डेलॉय रिपोर्ट: 2035 तक बदल जाएगा भारतीय सेमीकंडक्टर क्षेत्र का स्वरूप, बनेगा 300 अरब डॉलर का आत्मनिर्भर बाजार
डेलॉय की रिपोर्ट के अनुसार 2035 तक भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र 50 अरब डॉलर से बढ़कर 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। घरेलू उत्पादन 60% से अधिक मांग पूरी करेगा।
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भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र एक बड़े बदलाव के लिए तैयार है। खास बात है कि यह 2035 तक 50 अरब डॉलर के आयात-निर्भर बाजार से बढ़कर 300 अरब डॉलर का आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर तंत्र बन जाएगा। डेलॉय की ‘टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस-2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि एआई, मोटर वाहन क्षेत्र और डाटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। 2024-25 में भारत के सेमीकंडक्टर बाजार का आकार 45-50 अरब डॉलर था। पिछले तीन वर्षों में इसकी वार्षिक वृद्धि 20% रही है।
75-80 अरब डॉलर का आएगा निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल फोन, मोटर वाहन, कंप्यूटिंग और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्र 2035 तक देश की सेमीकंडक्टर मांग का 70 फीसदी से अधिक का हिस्सा बनेंगे। अब तक इस क्षेत्र में 10 स्वीकृत परियोजनाओं के जरिये 19 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया है। अगले पांच वर्षों में 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आने का अनुमान है। 2030 से 2035 के बीच 75-80 अरब डॉलर का और निवेश आएगा, जिससे पूरे तंत्र का विस्तार होगा।
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घरेलू उत्पादन से पूरी होगी 60 फीसदी मांग
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में भारत अपनी 90 फीसदी से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 फीसदी से अधिक मांग को पूरा कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में आगाह भी किया गया है कि प्रगति की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी।
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