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कोल इंडिया का बड़ा फैसला: अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल सीधे खरीद सकेंगे भारत से कोयला; बिचौलियों का खेल खत्म

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 02 Jan 2026 03:18 PM IST
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सार

Coal India: अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल सीधे भारतीय कोयला खरीद सकेंगे। इस प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका अब खत्म हो गई है। विदेशी खरीदारों को 1 जनवरी 2026 से SWMA ई-नीलामी में भाग लेने की अनुमति देने का फैसला लिया गया है। पूरी रिपोर्ट यहा पढ़ें।

Entities in Bangladesh, Bhutan, Nepal can directly buy coal from CIL
Coal India Limited - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कोयला कंपनी, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने सीमा पार व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 जनवरी, 2026 से बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के कोयला उपभोक्ता अब भारतीय ट्रेडर्स की मदद लिए बिना सीधे ऑनलाइन कोयला नीलामी में भाग ले सकेंगे।

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सीआईएल के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू स्तर पर उपलब्ध सरप्लस (अतिरिक्त) कोयला संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, पारदर्शिता बढ़ाना और भारत की क्षेत्रीय बाजार में पकड़ मजबूत करना है। इससे पहले, इन पड़ोसी देशों के खरीदारों को भारतीय कोयला प्राप्त करने के लिए घरेलू कोयला व्यापारियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ये व्यापारी बिना किसी एंड-यूज प्रतिबंध के कोयला खरीदकर उसे सीमा पार बेचते थे। अब कोल इंडिया ने अपनी 'सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक' (एसडब्ल्यूएमए) नीलामी प्रणाली में बदलाव कर विदेशी संस्थाओं को भी इसमें शामिल होने की अनुमति दे दी है।
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एसडब्ल्यूएमए एक एकीकृत ई-नीलामी प्रणाली है जिसे 2022 में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य कोयला खरीद की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और बाजार-संचालित बनाना है। हाल ही में सीआईएल बोर्ड ने इस योजना के तंत्र में आवश्यक बदलावों को मंजूरी दी है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए रास्ता साफ हो गया है।

कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, विदेशी खरीदारों के लिए संशोधित ढांचे में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। विदेशी संस्थाओं को नीलामी में भाग लेने के लिए एक बार पंजीकरण कराना होगा। पूरी बोली प्रक्रिया डिजिटल होगी। भुगतान की प्रक्रिया विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नियमों के अनुसार होगी। नेपाल के खरीदार रुपये या डॉलर में भुगतान कर सकते हैं। बांग्लादेश और भूटान अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना होगा, इसका मूल्य भारतीय रुपये के आधार पर तय किया जाएगा। कोयले का निर्यात अधिसूचित लॉजिस्टिक्स चैनलों के जरिए किया जाएगा ताकि आपूर्ति शृंखला में कोई बाधा न आए।

कोल इंडिया का यह कदम न केवल कंपनी के लिए राजस्व के नए स्रोत खोलेगा, बल्कि भारत के 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति को भी मजबूती प्रदान करेगा। अधिकारी ने साफ किया कि यह विस्तार कोयले की घरेलू जरूरतों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही किया जा रहा है।

नीलामी में विदेशी खरीदारों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे कोयले की बेहतर कीमतें मिलने की उम्मीद है। सीआईएल ने इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले संभावित विदेशी उपभोक्ताओं के साथ व्यापक बातचीत की थी ताकि उनकी जरूरतों और तकनीकी आवश्यकताओं को समझा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे व्यापार की इस अनुमति से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और पड़ोसी देशों के उद्योगों को कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी। बिचौलियों के हटने से होने वाली पारदर्शिता विदेशी मुद्रा भंडार और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों के लिए भी सकारात्मक संकेत है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के थर्मल पावर प्लांट और ईंट भट्टे जैसे उद्योग इस नई व्यवस्था का कितनी तेजी से लाभ उठाते हैं।

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