Nirmala Sitharaman: 'डर नहीं, विश्वास जरूरी', आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के बीच वित्त मंत्री का बड़ा बयान
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के कुछ लोग लोगों के बीच डर फैला रहे हैं। उन्हें ऐसा करने की बजाय लोगों में विश्वास जगाना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह बड़ा बयान दिया है। वित्त मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया और एमएसएमई के विलंबित भुगतानों पर चिंता व्यक्त की।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में कुछ लोग डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें ऐसा करने की बजाय लोगों में विश्वास जगाना चाहिए। वित्त मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के बीच अपनी उपलब्धियों को कम आंकने वालों पर भी टिप्पणी की।
सीतारमण ने मुंबई में सिडबी के एक कार्यक्रम में ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि बाहरी कारकों से चुनौतियां होने के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था सकारात्मक और लचीली बनी हुई है। सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया को झटकों को सहने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अंतर्निहित विकास गति को बनाए रखना है। वित्त मंत्री ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कटौती से सरकार को एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। सीतारमण ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विलंबित भुगतानों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि एमएसएमई के 8.1 लाख करोड़ रुपये के भुगतान अटके हुए हैं। इससे उनकी कार्यशील पूंजी और वृद्धि प्रभावित हो रही है।
एमएसएमई को समय पर भुगतान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को 45 दिन की समय सीमा के भीतर भुगतान करें। यह कदम एमएसएमई को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। समय पर भुगतान से उनकी कार्यशील पूंजी की समस्या हल होगी। इससे छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
अर्थव्यवस्था की मजबूती
सीतारमण ने देश की आर्थिक मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी चुनौतियों के बावजूद मजबूत है। नीतिगत उपाय आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य देश की विकास दर को बनाए रखना है। यह लोगों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
वित्त मंत्री का बैंकों और सिडबी को क्या संदेश?
वित्त मंत्री ने बैंकरों से कहा है कि वे केवल एक जैसे (स्टैंडर्ड) लोन प्रोडक्ट बेचने तक सीमित न रहें। उन्होंने जोर देकर कहा, "स्टैंडर्ड प्रोडक्ट नॉन-स्टैंडर्ड बिजनेस के काम नहीं आ सकते"। वर्तमान में बैंक या माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं हर महीने या हर हफ्ते ईएमआई मांगती हैं, जबकि हर बिजनेस में हर महीने एक जैसी कमाई नहीं होती है। इसलिए, बैंकों को ऐसे क्रेडिट ऑफर डिजाइन करने चाहिए जिनकी किश्तें कारोबारियों की अनोखी जरूरतों और उनके कमाई के चक्र पर आधारित हों।
रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन और शानदार क्रेडिट ग्रोथ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश का सकल जीएसटी (GST) कलेक्शन 8.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 22 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। बैंकिंग क्षेत्र का समर्थन भी लगातार मिल रहा है, जिसके तहत रिटेल कर्ज (18.1%), कृषि कर्ज (15.5%) और एमएसएमई क्षेत्र के कर्ज (18.2%) में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, ट्रैक्टर, यात्री वाहन और दोपहिया वाहनों की बढ़ती बिक्री के साथ-साथ सरकारी बैंकों के घटते एनपीए (NPA) जैसी बातें मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक स्थिरता का स्पष्ट संकेत दे रही हैं।
भव्य योजना से मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्टर
आर्थिक विकास की इसी गति को औद्योगिक बुनियादी ढांचे का साथ देने के लिए केंद्र सरकार ने 33,660 करोड़ रुपये की 'भव्य' (BHAVYA) योजना के तहत काम शुरू कर दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पहले चरण में 50 नए प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करने के लिए राज्यों से अगले चार महीनों के भीतर आवेदन मांगे गए हैं। इस योजना के तहत 100 से 1,000 एकड़ (पहाड़ी राज्यों में 25 एकड़) के पार्क विकसित किए जाएंगे, जिसके बुनियादी ढांचे के लिए सरकार प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी। अगले तीन वर्षों में इन शुरुआती 50 पार्कों के पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा एमएसएमई, स्टार्टअप्स और तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर की तलाश कर रहे वैश्विक निवेशकों को मिलेगा।