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Indian Market: वैश्विक अनिश्चितता और एआई की वजह से बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित, जानें विशेषज्ञों की राय

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: रिया दुबे Updated Wed, 25 Feb 2026 02:02 PM IST
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सार

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की मुनाफावसूली जारी है। टैरिफ चिंता, आईटी शेयरों में बिकवाली, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की तेजी और मजबूत डॉलर के चलते बाजार में उथल-पुथल देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक अनिश्चितता और एआई से जुड़ी चिंताओं के कारण आगे बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ रह सकता है।

Global uncertainty and AI are impacting market sentiment; learn experts' opinions
शेयर बाजार - फोटो : Adobestock
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विस्तार

कमजोर वैश्विक संकेतों को देखते हुए निवेशकों द्वारा बाजार में मुनाफावसूली जारी है। हालांकि आज घरेलू बाजार में बढ़त देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 558.79 अंक बढ़कर 82,784.71 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 157.05 अंक चढ़कर 25,581.70 पर पहुंच गया। 

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वहीं पिछले दिन मंगलवार को भारतीय बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी टैरिफ पर चिंता के साथ आईटी शेयरों की बड़े पैमाने पर बिकवाली रही। वहीं अमेरिका-ईरान विवाद जो काफी लंबे समय से चल रहा है साथ ही  कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के साथ मजबूत होता डॉलर भी बाजार की गिरावट की वजह बने। 
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मोतीलाल ओसवाल फाइनेशियल सर्विसेज लिमिटेड के वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका कहते हैं कि दुनिय भर में अनिश्चितता और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की वजह से होने वाली रुकावट की चिंता लगातार बाजार के सेंटिमेंट पर असर डाल रही हैं। आगे देखें तो, मिले-जुले ग्लोबल और घरेलू संकेतों की वजह से मार्केट के एक बड़े दायरे में बने रहने की उम्मीद है।

फरवरी में अभी तक आईटी शेयरों में 20 प्रतिशत की गिरावट

आईटी कंपनियों की शेयरों के लिए फरवरी का महीना सबसे बुरा साबित होता दिखाई दे रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में अभी तक 20 प्रतिशत अधिक की गिरावट देखी जा चुकी है, जो कि सितंबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी मंथली गिरावट बन सकती है।  एआई आधारित परेशानियों और अमेरिका में उच्च ब्याज दरों को लेकर चिंताओं के बीच फरवरी में अभी तक आईटी शेयरों में 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं वैश्विक स्तर पर भी आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर कहते हैं कि ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्पेस में एआई की वजह से होने वाली रुकावट को लेकर चिंताओं ने कुल मिलाकर रिस्क लेने की क्षमता पर असर डाला और अधिकतर सेक्टर्स में अपनी रक्षात्मक पोजिशनिंग को बढ़ाया है। आईटी सेक्टर पर बिकवाली का सबसे अधिक असर पड़ा और इसकी वजह से ग्लोबल कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। तेजी से बढ़ते नए एआई बिजनेस मॉडल्स बाजार में वैल्यूशन फ्रेमवर्क को बिगाड़ सकते हैं, इसकी वजह से सेंटिमेंट और भी खराब हो रहे हैं।  

एंथ्रोपिक का वैल्यूएशन 380 डॉलर तक पहुंचा

AI कंपनी एंथ्रोपिक का वैल्यूएशन लगभग 380 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा के संयुक्त मार्केट कैप (करीब 240 अरब डॉलर) से भी अधिक बताया जा रहा है।

निवेशक घरेलू कंपनियों में कर रहे निवेश  

जियोजित इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेशक रणनीतिकार वीके विजयकुमार कहते हैं, घरेलू बाजार में आईटी शेयरों में बड़ी कमजोरी रही, जिसकी वजह से बाजार में गिरावट आई है। एआई से होने वाली रुकावट और पारंपरिक सेवाप्रदाताओं के लिए मार्जिन के दबाब को लेकर दुनिया भर में नई चिंताएं है। वे कहते हैं कि आईटी सेक्टर में यह दबाव लबें समय तक रहने की संभावनाओं के बीच इसका असर रियल्टी स्टॉक पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं अमेरिका और ईरान तनाव ने निवेशकों को जोखिम से बचने के लिए सतर्क कर दिया है। कुल मिलाकर बाजार वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और सेक्टर विशेष के दबावों के प्रति अधिक संवेदनशील बने हुए हैं। इससे निवेशक रक्षात्मक रणनीति को अपनाने हुए घरेलू बाजार केंद्रीत सेगमेंट(घरेलू कंपनियां के शेयरों में निवेश) की ओर बढ़ रहे हैं।

अमेरिकी टैरिफ की चिंताएं

पोनमुडी आर कहते हैं बढ़ती वैश्विक मैक्रो अनिश्चितता, विशेषकर अमेरिका ट्रेड और टैरिफ डेवलपमेंट की वजह से निवेशक भारतीय बाजारों में सावधानी बरत रहे हैं। वीके विजयकुमार कहते हैं, राष्ट्रपति ट्रंप के आज के स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण और उनके द्वारा दिए जानेवाले संदेश पर वैश्विक बाजार की पैनी नजर है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से टैरिफ बदलाव के मद्देनजर यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ समझौते को स्थगति करना और ट्रंप द्वारा समझौतों से पीछे हटने वाले देशों को दी गई चेतावनी से संकेत मिलता है कि टैरिफ का यह नाटक अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों पर और भी अधिक प्रभाव डालेगा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ने विदेशी देशों को धमकी दी है कि अगर वे अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हैं, तो उन्हें अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर और उच्च शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जो काफी लंबे समय से चल रहा है, इसकी वजह से भी निवेशक सतर्क बने हुए हैं। क्योंकि विरोध प्रदर्शन अब पूरे ईरान में हो रहे हैं और सरकार की हिंसक प्रतिक्रियाओं में हजार लोग मारे जा रहे हैं। वहीं अमेरिका ने ईरान को सैन्य कार्रवाही करने की धमकी दी है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता 26 फरवरी को होनी है।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आर्थिक स्थितरता पर दबाव  

एलारा कैपिटल का कहना है, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव जो कि पिछले कई महीनों से चल रहा है और परमाणु वार्ता से पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यह 72 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है, जो छह महीने के उच्चतम स्तर के करीब है। विशेषज्ञ कहते हैं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर बाजार पर देखा जा रहा है, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे तेल आयात देश है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश यह मुद्रा को कमजोर कर सकता है।

मजबूत डॉलर

जानकार डॉलर की मजबूती को भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए नकारात्मक बताते हैं, क्योंकि इससे विदेशी पूंजी के आउटफ्लो का जोखिम बढ़ जाता है। फिलहाल सूचकांक में 0.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सेंटीमेंट में सुधार देखा गया है और वे भारतीय बाजार में खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन शेयरों के मूल्यांकन अभी भी ऊंचे बने हुए हैं और कंपनियों की आय में ठोस सुधार देखने को नहीं मिल रहे हैं।


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