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Biz Updates: सेबी ने 15 लोगों पर लगाया 3 साल का शेयर बाजार प्रतिबंध; पीएफसी देगी चार रुपये का अंतरिम लाभांश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 06 Feb 2026 04:51 AM IST
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बिजनेस अपडेट
- फोटो : अमर उजाला
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सेबी ने गुरुवार को 15 लोगों पर तीन साल का शेयर बाजार प्रतिबंध लगा दिया और टेलीग्राम चैनलों पर भ्रामक शेयर अनुशंसाओं के माध्यम से यूनिसन मेटल्स के शेयरों में हेरफेर करने के लिए कुल 3.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
इसके अलावा, नियामक ने 10 लोगों को 3.87 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लाभ वापस करने का निर्देश दिया। यह राशि 45 दिनों के भीतर सेबी के निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा करना होगा। सेबी ने विभिन्न नियामक मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए 15 व्यक्तियों पर 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया। सेबी ने अपने 98 पन्नों के आदेश में पाया कि ययाति हसमुखराय नाडा, निराली नाडा, जसवंतभाई पटेल, जिग्नेश प्रवीणभाई पेठानी, नहुष अश्विनभाई शुक्ला, प्रजेश ए शुक्ला, रीताबेन अश्विनकुमार शुक्ला और हार्दिक जे पटेल आपस में जुड़े हुए हैं। एजेंसी
नोटिस पाने वाले नंबर 1 (यायाती) नोटिस पाने वाले नंबर 2, 6, 7 और 9 (निराली, नहुष, प्रजेश और रीताबेन) की ओर से निवेश संबंधी निर्णय ले रहे थे और नोटिस पाने वाले नंबर 4 (जिग्नेश) को उनके लेन-देन के बारे में सलाह भी दे रहे थे।
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इसके अलावा, नियामक ने 10 लोगों को 3.87 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लाभ वापस करने का निर्देश दिया। यह राशि 45 दिनों के भीतर सेबी के निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा करना होगा। सेबी ने विभिन्न नियामक मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए 15 व्यक्तियों पर 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया। सेबी ने अपने 98 पन्नों के आदेश में पाया कि ययाति हसमुखराय नाडा, निराली नाडा, जसवंतभाई पटेल, जिग्नेश प्रवीणभाई पेठानी, नहुष अश्विनभाई शुक्ला, प्रजेश ए शुक्ला, रीताबेन अश्विनकुमार शुक्ला और हार्दिक जे पटेल आपस में जुड़े हुए हैं। एजेंसी
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नोटिस पाने वाले नंबर 1 (यायाती) नोटिस पाने वाले नंबर 2, 6, 7 और 9 (निराली, नहुष, प्रजेश और रीताबेन) की ओर से निवेश संबंधी निर्णय ले रहे थे और नोटिस पाने वाले नंबर 4 (जिग्नेश) को उनके लेन-देन के बारे में सलाह भी दे रहे थे।
डीमैट फॉर्म में रखे गए यूनिट्स के लिए सुविधा का होगा विस्तार
बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड के डीमैट फॉर्म में रखे गए यूनिट्स के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के लिए स्थायी निर्देश की सुविधा का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है। इससे कारोबार में आसानी होगी। अभी ऐसे स्थायी निर्देश केवल स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (एसओए) मोड में रखे गए यूनिट्स के लिए उपलब्ध हैं। इससे डीमैट निवेशकों को प्रत्येक लेनदेन के लिए अलग-अलग निर्देश देने होते हैं। चर्चा पत्र में सेबी ने सुझाव दिया है कि इस सुविधा के विस्तार को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है। पहले चरण में निवेशक डिपॉजिटरी या स्टॉक एक्सचेंज सदस्यों के माध्यम से यूनिट-आधारित एसडब्ल्यूपी व एसटीपी मैंडेट पंजीकृत कर सकेंगे। इनका निष्पादन स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। दूसरे चरण में एसडब्ल्यूपी और एसटीपी निर्देशों को आरटीए के माध्यम से पूरा करने की अनुमति दी जाएगी। इससे राशि आधारित और अन्य प्रकार के एसटीपी जैसे मूल्यवृद्धि आधारित और स्विंग एसटीपी संभव हो सकेंगे। सेबी ने 26 फरवरी तक प्रस्तावों पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इस सुविधा का विस्तार निवेशकों और बाजार मध्यस्थों के लिए परिचालन को आसान बनाएगा और कारोबार करने में आसानी को बढ़ाएगा।
बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड के डीमैट फॉर्म में रखे गए यूनिट्स के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के लिए स्थायी निर्देश की सुविधा का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है। इससे कारोबार में आसानी होगी। अभी ऐसे स्थायी निर्देश केवल स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (एसओए) मोड में रखे गए यूनिट्स के लिए उपलब्ध हैं। इससे डीमैट निवेशकों को प्रत्येक लेनदेन के लिए अलग-अलग निर्देश देने होते हैं। चर्चा पत्र में सेबी ने सुझाव दिया है कि इस सुविधा के विस्तार को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है। पहले चरण में निवेशक डिपॉजिटरी या स्टॉक एक्सचेंज सदस्यों के माध्यम से यूनिट-आधारित एसडब्ल्यूपी व एसटीपी मैंडेट पंजीकृत कर सकेंगे। इनका निष्पादन स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। दूसरे चरण में एसडब्ल्यूपी और एसटीपी निर्देशों को आरटीए के माध्यम से पूरा करने की अनुमति दी जाएगी। इससे राशि आधारित और अन्य प्रकार के एसटीपी जैसे मूल्यवृद्धि आधारित और स्विंग एसटीपी संभव हो सकेंगे। सेबी ने 26 फरवरी तक प्रस्तावों पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इस सुविधा का विस्तार निवेशकों और बाजार मध्यस्थों के लिए परिचालन को आसान बनाएगा और कारोबार करने में आसानी को बढ़ाएगा।
छतरियों पर न्यूनतम 100 रुपये लगेगा आयात शुल्क
सरकार ने छतरियों पर न्यूनतम आयात शुल्क 100 रुपये प्रति पीस निर्धारित किया है। इससे घरेलू स्तर पर छतरियों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। डीजीएफटी ने कहा, तैयार छतरियों की आयात नीति और शर्तें मुक्त से प्रतिबंधित कर दी गई हैं। अगर लागत, बीमा, भाड़ा मूल्य 100 रुपये प्रति पीस या उससे अधिक है, तो आयात मुक्त रहेगा। हालांकि, ये प्रतिबंध अग्रिम प्राधिकरण प्राप्त आयातकों, निर्यात उन्मुख इकाइयों और एसईजेड पर लागू नहीं होंगे।
सरकार ने छतरियों पर न्यूनतम आयात शुल्क 100 रुपये प्रति पीस निर्धारित किया है। इससे घरेलू स्तर पर छतरियों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। डीजीएफटी ने कहा, तैयार छतरियों की आयात नीति और शर्तें मुक्त से प्रतिबंधित कर दी गई हैं। अगर लागत, बीमा, भाड़ा मूल्य 100 रुपये प्रति पीस या उससे अधिक है, तो आयात मुक्त रहेगा। हालांकि, ये प्रतिबंध अग्रिम प्राधिकरण प्राप्त आयातकों, निर्यात उन्मुख इकाइयों और एसईजेड पर लागू नहीं होंगे।
टाटा मोटर्स पीवी को 3,483 करोड़ का घाटा
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स को तीसरी तिमाही में 3,483 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। जगुआर लैंड रोवर में हुई साइबर घटना से कंपनी के घाटे में बढ़त आई है। परिचालन से राजस्व 70,108 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कहा, एक साल पहले की समान अवधि में यह 94,472 करोड़ रुपये था। खर्च भी बढ़कर 74,880 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 89,698 करोड़ रुपये था।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स को तीसरी तिमाही में 3,483 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। जगुआर लैंड रोवर में हुई साइबर घटना से कंपनी के घाटे में बढ़त आई है। परिचालन से राजस्व 70,108 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कहा, एक साल पहले की समान अवधि में यह 94,472 करोड़ रुपये था। खर्च भी बढ़कर 74,880 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 89,698 करोड़ रुपये था।
पीएफसी देगी चार रुपये का अंतरिम लाभांश
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन को दिसंबर तिमाही में 8,211.90 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में यह 6 फीसदी अधिक है। आय तीसरी तिमाही में 9 प्रतिशत बढ़कर 29,140 करोड़ रही। अप्रैल-दिसंबर में शुद्ध लाभ 13 फीसदी बढ़कर 22,157 करोड़ रुपये रहा। लोन बुक बढ़कर 11.51 लाख करोड़ रहा। कंपनी चार रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश देगी।
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन को दिसंबर तिमाही में 8,211.90 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में यह 6 फीसदी अधिक है। आय तीसरी तिमाही में 9 प्रतिशत बढ़कर 29,140 करोड़ रही। अप्रैल-दिसंबर में शुद्ध लाभ 13 फीसदी बढ़कर 22,157 करोड़ रुपये रहा। लोन बुक बढ़कर 11.51 लाख करोड़ रहा। कंपनी चार रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश देगी।
एयरटेल के मुनाफे में 55 फीसदी की गिरावट
भारती एयरटेल को दिसंबर तिमाही में 6,630.5 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में यह 55 फीसदी कम है। कंपनी ने कहा, राजस्व 19.6 प्रतिशत बढ़कर 53,982 करोड़ रुपये रहा। भारत में राजस्व सालाना आधार पर 13.2 प्रतिशत बढ़कर 39,226 करोड़ रुपये हो गया। तिमाही के दौरान हर ग्राहक से कमाई 5.7 फीसदी बढ़कर 259 रुपये पर पहुंच गई है।
भारती एयरटेल को दिसंबर तिमाही में 6,630.5 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में यह 55 फीसदी कम है। कंपनी ने कहा, राजस्व 19.6 प्रतिशत बढ़कर 53,982 करोड़ रुपये रहा। भारत में राजस्व सालाना आधार पर 13.2 प्रतिशत बढ़कर 39,226 करोड़ रुपये हो गया। तिमाही के दौरान हर ग्राहक से कमाई 5.7 फीसदी बढ़कर 259 रुपये पर पहुंच गई है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज का मुनाफा 23 फीसदी बढ़ा
रियल एस्टेट कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज को तीसरी तिमाही में 193.87 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 23 फीसदी अधिक है। आय घटकर 1,033.84 करोड़ रह गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 1,239.97 करोड़ रुपये थी। कार्यकारी अध्यक्ष पिरोजशा गोदरेज ने कहा, बुकिंग व आय के मामले में मजबूत वृद्धि हुई है।
रियल एस्टेट कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज को तीसरी तिमाही में 193.87 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 23 फीसदी अधिक है। आय घटकर 1,033.84 करोड़ रह गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 1,239.97 करोड़ रुपये थी। कार्यकारी अध्यक्ष पिरोजशा गोदरेज ने कहा, बुकिंग व आय के मामले में मजबूत वृद्धि हुई है।
ई-वे बिल ढांचे में सुधार के लिए राज्यों से बातचीत कर रहा केंद्र
केंद्र सरकार ई-वे बिल ढांचे में सुधार के लिए राज्यों के साथ बातचीत कर रही है। इस पर जीएसटी परिषद की अगली बैठक में चर्चा होने की संभावना है। 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया, जीएसटी सुधारों की लहर ई-वे बिल प्रणाली को केवल प्रवर्तन और नियंत्रण के रूप में नहीं, बल्कि सुगम माल ढुलाई के एक साधन के रूप में पुनर्परिभाषित करने पर केंद्रित हो सकती है। ई-वे बिल सुधारों से माल ढुलाई व्यवस्था में उदारीकरण होगा। इससे व्यापार के लिए लागत और देरी कम होगी। साथ ही टैक्स गवर्नेंस के लिए प्रभावी व गैर-हस्तक्षेपकारी निगरानी बनी रहेगी। सूत्रों ने कहा, हम ई-वे बिल सुधार पर राज्यों के साथ काम कर रहे हैं और इसे जीएसटी परिषद के समक्ष रखेंगे। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में और राज्य मंत्रियों से मिलकर बनी जीएसटी परिषद की बैठक 3 सितंबर को हुई थी। इसमें 375 वस्तुओं पर कर दरों में कटौती और स्लैब को घटाने का निर्णय लिया गया था। ई-वे बिल प्रस्ताव परिषद के समक्ष रखा जाएगा। आर्थिक समीक्षा में ई-सील व इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम के उपयोग का सुझाव है, जिन्हें ई-वे बिल व वाहन-ट्रैकिंग तकनीकों के साथ जोड़ना जाना चाहिए। इससे सड़क पर बार-बार रोके बिना माल की संपूर्ण ट्रैकिंग हो सकेगी।
केंद्र सरकार ई-वे बिल ढांचे में सुधार के लिए राज्यों के साथ बातचीत कर रही है। इस पर जीएसटी परिषद की अगली बैठक में चर्चा होने की संभावना है। 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया, जीएसटी सुधारों की लहर ई-वे बिल प्रणाली को केवल प्रवर्तन और नियंत्रण के रूप में नहीं, बल्कि सुगम माल ढुलाई के एक साधन के रूप में पुनर्परिभाषित करने पर केंद्रित हो सकती है। ई-वे बिल सुधारों से माल ढुलाई व्यवस्था में उदारीकरण होगा। इससे व्यापार के लिए लागत और देरी कम होगी। साथ ही टैक्स गवर्नेंस के लिए प्रभावी व गैर-हस्तक्षेपकारी निगरानी बनी रहेगी। सूत्रों ने कहा, हम ई-वे बिल सुधार पर राज्यों के साथ काम कर रहे हैं और इसे जीएसटी परिषद के समक्ष रखेंगे। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में और राज्य मंत्रियों से मिलकर बनी जीएसटी परिषद की बैठक 3 सितंबर को हुई थी। इसमें 375 वस्तुओं पर कर दरों में कटौती और स्लैब को घटाने का निर्णय लिया गया था। ई-वे बिल प्रस्ताव परिषद के समक्ष रखा जाएगा। आर्थिक समीक्षा में ई-सील व इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम के उपयोग का सुझाव है, जिन्हें ई-वे बिल व वाहन-ट्रैकिंग तकनीकों के साथ जोड़ना जाना चाहिए। इससे सड़क पर बार-बार रोके बिना माल की संपूर्ण ट्रैकिंग हो सकेगी।
