DGCA on Air Fare: घरेलू हवाई किराए में भारी उछाल, विमानन नियामक ने बताया- जून 2026 में 20.5 फीसदी की वृद्धि
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में 72 घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराया मई 2025 की तुलना में 20.5 फीसदी बढ़ गया। सरकार ने बताया कि एयरलाइंस की परिचालन लागत, ईंधन की कीमतें और अन्य कारक किराए को प्रभावित करते हैं, और किराए का विनियमन सरकार के अधीन नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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देश में हवाई यात्रा महंगी हो गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। जून 2026 में 72 घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराया 20.5 फीसदी बढ़ गया है। यह वृद्धि मई 2025 की तुलना में दर्ज की गई है।
सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एक लिखित जवाब में बताया। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस की परिचालन लागतें स्वाभाविक रूप से गतिशील होती हैं। इसका अर्थ है कि ये लागतें लगातार बदलती रहती हैं। कई कारक इन व्यक्तिगत घटकों को प्रभावित करते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमत शामिल है। विदेशी विनिमय दरें भी एक महत्वपूर्ण कारक हैं। उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) भी लागत पर असर डालते हैं। लीज किराया भी परिचालन लागत का हिस्सा होता है।
हवाई किराया क्यों बढ़ा?
हवाई किराए में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। एयरलाइंस की परिचालन लागतें लगातार बदलती रहती हैं। विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटती-बढ़ती रहती हैं। एटीएफ अकेले एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का 35 से 40 फीसदी हिस्सा होता है। इसलिए, एटीएफ की कीमत में जरा सा भी बदलाव किराए पर बड़ा असर डालता है। विदेशी विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी लागत बढ़ाता है। इसके अलावा, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) भी एयरलाइंस पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। विमानों के लीज किराए में वृद्धि भी किराए बढ़ने का एक कारण है।
हवाई किराए पर किसका नियंत्रण है?
सरकार हवाई किराए को सीधे नियंत्रित नहीं करती है। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि हवाई किराए का विनियमन सरकार के अधीन नहीं है। हर हवाई परिवहन उपक्रम अपना किराया खुद तय करता है। किराया तय करते समय एयरलाइंस कई कारकों को ध्यान में रखती हैं। इनमें परिचालन लागत, सेवा की विशेषताएं और उचित लाभ शामिल हैं। एयरलाइंस को विमान नियम, 1937 के नियम 135 का पालन करना होता है। यह नियम उन्हें अपनी सेवाओं के लिए उचित शुल्क निर्धारित करने की अनुमति देता है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
हवाई किराए में 20.5 फीसदी की वृद्धि से यात्रियों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा। खासकर उन 72 घरेलू मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को अधिक भुगतान करना होगा। हालांकि, इन 72 मार्गों का विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। सरकार द्वारा किराए का विनियमन न करने का मतलब है कि एयरलाइंस अपनी लागत और बाजार की मांग के अनुसार किराया बढ़ा सकती हैं। इससे यात्रियों के लिए हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है। त्योहारों या छुट्टियों के मौसम में किराए में और वृद्धि की संभावना रहती है। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन बढ़ी हुई कीमतों को ध्यान में रखना होगा।