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IDFC Fraud: आईडीएफसी बैंक में 550 करोड़ रुपये के गबन मामले में सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, जानिए क्या अपडेट

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 09 Apr 2026 07:37 PM IST
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सार

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 550 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है। क्या है पूरा मामला समझने के लिए विस्तार से पूरी खबर पढ़ें।

CBI registers FIR in Rs 550 crore IDFC bank embezzlement case
आईडीएफसी बैंक - फोटो : फाइल
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विस्तार

चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से कथित तौर पर 550 करोड़ रुपये के गबन के मामले में सीबीआई ने एफआईआर दायर कर ली है। सीबीआई की ओर से मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की।

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हरियाणा सरकार ने जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी थी। उन्होंने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने बुधवार को यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को भेजा था। सीबीआई ने उस मामले को अपने हाथ में लेते हुए एफआईआर दर्ज की, जिसकी जांच पहले हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) कर रहा था।

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गलत तरीके से निजी खातों में सरकारी पैसे भेजने का है आरोप

हरियाणा के सतर्कता विभाग ने मामले को संबंधित एजेंसी को सौंपते हुए कहा, "यह मामला धोखाधड़ीपूर्ण बैंकिंग गतिविधियों और फर्जी लेनदेन से संबंधित है। इस धोखाधड़ी को कथित तौर पर सरकारी धन को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, कैप को फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और अन्य संबंधित फर्मों/व्यक्तियों सहित फर्जी संस्थाओं के खातों में स्थानांतरित करने के लिए व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया था। इस गड़बड़ी से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।"


सूत्रों ने बताया कि पुलिस और ईडी के आरोपों के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य के फंड को बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एसएफडी) के रूप में जमा किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर इसे अपने निजी काम के लिए इस्तेमाल कर लिया

फर्जी कंपनियों और छोटी आभूषण कंपनियों के खाते में भेजी गई नकदी

मामले की प्राथमिक जांच से पता चलता है कि विभिन्न फर्जी कंपनियों और छोटी आभूषण कंपनियों में भारी मात्रा में धनराशि ट्रांसफर की गई है और अंततः सोने की खरीद और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के बहाने उसे निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि इस धन के लेन-देन में बड़ी मात्रा में नकदी निकासी भी देखी गई है।

राज्य सरकार का यह मानना है कि एक व्यापक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच को एक विशेष केंद्रीय एजेंसी को सौंपना आवश्यक है। एसवी एंड एसीबी ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से दो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं और बाकी निजी व्यक्ति हैं जो एक साझेदारी फर्म के मालिक हैं।

चंडीगढ़ स्थित एक होटल व्यवसायी की भूमिका, जो त्रिशहर (चंडीगढ़-मोहाली-पंचकुला) में रियल एस्टेट परियोजनाओं के निर्माण में शामिल है, और एयू स्मॉल फाइनेंस की भूमिका। बैंक भी जांच के दायरे में है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा था कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज का 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जो कि 583 करोड़ रुपये बनता है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने एक नियामक फाइलिंग में कहा, "बैंक धोखाधड़ी के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और अपने बकाया की वसूली के लिए तत्पर है।"

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