FATF ने चेताया: दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का गंभीर खतरा
एफएटीएफ ने साइबर फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के बढ़ते खतरे पर नई रिपोर्ट जारी की है। डिजिटल क्राइम से जुड़े डराने वाले आंकड़े और एफएटीएफ के सख्त दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तार से जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें।
विस्तार
हर दिन उम्मीद से भी अधिक तेजी से डिजिटल हो रही दुनिया में वित्तीय लेनदेन जितना आसान हुआ है, उतना ही साइबर ठगी का खतरा बढ़ा है। यह हालात केवल भारत जैसे देशों में नहीं है, पूरी दुनिया का यही हाल है। ग्लोबल वॉचडॉग फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने अपनी एक नई और अहम रिपोर्ट में दुनिया भर के देशों को कड़ी चेतावनी दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साइबर फ्रॉड अब केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन मनी लॉन्ड्रिंग यानी धनशोधन, टेरर फाइनेंसिंग यानी आतंकियों को धन मुहैया कराने और प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग यानी सामुहिक विनाश के हथियारों के लिए धन उपलब्ध कराने जैसे बेहद गंभीर अपराधों से जुड़ गया है।
दुनिया में कैसे बढ़ रहा साइबर अपराध का दायरा?
'साइबर-इनेबल्ड फ्रॉड- डिजिटलाइजेशन एंड मनी लॉन्ड्रिंग' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में साफ-साफ कहा है कि धोखाधड़ी आज के समय में मुनाफा कमाने के मकसद से किया जाने वाला सबसे व्यापक और नुकसानदेह अपराधों में से एक बन गया है। इसके जरिए दुनिया भर में लोगों का शोषण का भारी मात्रा में अवैध तरीके धन जुटाया जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
- ब्रिटेन में भारी उछाल: ब्रिटेन में होने वाले कुल अपराधों में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी केवल धोखाधड़ी (फ्रॉड) की है।
- सिंगापुर में साइबर ठगी: डिजिटल रूप से उन्नत माने जाने वाले सिंगापुर में मात्र दो वर्षों के भीतर साइबर धोखाधड़ी के मामलों में 61 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
- वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग जोखिम: एफएटीएफ की ओर से आंके गए 156 अधिकार क्षेत्रों (यानी 90% देशों) ने अब धोखाधड़ी को मनी लॉन्ड्रिंग के एक प्रमुख जोखिम के रूप में स्वीकार कर लिया है, जो वित्तीय अपराध नेटवर्कों को बढ़ावा दे रहा है।
डिजिटलाइजेशन का कैसे हो रहा दुरुपयोग
एफएटीएफ की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि डिजिटलाइजेशन, तकनीकी प्रगति और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की सीमाहीन प्रकृति ने अपराधियों के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। जालसाज अब धोखाधड़ी करने के बाद अवैध धन को तेजी से एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे इस पैसे को ट्रैक करना और वापस लाना बेहद जटिल हो गया है। एफएटीएफ अध्यक्ष एलिसा डी एंडा मद्राजो ने कहा है, "जैसे-जैसे जालसाज अपनी ठगी के तरीके बदल रहे हैं और इसमें तेजी ला रहे हैं, हमें भी लोगों के पैसे और पीड़ितों को भारी नुकसान से बचाने के लिए उसी रफ्तार से काम करना होगा"। उन्होंने वैश्विक मानकों में मौजूद खामियों का फायदा उठाने वाले जालसाजों को रोकने के लिए एफएटीएफ टूलकिट के पूर्ण उपयोग पर भी जोर दिया है।
रोकथाम के लिए एफएटीएफ ने क्या सुझाव दिए?
साइबर ठगी और अवैध वित्तीय प्रवाह से निपटने के लिए एफएटीएफ ने अपने मानकों को और अधिक मजबूत करने के कई उपाय सुझाए हैं:
- वर्चुअल एसेट्स पर नकेल: वर्चुअल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी) का उपयोग धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग में तेजी से बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए सख्त रेगुलेशन की आवश्यकता है।
- शेल कंपनियों पर लगाम: संगठित अपराधी अक्सर शेल कंपनियों के पीछे छिपकर अपने अवैध लेन-देन को अंजाम देते हैं, इसलिए वास्तविक मालिकाना हक में पारदर्शिता लाना जरूरी है।
- पेमेंट ट्रांसपेरेंसी और एसेट रिकवरी: फंड की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए पेमेंट ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना और अवैध संपत्ति को फ्रीज कर वापस लाने के लिए एसेट रिकवरी टूल्स को बेहतर बनाना आवश्यक है।
- एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग: कई वित्तीय खुफिया इकाइयां (एफआईयू) और बैंक अब धोखाधड़ी से जुड़ी गड़बड़ियों का पता लगाने और लेनदेन के आंकड़ों पर नजर रखने के लिए मशीन लर्निंग जैसे उन्नत मॉडल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए दुनिया में क्या तैयारी?
साइबर फ्रॉड के बढ़ते पैमाने और इसकी जटिलता को देखते हुए, एफएटीएफ ने आने वाले वर्षों में इस खतरे से निपटने के लिए अपने संसाधनों को केंद्रित करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसी दिशा में, समन्वित वैश्विक कार्रवाई और ठगी के पैसे की रिकवरी की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एफएटीएफ के प्रतिनिधि अगले महीने वियना में इंटरपोल और यूएनओडीसी के साथ मिलकर ग्लोबल फ्रॉड समिट में भाग लेंगे। इस बैठक से वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को लेकर कई अहम नीतियां सामने आने की उम्मीद है।