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Income Tax Return: ITR भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना घर पहुंच सकता है इनकम टैक्स नोटिस

Mon, 27 Jul 2026 04:43 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 27 Jul 2026 04:43 AM IST
सार

आयकर रिटर्न भरते समय छोटी-सी गलती भी आयकर विभाग के नोटिस की वजह बन सकती है। सही आईटीआर फॉर्म का चयन, AIS और Form 26AS का मिलान, सभी आय का सही खुलासा, उचित टैक्स व्यवस्था का चयन और समय पर ई-वेरीफिकेशन करने से नोटिस की संभावना काफी कम हो जाती है। यदि नोटिस मिले तो घबराने के बजाय आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से समय पर दस्तावेजों सहित जवाब देना चाहिए।

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Avoid making these mistakes while filing your Income Tax Return otherwise you could receive it notice
आईटीआर - फोटो : Istock

विस्तार

आयकरदाता हर साल आखिरी तारीख की आपाधापी में आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइल कर अपनी जिम्मेदारी तो पूरी कर देते हैं, लेकिन इसी हड़बड़ी में जाने-अनजाने कई ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिनका खामियाजा बाद में आयकर विभाग के नोटिस के रूप में भुगतना पड़ता है।

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कैसे एक छोटी-सी गलती बन गई नोटिस की वजह?
पिछले साल 31 जुलाई की रात 12 बजे से पहले आशीष तिवारी ने अपना आईटीआर फाइल कर राहत की सांस ली। उन्हें लगा कि समय पर इनकम टैक्स रिटर्न भरकर उन्होंने अपनी नागरिक जिम्मेदारी पूरी कर दी। लेकिन ठीक चार महीने बाद उनके पास आयकर विभाग का नोटिस पहुंच गया। आखिरी तारीख की आपाधापी में आशीष ने आईटीआर तो भर दिया था, लेकिन सालभर में शेयर बाजार से हुए छोटे-मोटे शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन और बैंक एफडी से मिले ब्याज की जानकारी देना भूल गए थे। ऐसा करने वाले आशीष अकेले नहीं थे। पिछले साल आयकर विभाग ने एक लाख से अधिक करदाताओं को नोटिस जारी किए थे। इसके अलावा करीब 1.65 लाख मामलों को विभाग ने स्क्रूटनी के लिए चुना था। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में लगभग तीन से चार गुना अधिक है। आज आयकर विभाग के पास ऐसा एआई सिस्टम है, जो आपके बैंक खातों, क्रेडिट कार्ड के बड़े बिलों, म्यूचुअल फंड निवेश और रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड का आपके आईटीआर से मिलान करता है। जैसे ही आंकड़ों में जरा-सा भी अंतर दिखाई देता है, सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
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रिटर्न भरते समय किन 5 बातों का रखें सबसे ज्यादा ध्यान?

  • अगर आपकी आय केवल वेतन, एक मकान और बैंक ब्याज तक सीमित है तथा कुल आय 50 लाख रुपये तक है, तो ITR-1 (सहज) भरें।
  • अगर आपने शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या कोई संपत्ति बेची है, तो ITR-2 चुनें।
  • छोटे व्यापारियों और फ्रीलांसरों के लिए धारा 44AD और 44ADA के तहत ITR-4 (सुगम) निर्धारित है।
  • यदि आपका कारोबार बड़ा है और आप बैलेंस शीट तैयार करते हैं, तो ITR-3 भरें।
  • गलत फॉर्म चुनने पर धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस आ सकता है।


क्या AIS और Form 26AS का मिलान करना जरूरी है?
रिटर्न भरने से पहले आयकर पोर्टल से अपना Annual Information Statement (AIS) डाउनलोड करें। आईटीआर में दर्ज आय और एआईएस के आंकड़ों का मिलान करें। यदि एआईएस में कोई गलत प्रविष्टि दिखाई देती है, तो पोर्टल पर फीडबैक देकर उसे तुरंत सही कराएं।

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कौन-सी 4 गलतियां सीधे स्क्रूटनी तक पहुंचा सकती हैं?
जाली एचआरए या किसी अनजान ट्रस्ट की 80G रसीदें न लगाएं। एआई अब ऐसे फर्जी पैटर्न तुरंत पकड़ लेता है।
फ्रीलांसिंग या दूसरी कमाई का टीडीएस फॉर्म 26AS में दिखाई देता है। इसे छिपाना संभव नहीं है।
बचत खाते और एफडी से मिला ब्याज Income from Other Sources में जरूर दर्ज करें।
शेयर बाजार या व्यवसाय में हुए घाटे को Carry Forward करना आपका कानूनी अधिकार है। इसे आईटीआर में अवश्य दर्ज करें।
नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में सही विकल्प कैसे चुनें?

नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट विकल्प है। यदि आप होम लोन के ब्याज, पीपीएफ, एचआरए या अन्य कटौतियों का लाभ लेने के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनना चाहते हैं, तो रिटर्न भरते समय सही विकल्प का चयन अवश्य करें।

क्या ई-वेरीफिकेशन करना भी अनिवार्य है?
रिटर्न जमा करने के 30 दिनों के भीतर उसे आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के माध्यम से ई-वेरीफाई करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर आपका रिटर्न अमान्य माना जा सकता है और 5,000 रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है।


इनकम टैक्स नोटिस और उनका क्या मतलब होता है?

धारा कब जारी होती है? मुख्य उद्देश्य
143(1) – इंटिमेशन नोटिस आईटीआर की शुरुआती प्रोसेसिंग के बाद यह बताता है कि रिटर्न स्वीकार हुआ है, रिफंड मिलेगा या टैक्स बकाया है।
142 – असेसमेंट पूछताछ नोटिस रिटर्न न भरने या जानकारी छिपाने के संदेह पर 142(1): जानकारी मांगना, 142(2): खाते व दस्तावेजों की जांच, 142(3): अघोषित आय पर स्पष्टीकरण।
143(2) – स्क्रूटनी नोटिस रिटर्न में बड़ी गड़बड़ी की आशंका होने पर रिटर्न की विस्तृत जांच के लिए जारी किया जाता है।
148 – आय छूट जाने का नोटिस आय छिपाने या असेसमेंट में छूट जाने पर दोबारा आय का आकलन करने के लिए।
156 – डिमांड नोटिस टैक्स, ब्याज या पेनल्टी बकाया होने पर विभाग द्वारा तय राशि का समय पर भुगतान कराने के लिए।



क्यों जरूरी है सावधानी, ईमानदारी और पारदर्शिता?
आयकर रिटर्न दाखिल करना कोई डर का विषय नहीं है। यह आपकी वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता का प्रतिबिंब है। 31 जुलाई की आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते सभी जरूरी दस्तावेज जुटाएं, हर आय का सही विवरण दें और पूरी सावधानी के साथ आईटीआर भरें। ऐसा करने पर आयकर विभाग के नोटिस की संभावना काफी कम हो जाती है।

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अगर नोटिस आ जाए तो क्या करें?

  • नोटिस को शांत दिमाग से पढ़ें और समझें कि विभाग ने किस बिंदु या लेन-देन पर सवाल उठाया है।
  • किसी भी फर्जी ईमेल या कॉल पर भरोसा न करें। आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके नोटिस की सत्यता जांचें।
  • पोर्टल पर Pending Action > e-Proceedings में जाकर नोटिस की प्रति डाउनलोड करें।
  • पूछे गए सभी सवालों का बिंदुवार जवाब दें और बैंक स्टेटमेंट, बिल या रसीद जैसे जरूरी दस्तावेज संलग्न करें।
  • जवाब पोर्टल पर अपलोड करें, प्राप्त रसीद सुरक्षित रखें और समय-समय पर पोर्टल पर उसका स्टेटस देखते रहें।
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