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Gold Investment: सिर्फ गहने नहीं, अब समझदारी से करें गोल्ड में निवेश; जानें कैसे देश और जेब दोनों रहेंगे मजबूत

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 25 May 2026 06:03 AM IST
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सार

भारत में सोना सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन बढ़ते आयात बिल और कमजोर रुपये के बीच विशेषज्ञ अब समझदारी से सोना खरीदने की सलाह दे रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड वॉल्ट जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने को सिर्फ मुनाफे का साधन नहीं बल्कि संतुलित निवेश के रूप में देखना चाहिए, ताकि निवेशक और देश दोनों को फायदा मिल सके।

Gold Investment Not Just Jewelry Invest Wisely Now Learn How Both the Nation Your Wallet Will Stay Strong
हर चमकता सोना फायदे का सौदा नहीं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह से लेकर मुश्किल समय तक, सोना हर परिवार की आर्थिक ताकत का हिस्सा रहा है। गांव से लेकर शहर तक लोग इसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। लेकिन अब बदलती आर्थिक परिस्थितियों में सोने को सिर्फ परंपरा के नजरिए से नहीं देखा जा रहा। बढ़ते आयात बिल, कमजोर रुपया और महंगे कच्चे तेल के बीच सोने की खरीद देश की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ गई है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि सोना खरीदना गलत नहीं है, लेकिन खरीदने का तरीका बदलना जरूरी हो गया है।


क्यों बढ़ रही है सोने की खरीद को लेकर चिंता?
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाले देशों में शामिल है। एक अनुमान के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 34,600 टन सोना मौजूद है, जिसकी कीमत 5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा आंकी गई है। लेकिन भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसका सीधा असर देश के चालू खाते और रुपये पर पड़ता है। जब रुपया कमजोर होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तब ज्यादा सोना आयात करना आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। यही वजह है कि हाल में प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक सोना खरीद टालने की अपील की थी।
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गहना, निवेश और ट्रेडिंग में फर्क समझना क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी गलती लोग तब करते हैं, जब गहना, निवेश और ट्रेडिंग को एक जैसा मान लेते हैं। शादी या पहनने के लिए खरीदा गया गहना अलग जरूरत है, जबकि निवेश के लिए खरीदा गया सोना अलग उद्देश्य रखता है। इसके अलावा केवल मुनाफे के लिए सोने की ट्रेडिंग करना बिल्कुल अलग चीज है। पारंपरिक ज्वेलरी खरीद में मेकिंग चार्ज, जीएसटी, मार्जिन और शुद्धता जैसी कई चीजें जुड़ी होती हैं। कई बार ग्राहक यह समझ ही नहीं पाता कि वह असली सोने की कीमत दे रहा है या डिजाइन और अतिरिक्त खर्च का पैसा चुका रहा है।

निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड वॉल्ट क्यों बढ़ रहे?
शहरी निवेशकों के बीच अब सोने में निवेश का तरीका बदल रहा है। लोग फिजिकल ज्वेलरी की जगह गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं। साल 2025 में गोल्ड ईटीएफ में करीब 43 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया। इसी सोच के साथ गोल्ड वॉल्ट जैसे विकल्प सामने आए हैं। इसमें निवेशक एमसीएक्स से जुड़े लाइव बाजार भाव पर सोना और चांदी खरीद सकते हैं। इसमें सुरक्षित वॉल्ट स्टोरेज की सुविधा मिलती है और जरूरत पड़ने पर फिजिकल डिलीवरी का विकल्प भी मौजूद रहता है।
 

पहलू

पारंपरिक ज्वेलरी

गोल्ड वॉल्ट

कीमत

भाव + मेकिंग चार्ज + मार्जिन

एमसीएक्स का लाइव भाव

उद्देश्य

पहनना और शादी

निवेश और लंबी अवधि होल्डिंग

स्टोरेज

घर या लॉकर

सुरक्षित वॉल्ट

पारदर्शिता

दुकान पर निर्भर

एक्सचेंज आधारित

डिलीवरी

तुरंत गहना

जरूरत पड़ने पर फिजिकल डिलीवरी



विशेषज्ञों के मुताबिक गोल्ड वॉल्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शिता है। इसमें खरीद सीधे एमसीएक्स के फिजिकल डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट ढांचे से जुड़ी होती है। निवेशक को बाजार से जुड़ी लाइव कीमत दिखाई देती है और उसका सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। इससे शुद्धता और स्टोरेज की चिंता कम हो जाती है। हालांकि यह पारंपरिक ज्वेलरी का विकल्प नहीं बल्कि निवेश के लिए एक अलग माध्यम माना जा रहा है।

क्या सोने को सिर्फ मुनाफे का साधन मानना सही होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने को तेजी से पैसा कमाने का जरिया नहीं समझना चाहिए। इसे पोर्टफोलियो में संतुलित हिस्से के रूप में रखना बेहतर माना जाता है। निवेशकों को पूरा पैसा सिर्फ सोने में लगाने से बचना चाहिए। सोना लंबी अवधि में सुरक्षा और विविधता देने वाला निवेश माना जाता है, खासकर तब जब वैश्विक तनाव और महंगाई बढ़ रही हो।

देश की अर्थव्यवस्था से कैसे जुड़ा है सोना?
हर ग्राम सोना सिर्फ किसी घर के लॉकर में नहीं जाता, बल्कि उसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। ज्यादा आयात से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। ऐसे में समझदारी से सोना खरीदना व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर जरूरी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सोना छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि खरीद का तरीका आधुनिक और पारदर्शी बनाना होगा।

निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में निवेश सोच-समझकर करना जरूरी है। सोने को भावनाओं के साथ-साथ आर्थिक नजरिए से भी समझना होगा। अगर निवेशक पारदर्शी और सुरक्षित माध्यमों को अपनाते हैं तो उन्हें बेहतर सुरक्षा और सही कीमत दोनों मिल सकती हैं। यही वजह है कि अब सोने की खरीद में भी नई सोच और आर्थिक अनुशासन की जरूरत महसूस की जा रही है।
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