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श्रम मंत्रालय का फैसला: जल्द लौटाई जाएगी 7.11 लाख निष्क्रिय पीएफ खातों में पड़ी राशि; बंद होंगे 31.86 लाख खाते

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 24 Feb 2026 04:48 AM IST
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सार

श्रम मंत्रालय ने 7.11 लाख निष्क्रिय पीएफ खातों में फंसी 30.52 करोड़ रुपये खाताधारकों या वारिसों को जल्द लौटाने का निर्णय लिया। 31.86 लाख निष्क्रिय खातों को बंद किया जाएगा।

EPF Refund: ₹30.52 Crore in 7.11 Lakh Inactive PF Accounts to Be Returned Soon
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 7.11 लाख निष्क्रिय खातों में फंसे 30.52 करोड़ रुपये जल्द संबंधित खाताधारकों या उनके कानूनी वारिसों को लौटाए जाएंगे। श्रम मंत्रालय का यह फैसला ऐसे 31.86 लाख खातों को बंद करने की पहल का हिस्सा है, जो मौजूदा समय में निष्क्रिय पड़े हैं। मंत्रालय के मुताबिक इनमें कुछ खाते 20 साल तक पुराने हैं, जिनमें तीन साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ।

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मंत्रालय ने बताया कि निष्क्रिय खातों को बंद करने के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अभी ऐसे सात लाख खातों को चुना गया है, जिनमें शून्य से 1,000 रुपये तक राशि जमा है और ये आधार से जुड़े हैं। लिहाजा, ईपीएफओ सीधे उनके खाते में यह पैसे ट्रांसफर कर देगा। इन खातों में 30.52 करोड़ रुपये जमा हैं। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर बाकी खातों में भी इसी तरह से पैसे लौटा दिए जाएंगे।
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निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए भविष्य निधि एक अनिवार्य सरकारी योजना है। इसमें प्रत्येक कर्मचारी मूल वेतन का 12 फीसदी हिस्सा डालता है, जबकि नियोक्ता की ओर से भी उतना ही योगदान दिया जाता है। लेकिन, जब खाते में तीन साल तक कोई लेनदेन नहीं होता तो यह निष्क्रिय खाते में तब्दील हो जाता है। श्रम मंत्रालय अब ऐसे खातों को अब बंद करने की ओर बढ़ रहा है।

कुल 10,903 करोड़ जमा
ईपीएफओ में करीब 31.86 लाख निष्क्रिय पीएफ खाते हैं, जिनमें कुल 10,903 करोड़ रुपये जमा हैं। सरकार के मुताबिक ईपीएफओ सदस्य अपना पैसा निकालने के लिए अब आसानी से क्लेम कर सकते हैं। लेकिन, यह भी देखने में आया है कि जिन खातों में पैसे कम हैं, वहां सदस्य आने-जाने के झंझट से बचने के लिए उन्हें ऐसे ही छोड़ देते हैं।

छोटी राशि बड़ी परेशानी
पीएफ की छोटी-छोटी धनराशि बड़ी परेशानी का सबब है, क्योंकि इस तरह से हजारों करोड़ रुपये निष्क्रिय खातों में पड़े हैं। लोग इन्हें निकालना नहीं चाहते और मंत्रालय के लिए पैसे की जवाबदेही बनी हुई है। इससे आधिकारिक दिशानिर्देश और तय समय पर काम करने की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

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