Biz Updates: महाराष्ट्र में अमेजन डाटा सेंटर का विरोध, कंपनी बोली- नहीं लेंगे स्थानीय पानी-बिजली
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महाराष्ट्र के ठाणे शहर के बालकुम इलाके में अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के प्रस्तावित डाटा सेंटर के खिलाफ शनिवार को सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह सेंटर 53 एकड़ में बनेगा। आंदोलनकारियों का दावा है कि यह सेंटर रोजाना 1.2 करोड़ लीटर पानी और असीमित बिजली खर्च करेगा। साथ ही, इसके 24 घंटे चलने वाले भारी-भरकम कूलिंग सिस्टम से भयंकर ध्वनि प्रदूषण होगा, जिससे एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले पांच स्कूलों, तीन अस्पतालों और बड़ी रिहायशी सोसायटियों के हजारों लोगों की सेहत दांव पर लग जाएगी। तनाव बढ़ता देख अमेजन ने मोर्चा संभाला। कंपनी ने साफ किया कि यह अत्याधुनिक फैसिलिटी स्थानीय ग्रिड से बिजली नहीं लेगी, बल्कि इसके लिए खुद का हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन बनाया जा रहा है। पानी के मुद्दे पर अमेजन ने कहा कि वह भारत में वॉटर पॉजिटिव (जितना इस्तेमाल, उससे ज्यादा पानी समाज को लौटाना) हो चुकी है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इस सेंटर के कूलिंग सिस्टम में पीने वाले पानी की एक बूंद भी इस्तेमाल नहीं होगी।
स्थानीय सांसद पहले भी कर चुके हैं विरोध
इससे पहले, ठाणे के सांसद व शिवसेना नेता नरेश म्हस्के ने भी स्थानीय लोगों के विरोध और अंधाधुंध पेड़ कटाई का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इस परियोजना की मंजूरी की निष्पक्ष समीक्षा और जनसुनवाई कराने की मांग की है। बृहस्पतिवार को नागरिकों और कंपनी के बीच हुई बैठक भी बेनतीजा रह चुकी है।
सरकार ने इंडियन स्टैंडर्ड टाइम प्रसार नेटवर्क शुरू किया, क्या है व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी?
केंद्रीय मंत्री मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बंगलूरू में रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी में 'व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी' पर आधारित 'इंडियन स्टैंडर्ड टाइम' (भारतीय मानक समय) प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह डेमोंस्ट्रेशन नेटवर्क, प्रिसिजन टाइम प्रोटोकॉल (पीटीपी) पर आधारित 'व्हाइट रैबिट' टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यूटीसी (एनपीएलआई) से जुड़े भारतीय मानक समय को सुरक्षित रूप से फैलाने में मदद करता है। शनिवार को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया, यह बैंकिंग और वित्तीय बाजार, टेलीकॉम, बिजली सिस्टम, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल गवर्नेंस और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्रों के लिए बहुत सटीक, सुरक्षित और मजबूत टाइम सिंक्रोनाइजेशन (समय का तालमेल) सुविधा देता है।
इस नेटवर्क को उपभोक्ता मामले विभाग, सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मिलकर विकसित किया है। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारतीय मानक समय का सटीक और सुरक्षित प्रसार देश के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि समय का एक भरोसेमंद राष्ट्रीय स्रोत उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करेगा, निष्पक्ष व्यापार में मदद करेगा, साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाएगा, वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता बढ़ाएगा और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगा।