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DGFT: भारत ने 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं निर्यात को दी मंजूरी, मजबूत स्टॉक और बंपर पैदावार ने आसान की राह
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kumar Vivek
Updated Tue, 28 Apr 2026 03:06 PM IST
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सार
भारत सरकार ने 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं निर्यात को मंजूरी दे दी है। मजबूत स्टॉक और बंपर पैदावार के बीच इस बड़े फैसले से जुड़ी पूरी खबर और कृषि क्षेत्र पर इसके प्रभाव की विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें।
गेहूं खरीद का मौका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने देश से 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं के निर्यात की अनुमति देने के सरकार के फैसले को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल को देश में गेहूं के पर्याप्त स्टॉक और आगामी रबी सीजन में एक और मजबूत पैदावार की संभावनाओं को देखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया था।
निर्यात का बढ़ता दायरा और कुल आंकड़े
इस नई खेप की मंजूरी मिलने के बाद, देश से अब तक कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को हरी झंडी मिल चुकी है। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले इसी साल जनवरी महीने में 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। इसके बाद, फरवरी में अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और 25 लाख टन गेहूं को निर्यात के लिए मंजूर किया गया था।
नीतिगत स्थिति और डीजीएफटी की अधिसूचना
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अपनी हालिया अधिसूचना में नीतिगत स्थिति को साफ करते हुए कहा है, "गेहूं की निर्यात नीति... प्रतिबंधित बनी हुई है। हालांकि, अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाती है"। महानिदेशालय ने यह भी साफ किया है कि इस निर्यात के लिए विस्तृत नियम और प्रक्रियाएं एक अलग आदेश के जरिए जल्द ही अधिसूचित की जाएंगी।
इसके अलावा, सरकार ने 13 मई, 2022 को जारी की गई अपनी पुरानी नीतिगत शर्त को भी बरकरार रखा है। इस शर्त के मुताबिक:
निर्यात नीतियों में इस ढील के पीछे कृषि क्षेत्र के उत्साहजनक आंकड़े एक बड़ा कारण हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार:
फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए देश का कुल गेहूं उत्पादन 120.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
उत्पादन में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बुवाई के रकबे में हुआ इजाफा है।
साल 2026 के रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 33.41 मिलियन हेक्टेयर हो गया है, जो कि एक साल पहले की समान अवधि में 32.80 मिलियन हेक्टेयर था।
आगे की राह
कुल मिलाकर, रबी सीजन में बढ़े हुए रकबे और 120.2 मिलियन टन उत्पादन के अनुमान ने घरेलू बाजार में अनाज की उपलब्धता को लेकर सरकार का भरोसा बढ़ाया है। एक तरफ जहां देश का अपना खाद्य भंडार सुरक्षित स्थिति में है, वहीं दूसरी तरफ इस अतिरिक्त निर्यात मंजूरी से वैश्विक बाजार में भी भारतीय गेहूं की उपस्थिति मजबूत होगी और जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका बनी रहेगी।
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निर्यात का बढ़ता दायरा और कुल आंकड़े
इस नई खेप की मंजूरी मिलने के बाद, देश से अब तक कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को हरी झंडी मिल चुकी है। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले इसी साल जनवरी महीने में 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। इसके बाद, फरवरी में अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और 25 लाख टन गेहूं को निर्यात के लिए मंजूर किया गया था।
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नीतिगत स्थिति और डीजीएफटी की अधिसूचना
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अपनी हालिया अधिसूचना में नीतिगत स्थिति को साफ करते हुए कहा है, "गेहूं की निर्यात नीति... प्रतिबंधित बनी हुई है। हालांकि, अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाती है"। महानिदेशालय ने यह भी साफ किया है कि इस निर्यात के लिए विस्तृत नियम और प्रक्रियाएं एक अलग आदेश के जरिए जल्द ही अधिसूचित की जाएंगी।
इसके अलावा, सरकार ने 13 मई, 2022 को जारी की गई अपनी पुरानी नीतिगत शर्त को भी बरकरार रखा है। इस शर्त के मुताबिक:
- भारत सरकार अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए गेहूं निर्यात की अनुमति दे सकती है।
- यह निर्यात संबंधित देशों की सरकारों के विशेष अनुरोध और भारत सरकार की मंजूरी के आधार पर किया जाएगा।
- सबसे अहम बात यह है कि खाद्य सुरक्षा के तहत किया जाने वाला यह निर्यात, वर्तमान में मंजूर किए गए 25 लाख मीट्रिक टन के कोटे से अलग होगा।
निर्यात नीतियों में इस ढील के पीछे कृषि क्षेत्र के उत्साहजनक आंकड़े एक बड़ा कारण हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार:
फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए देश का कुल गेहूं उत्पादन 120.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
उत्पादन में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बुवाई के रकबे में हुआ इजाफा है।
साल 2026 के रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 33.41 मिलियन हेक्टेयर हो गया है, जो कि एक साल पहले की समान अवधि में 32.80 मिलियन हेक्टेयर था।
आगे की राह
कुल मिलाकर, रबी सीजन में बढ़े हुए रकबे और 120.2 मिलियन टन उत्पादन के अनुमान ने घरेलू बाजार में अनाज की उपलब्धता को लेकर सरकार का भरोसा बढ़ाया है। एक तरफ जहां देश का अपना खाद्य भंडार सुरक्षित स्थिति में है, वहीं दूसरी तरफ इस अतिरिक्त निर्यात मंजूरी से वैश्विक बाजार में भी भारतीय गेहूं की उपस्थिति मजबूत होगी और जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका बनी रहेगी।

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