व्यापार समझौता: अमेरिका में 800 डॉलर तक बिना शुल्क सुविधा खत्म, टैरिफ एक्ट से छोटे निर्यातक मुश्किल में कैसे?
अमेरिका में अब 800 डॉलर तक की खेपों पर बिना शुल्क सुविधा खत्म हो गई है। छोटे कारीगर और हस्तशिल्प उद्यम शुल्क और लंबी कस्टम प्रक्रिया से जूझ रहे हैं। इससे ऑनलाइन निर्यात और रोजगार पर असर पड़ा है। कारोबारी चाहते हैं कि भारत सरकार अमेरिका से बातचीत कर यह छूट बहाल कराए।
विस्तार
अमेरिका में 800 डॉलर तक बिना शुल्क माल भेजने की सुविधा खत्म होने से छोटे निर्यातक मुश्किल में है। अब शुल्क लगने के साथ ही छोटे-छोटे पार्सल को कस्टम प्रक्रिया के तहत बाहर आने में काफी वक्त लगने लगा है। कारोबारी और निर्यातक चाहते हैं कि भारत सरकार इस मुद्दे पर भी अमेरिका से बात करे। असल में पहले 800 डॉलर मूल्य तक की अमेरिका भेजी जाने वाली खेपों पर कोई शुल्क नहीं लगता था। लेकिन जब पिछले साल टैरिफ वार शुरू हुआ तो चरणबद्ध तरीके से भारतीय सामान पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया।
इसके साथ ही, गत वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 321 के तहत अमेरिका ने यह सुविधा खत्म कर दी है। इस सुविधा से छोटे निर्यातकों, कारीगरों और सीमा पार ई-कॉमर्स से जुड़े उद्यमों को काफी मदद मिलती थी। इस छूट के समाप्त होने से कई चुनौतियां बढ़ी हैं।
अमेरिकी बाजार और छोटे उद्यम
हस्तशिल्प और श्रम आधारित उत्पाद बनाने वाले छोटे उद्यम अब अधिक लागत के कारण अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। पहले मिलने वाली यह सीमा ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी सुगम बनाती थी। अमेरिकी ग्राहकों तक सीधे भारतीय उत्पाद पहुंचाना था और अतिरिक्त शुल्क या जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती थी।
इससे कई भारतीय डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांडों को वैश्विक पहचान मिली। शुल्क बढ़ने से ऑर्डरों में आई कमी का सीधा असर रोजगार और आय पर पड़ रहा है। अब निर्यातक चाहते हैं कि भारत सरकार अमेरिका से बातचीत कर 800 डॉलर मूल्य तक की बिना शुल्क भेजी जाने वाली खेपों पर मिलने वाली छूट बहाल कराए।
कस्टम में माल बाहर आने में लग रहा ज्यादा समय
राजगढि़या एक्सपोर्ट के संस्थापक सुदीप का कहना है, ड्यूटी फ्री माल अमेरिका भेजने की सुविधा खत्म होने के नुकसान तो हो ही रहा है। साथ में, कस्टम में माल बाहर आने में बहुत वक्त लगने लगा है। सुविधा बंद होने से देशभर के लाखों छोटे उद्यमी मुश्किल हालात में हैं।
रोजगार और श्रमिकों की आय पर संकट
लोक नीति विशेषज्ञ एवं एसोचैम यूपी के को-चेयरमैन हसन याकूब का कहना है कि ऐसे छोटे निर्यातक उद्यम बड़ी संख्या में कारीगरों और कौशल आधारित श्रमिकों को रोजगार देते हैं। शुल्क बढ़ने से ऑर्डरों में आई कमी का सीधा असर रोजगार और आय पर पड़ता है। धारा 321 के अंतर्गत मिलने वाली यह सुविधा कस्टम प्रक्रिया को भी तेज और सरल बनाती थी, जिससे निर्यातक पूरी तरह अनुपालन के साथ व्यापार कर सकते थे। इस सुविधा के अभाव में भारतीय निर्यातक उन देशों की तुलना में पिछड़ जाते हैं, जिन्हें अब भी ऐसी छूट उपलब्ध है।
भारत सरकार कम मूल्य वाले भारतीय शिपमेंटों को बिना शुल्क प्रवेश देने के लिए स्थिर नीति सुनिश्चित करने का आग्रह करे। यह कदम छोटे उद्यमों, कारीगरों, निर्यातकों और तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स निर्यात तंत्र को सशक्त करेगा । मेक इन इंडिया, लोकल के लिए वोकल और वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भागीदारी को और मजबूती देगा।
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