने से इतने बड़े डेटा लीक का दावा खड़ा हो सकता है। आने वाले समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फॉरेंसिक जांच की अंतिम रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और नियामक इस सुरक्षा चूक पर बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ क्या रुख अपनाते हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा की त्वरित कार्रवाई और मजबूत तकनीकी सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण उनका कोर बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और आपके जमा पैसों को कोई खतरा नहीं है। बैंक ने फॉरेंसिक जांच शुरू करके और 750 करोड़ रुपये के साइबर इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत दावा पेश करके अपने वित्तीय जोखिमों को पूरी तरह से नियंत्रित करने की कोशिश की है। हालांकि, इस घटना ने डिजिटल युग में हर स्तर पर सुरक्षा सावधानी बरतने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।

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