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AI Data Centre: 15 अरब डॉलर का गूगल एआई डेटा सेंटर, विशाखापत्तनम को ग्लोबल एआई हब बनाएगा भारत

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/विशाखापत्तनम Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 28 Apr 2026 05:25 PM IST
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सार

विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर के गूगल एआई डेटा सेंटर का शिलान्यास हुआ। अदाणी ग्रुप और एयरटेल की रणनीतिक साझेदारी से भारत का डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा, इस बड़े विकास की पूरी बिजनेस रिपोर्ट पढ़ें।

IT Minister Ashwini Vaishnaw, Jeet Adani, Rakesh Bharti Mittal pitch Visakhapatnam as key AI gateway
अश्विनी वैष्णव - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम (तारलुवाड़ा) में 15 अरब डॉलर के आगामी 'गूगल क्लाउड इंडिया एआई डेटा सेंटर' की आधारशिला रखी है। यह महात्वाकांक्षी परियोजना वैश्विक टेक दिग्गज गूगल, अदाणी ग्रुप और भारती एयरटेल की रणनीतिक साझेदारी में विकसित की जा रही है। इस निवेश से विशाखापत्तनम भारत का नया एआई आधारित डिजिटल गेटवे बनने जा रहा है।

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परियोजना का विशाल स्तर और रणनीतिक क्षमता
इस एआई डेटा सेंटर का पैमाना भारत के मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रमुख आंकड़े और साझेदारियां इस प्रकार हैं:

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  • गीगावाट-स्केल एआई इकोसिस्टम: अदाणी ग्रुप के निदेशक जीत अदाणी ने बताया कि वर्तमान में पूरे भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.3 गीगावाट है। इसके मुकाबले, अकेले विशाखापत्तनम के इस एक ही लोकेशन पर 1 गीगावाट क्षमता वाला बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है।
  • दिग्गजों का गठजोड़: इसे 'अदाणीकनेक्स' और भारती एयरटेल की डेटा सेंटर इकाई 'नेक्सट्रा' के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। 
  • हरित ऊर्जा पर जोर: एयरटेल के पास पहले से ही देश भर में 120 से अधिक डेटा सेंटर्स का नेटवर्क मौजूद है और विशाखापत्तनम का यह नया प्रोजेक्ट पूरी तरह से नवीकरणीय (ऊर्जा से संचालित होगा। जीत अदाणी ने स्पष्ट किया कि एआई के संचालन की लागत सीधे तौर पर ऊर्जा की लागत से जुड़ी है, इसलिए किफायती ऊर्जा इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने में मदद करेगी।

वैश्विक कनेक्टिविटी और हार्डवेयर निर्माण
शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत के डिजिटल ढांचे को मजबूत करने वाला कदम बताया और विशाखापत्तनम के एक 'एआई सिटी' में तब्दील होने का विश्वास जताया। 

  • सबमरीन केबल नेटवर्क: इस डेटा सेंटर के साथ विशाखापत्तनम से बिछाई जा रही अत्याधुनिक समुद्री केबल और मजबूत फाइबर नेटवर्क के कारण 'लेटेंसी' (डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय) कम होगी। इससे भारत का संपर्क यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के साथ और अधिक मजबूत हो जाएगा।
  • घरेलू विनिर्माण का आह्वान: भारत अब अपनी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक मांग का लगभग 50 प्रतिशत खुद पूरा कर रहा है और मोबाइल फोन के निर्यात में बड़ी छलांग लगा चुका है। इसे देखते हुए मंत्री वैष्णव ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और अन्य तकनीकी कंपनियों से भारत में ही सर्वर, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और एआई चिप्स का निर्माण करने का आग्रह किया है।

अर्थव्यवस्था और सेक्टोरल प्रभाव
इस निवेश का सीधा असर अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ने वाला है। 
 भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राकेश भारती मित्तल ने रेखांकित किया कि विशाखापत्तनम, जो ऐतिहासिक रूप से एक समुद्री प्रवेश द्वार रहा है, अब डिजिटल इंडिया के लिए 'इंटेलीजेंस एज' का गेटवे बनेगा। 

  • इस एआई डेटा सेंटर के जरिए देश की शिक्षा, स्वास्थ्य, वैमानिकी, लॉजिस्टिक और कृषि जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। 
  • एयरटेल के कार्यकारी उपाध्यक्ष गोपाल विट्टल के अनुसार, ग्रीन पावर और अल्ट्रा-लो लेटेंसी फाइबर नेटवर्क जैसी उनकी एकीकृत क्षमताएं इस विशाल एआई बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाएंगी।

आगे की राह
विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर का यह निवेश 'विकसित भारत' के लक्ष्य के साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की नीतियों की बदौलत विदेशी और घरेलू कॉरपोरेट कंपनियों का यह गठजोड़ भारत को वैश्विक एआई रेस में मजबूती से खड़ा कर रहा है। लोअर एनर्जी कॉस्ट के कारण जब कंप्यूटिंग और एआई मॉडल की ट्रेनिंग सस्ती होगी, तो इसके परिणामस्वरुप देश भर में नवाचार बढ़ेगा और तकनीक पर आधारित रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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