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Tata: साइरस मिस्त्री पर रतन टाटा का 'नो कमेंट' बहुत असरदार था, जीवनीकार थॉमस मैथ्यू ने किताब में किए ये दावे

Wed, 06 Nov 2024 03:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 06 Nov 2024 03:36 PM IST
सार

Ratan Tata Biography: रतन टाटा की जीवनी 'रतन टाटा ए लाइफ' में टाटा समूह के कुछ दिग्गजों के हवाले से कहा गया है कि उन्हें आशंका है कि मिस्त्री नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक के कारोबार वाले समूह को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। टाटा के जीवनीकार थॉमस मैथ्यू ने एक बातचीत में इस प्रकरण से जुड़े कई खुलासे किए हैं। आइए उनके बारे में जानें।

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Cyrus trying to break Tata Group? Tata's no comments more thunderous than statement: Biography Author
रतन टाटा - फोटो : amarujala.com

विस्तार

दिवंगत उद्योगपति की जीवनी के लेखक थॉमस मैथ्यू के अनुसार, जब रतन टाटा से पूछा गया कि क्या वे टाटा समूह के कुछ दिग्गजों की उन आशंकाओं से सहमत हैं, जिन्हें लगता है कि साइरस मिस्त्री समूह को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं?  जवाब में रतन टाटा का 'नो कमेंट' कुछ कहने से भी अधिक असरदार था। 

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मैथ्यू ने पीटीआई वीडियो को दिए साक्षात्कार में कहा कि टाटा ने 2012 में अपने उत्तराधिकारी के रूप में दिवंगत मिस्त्री का पूर्ण रूप समर्थन किया था, हालांकि बाद के वर्षों में मिस्त्री की उपयुक्तता पर पुनर्विचार किया गया था और 2016 में टाटा संस के चेयरमैन के पद से उनकी विदाई कंपनी के प्रदर्शन के साथ-साथ नैतिक मुद्दों से भी जुड़ा था।
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रतन टाटा की जीवनी 'रतन टाटा ए लाइफ' में टाटा समूह के कुछ दिग्गजों के हवाले से कहा गया है कि उन्हें आशंका है कि मिस्त्री नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक के कारोबार वाले समूह को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह आशंका मिस्त्री की चेयरमैन के रूप में कार्यशैली और शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह की ओर से टाटा संस में शेयरों के अधिग्रहण के पिछले रिकॉर्ड के आधार पर जताई है।
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इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर पूर्व नौकरशाह ने कहा, "इस बारे में दो विचारधाराएं हैं। टाटा के कुछ दिग्गजों का कहना है कि जिस तरह से एसपी समूह ने टाटा संस के शेयर हासिल किए, वह अच्छा संकेत नहीं था।"

टाटा के दिग्गजों के अनुसार, मैथ्यू ने कहा, "जिस तरह से उन्होंने (एसपी समूह ने) शेयर एकत्रित किए, उससे जेआरडी नाराज थे, इसे हल्के ढंग से कहें तो, और वह बहुत, बहुत असहज थे... उनके अनुसार एक गुप्त तरीके से, एसपी समूह ने पारिवारिक सदस्यों की कमजोरियों का फायदा उठाते हुए शेयर हासिल किए। यह मैं नहीं कह रहा। यह सब टाटा के दिग्गजों का कहना है।"

पुस्तक के अनुसार, एसपी समूह ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाकर लगभग 18 प्रतिशत कर ली थी और कंपनी के वे शेयर खरीद लिए थे, जो जेआरडी ने अपने भाई-बहनों को दे दिए थे।

मैथ्यू, का टाटा के साथ लंबा जुड़ाव 1995 में शुरू हुआ, उस समय वे तत्कालीन उद्योग मंत्री के सचिव थे, ने कहा, "अब दूसरा सहायक कथन यह है कि जब रतन टाटा टाटा संस के अध्यक्ष थे, तो टाटा संस के निदेशक टाटा की बड़ी कंपनियों के भी निदेशक थे। लगभग 15-20 निदेशक पद थे, जिनमें ये लोग टाटा ट्रस्ट, टाटा संस और टाटा कंपनियों के बीच की कड़ी थे।"

उन्होंने आगे कहा, "यह (टाटा संस के निदेशकों को अन्य टाटा कंपनियों में बोर्ड सदस्य के रूप में रखने की प्रथा) साइरस मिस्त्री के समय में काफी हद तक गायब रही। सिर्फ दो लोगों को छोड़कर, वे भी विशेष रूप से सबसे बड़ी (टाटा) कंपनियों (के बोर्ड) में थे। इसलिए उन्होंने कहा कि प्रमुख कंपनियों (बोर्ड) से टाटा के दिग्गजों को बाहर रखना अच्छा संकेत नहीं था।"

टाटा के दिग्गजों हुई बातचीत के आधार पर मैथ्यू ने कहा, "उनका कहना है कि (टाटा समूह को तोड़ने का) कोई जांच नहीं की गई, लेकिन यह मकसद हो सकता है।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या रतन टाटा भी टाटा के दिग्गजों की तरह ही चिंतित थे, तो उन्होंने कहा, "रतन टाटा बहुत ही मितभाषी व्यक्ति थे, वह बहुत ही दयालु व्यक्ति थे। उन्होंने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन मेरे लिए, उनकी ओर से टिप्पणी न करना किसी टिप्पणी से भी अधिक जोरदार बात है... मैंने कहा, 'सर, क्या आपको लगता है कि यह सच है? नो कमेंट्स (टाटा ने जवाब दिया)'। मुझे लगता है कि यह उनकी ओर से कोई बयान देने से भी अधिक महत्वपूर्ण बात है।"

हालांकि, मैथ्यू ने जोर देकर कहा कि 2016 में टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मिस्त्री को 'बदलने' का कारण "एक नैतिक मुद्दा था, और कंपनियों के प्रदर्शन का मामला दूसरा मुद्दा था।" मिस्त्री को 2011 में टाटा के उत्तराधिकारी के रूप में वैश्विक खोज के बाद चुना गया था। रतन टाटादिसंबर 2012 में टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। समूह के दिग्गजों की आरे से व्यक्त की गई आशंकाओं और आपत्तियों के बावजूद, रतन टाटा ने मिस्त्री का पूरा समर्थन किया था। टाटा के सेवानिवृत्त होने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने से पहले एक साल तक मिस्त्री 'नामित चेयरमैन' रहे।

चयन समिति की सिफारिश को मंजूरी देते हुए, टाटा ने मिस्त्री को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए दो टिप्पणियां कीं। वह चाहते थे कि मिस्त्री, जो उस समय शापूरजी पल्लोनजी समूह के एमडी थे, जिनके हित टाटा समूह के समान थे, जैसे निर्माण, रियल एस्टेट, कपड़ा, इंजीनियरिंग गुड्स और बिजली आदि क्षेत्रों में, वे उन कंपनियों से 'सभी संबंध तोड़ लें' और ऐसा अलगाव बनाएं जो 'कानूनी और तर्कसंगत' हो।

दूसरा यह था कि एक वर्ष तक मिस्त्री टाटा के साथ 'समानांतर कार्य' करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें टाटा समूह को चलाने के बारे में अंतर्दृष्टि और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। मैथ्यू ने कहा कि मिस्त्री ने टाटा संस का चेयरमैन बनने के बाद भी स्वयं को एसपी समूह से अलग नहीं किया, जिससे "रतन टाटा बेहद असहज थे और उन्होंने कई बार मिस्त्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया था।"

इसके अलावा, रतन टाटा, मिस्त्री के अधीन टाटा समूह के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे। वे समूह के शेयरधारकों के साथ संबंधों पर इसके प्रभाव, और टाटा संस को प्राप्त होने वाले सीमित लाभांश से चिंतित थे। उनका मानना था कि ऐसी स्थिति से परोपकारी गतिविधियों के लिए टाटा ट्रस्ट्स को उपलब्ध धनराशि पर असर पड़ रहा था।

उन्होंने कहा, "उन्होंने (रतन टाटा ने) कहा कि क्या हम गलती को सुधारने के लिए आगे आएं या स्थिति को अपने हाल पर ही रहने दें। उन्होंने कहा कि (मिस्त्री को) हटाना उनके लिए बहुत कष्टकारी निर्णय था।"

मैथ्यू ने मिस्त्री को हटाए जाने को याद करते हुए कहा, "वास्तव में रतन टाटा साइरस मिस्त्री के पास एक पत्र लेकर गए थे और कहा था कि आप इस पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कर देते और निजी कारणों से पद क्यों नहीं छोड़ देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बाकी सब इतिहास है। रतन टाटज्ञ इस तरह से उन्हें हटाना नहीं चाहते थे।"


अपने सौतेले भाई नोएल टाटा के साथ टाटा के रिश्ते और उनके उत्तराधिकारी के रूप में नोएल को क्यों नहीं चुना गया, इस पर मैथ्यू ने कहा, "रतन टाटा वास्तव में नोएल को बहुत पसंद करते थे, लेकिन जहां तक मैं समझता हूं, उन्हें वास्तव में लगता था कि उनके (नोएल) पास इस (टाटा) जैसे समूह को चलाने का अनुभव नहीं है, लेकिन वह जानते थे कि वह एक बहुत ही योग्य व्यक्ति हैं।"

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