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Economic Survey 2025-26: 'सस्ते कर्ज ने शेयर बाजार को बहुत महंगा कर दिया', सीईए ने क्या-क्या चिंता जाहिर की

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 29 Jan 2026 03:59 PM IST
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सार

आर्थिक सर्वेक्षण के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने शेयर बाजार को बहुत महंगा बताया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सस्ते कर्ज के कारण बनी है। उन्होंने जीडीपी ग्रोथ 6.8-7.2% रहने का अनुमान जताया और कुछ चेतावनी भी दी। आइए जानें 

Economic Survey 2025-26 V. Anantha Nageswaran Stock Market Valuation India GDP Forecast
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन। - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद में आर्थिक समीक्षा पेश किए जाने के बाद मीडिया से बात की। सीईए ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक उम्मीद करार दिया, लेकिन साथ ही बाजारों, एआई  और घरेलू नीतियों को लेकर स्पष्ट चिंता भी जाहिर की। नागेश्वरन का सबसे बड़ा बयान शेयर बाजार के मौजूदा वैल्युएशन को लेकर आया, जो निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है।

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यहां पढ़िए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पर बात करते हुए क्या-क्या चिंता जाहिर की।

1. बाजार पर चेतावनी: 'ईजी मनी' का साइड इफेक्ट 
सीईए अनंत नागेश्वरन ने स्टॉक मार्केट में चल रही तेजी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, "आसान नकदी के दौर का नतीजा यह हुआ है कि स्टॉक मार्केट बहुत महंगा हो गया है"। यह बयान ऐसे समय आया है जब खुदरा निवेशक बाजार में भारी निवेश कर रहे हैं। उनका इशारा स्पष्ट है कि लिक्विडिटी (तरलता) के दम पर चल रही रैली में वैल्युएशन जमीनी हकीकत से दूर हो सकते हैं।
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2. विकास दर: 7% की क्षमता, पर शर्तें लागू 
सीईए ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है।

• संभावित क्षमता: उन्होंने कहा कि भारत की संभावित जीडीपी वृद्धि दर 7% है।
शर्त: यदि मैन्युफैक्चरिंग और विकास से जुड़े सुधारों  को सही ढंग से लागू किया जाता है, तो यह आंकड़ा 7.5% से 8% तक पहुंच सकता है।

3. 'रणनीतिक स्वदेशी' की वकालत 
वैश्वीकरणके बदलते स्वरूप पर नागेश्वरन ने दो टूक कहा कि अब व्यापार पारस्परिक नहीं रहा और बाजार तटस्थ नहीं रहे।

• नया मंत्र: उन्होंने 'रणनीतिक स्वदेशी' को समय की मांग बताया। यह सिर्फ आयात कम करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती के लिए जरूरी है।
• सिस्टम में बदलाव: भारत को रणनीतिक रूप से अपरिहार्य बनाने के लिए औपनिवेशिक काल की नौकरशाही को बदलने और 'उद्यमी राज्य' की अवधारणा अपनाने की जरूरत है।

4. एआई का गुब्बारा फूटने का डर 
टेक्नोलॉजी सेक्टर, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सीईए ने एक गंभीर जोखिम की ओर इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एआई बूम उम्मीद के मुताबिक उत्पादकता बढ़ाने में विफल रहता है, तो संपत्ति के मूल्यांकन में भारी गिरावट आ सकती है। इससे वित्तीय बाजारों में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

5. कॉर्पोरेट इंडिया और हेल्थ
सीईए ने भारत में बढ़ते मोटापे को जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए खतरा बताया।

• फूड लेबलिंग: उन्होंने निजी क्षेत्र को सुझाव दिया कि पैकेज्ड फूड पर स्पष्ट लेबलिंग होनी चाहिए ताकि लोग यह जान सकें कि वे क्या खा रहे हैं।
• मार्केटिंग पर नकेल: सर्वे में यह भी सुझाव दिया गया है कि शिशु दूध और बेवरेजेज की मार्केटिंग पर प्रतिबंध लगाने या सख्त नियम बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।

6. रुपये और बाहरी चुनौतियों पर नजर 
नागेश्वरन ने कहा कि बाहरी मोर्चाफिलहाल कोई खतरे की घंटी नहीं बजा रहा है और भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मुद्रा की मजबूती देश की औद्योगिक क्षमता पर निर्भर करती है, न कि केवल वित्तीय प्रवाह पर। 

मुख्य आर्थिक सलाहकार साफ तौर पर कहा कि भारत के फंडामेंटल मजबूत हैं, लेकिन 'सस्ते पैसे' के नशे में बाजार की चाल और एआई के अति-उत्साह से बचने की जरूरत है। सरकार का फोकस अब केवल ग्रोथ पर नहीं, बल्कि 'रणनीतिक सुरक्षा' और 'गुणवत्तापूर्ण जीवन' (स्वस्थ नागरिक) पर शिफ्ट हो रहा है।

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