फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Aircraft seats shrunk four inches 40 years fares risen passenger comfort declined long flights uncomfortable

40 साल में विमान की सीटें 4 इंच और छोटी: किराया बढ़ा लेकिन यात्रियों का आराम घटा; लंबी उड़ानों में परेशानी

Sun, 26 Jul 2026 05:26 AM IST
प्रशांत तिवारी एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 26 Jul 2026 05:26 AM IST
सार

पिछले 40 वर्षों में विमान कंपनियों ने अधिक यात्रियों को समायोजित करने के लिए इकोनॉमी क्लास की सीटों के बीच की दूरी और चौड़ाई कम कर दी है। दूसरी ओर, लोगों का औसत शारीरिक आकार बढ़ने से लंबी उड़ानों में यात्रियों को पहले से अधिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आरामदायक सीटों के लिए अब अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, जबकि भविष्य में खड़े होकर यात्रा कराने वाली सीटों की भी तैयारी की जा रही है।  

विज्ञापन
Aircraft seats shrunk four inches 40 years fares risen passenger comfort declined long flights uncomfortable
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

पिछले चार-पांच दशकों में विमान यात्रा का स्वरूप काफी बदल गया है। यात्रियों की संख्या बढ़ने और लागत कम रखने की कोशिश में विमान कंपनियों ने इकोनॉमी श्रेणी की सीटों के बीच की दूरी और चौड़ाई लगातार घटाई है। वहीं, इसी अवधि में लोगों की औसत शारीरिक चौड़ाई (मोटापा) बढ़ी है, जिससे लंबी यात्राओं में असुविधा बढ़ने लगी है।

विज्ञापन


40 साल में सीटों का आकार कितना बदल गया?
विमानन उद्योग की कई रिपोर्टों और विमान कंपनियों के सीट विन्यास के विश्लेषण के अनुसार, 1980-90 के दशक में इकोनॉमी श्रेणी में दो सीटों के बीच की दूरी (सीट पिच) 34 से 35 इंच होती थी। अब अधिकांश विमान कंपनियों में यह घटकर 30 से 31 इंच रह गई है। भारत की कम लागत वाली विमान सेवाओं में यह दूरी 28 से 29 इंच तक है। यानी यात्रियों के पैरों के लिए उपलब्ध जगह औसतन 4 से 7 इंच कम हो गई है। सीटों की चौड़ाई भी पहले की तुलना में कम हुई है। पहले यह करीब 18.5 से 19 इंच होती थी, जबकि अब कई विमानों में यह 16.5 से 17.5 इंच के बीच रह गई है। दूसरी ओर, वैज्ञानिक पत्रिका अप्लाइड एर्गोनॉमिक्स और एसएई इंटरनेशनल के अध्ययन के अनुसार, पिछले चार दशकों में बैठने के दौरान लोगों की औसत शारीरिक चौड़ाई लगभग 8 से 13 प्रतिशत बढ़ी है।
विज्ञापन


आराम से बैठने के लिए अब कितना अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है?
आज अधिकांश विमान कंपनियां अधिक लेगरूम (पैर रखने की जगह) वाली सीटों के लिए अतिरिक्त शुल्क लेती हैं। भारत में घरेलू उड़ानों में ऐसी पसंदीदा सीट के लिए 500 से 2,000 रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं। वहीं, कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में मार्ग और मांग के अनुसार 3,000 से 10,000 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या भविष्य में खड़े होकर भी विमान यात्रा करनी पड़ सकती है?
इटली की कंपनी एवियोइंटीरियर्स ने 'स्काईराइडर 2.0' नाम की ऐसी सीट विकसित की है, जिसमें यात्री पूरी तरह बैठने के बजाय टिककर यात्रा करता है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था से विमान में लगभग 20 प्रतिशत अधिक यात्रियों को जगह दी जा सकती है।


एयर सुविधा 2.0 के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को आधिकारिक एयर सुविधा 2.0 प्लेटफॉर्म का रूप धारण करने वाली फर्जी वेबसाइटों से सावधान किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एयर सुविधा 2.0 की सभी सेवाएं पूरी तरह निशुल्क हैं और सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। यात्रियों को भुगतान के लिए रीडायरेक्ट करने वाली वेबसाइटों से बचने और केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।

सीटों के आकार में कितना बदलाव आया?

मानक 1980-90 वर्तमान
सीट पिच 34-35 इंच 30-31 इंच (कुछ विमानों में 28-29 इंच)
सीट चौड़ाई 18.5-19 इंच 16.5-17.5 इंच


ये भी पढ़ें: Biz Updates: जंक फूड पर हेल्थ टैक्स का प्रस्ताव, ICMR और NIN ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट

सीटों का गैप घटने से विमानों में कितनी सीटें बढ़ीं?

 
विमान 1980-90 वर्तमान
बोइंग 737 120-130 सीटें 180-190 सीटें
एयरबस A320 लगभग 150 सीटें 180-186 सीटें
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed