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Russia: कोरोना से बच गए, पर नए कानून के बाद बंद करनी पड़ी दुकान; जानिए रूस में छोटे कारोबारी क्यों हैं परेशान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 23 Feb 2026 02:52 PM IST
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सार

रूस की नई कर नीति से छोटे और मध्यम कारोबारों पर टैक्स और लागत का दबाव बढ़ गया है, जिससे कई व्यवसाय बंद होने की कगार पर हैं। कजान के एक बेकरी संचालक ने भी बढ़ते कर बोझ और घटती मांग के कारण अपना कारोबार बंद करने को मजबूरी बताया।

forced to close their shops after the new law; learn why small businesses in Russia are struggling
व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

रूस में लागू नई कर सुधार नीति के चलते छोटे और मध्यम उद्यमों पर आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। कई कारोबारियों का कहना है कि बढ़े हुए टैक्स, लागत में उछाल और मांग में गिरावट के कारण व्यवसाय चलाना बेहद कठिन हो गया है। कजान की पेस्ट्री शॉप संचालक डेनिस मैक्सिमोव ने बताया कि अपने कारोबार को बंद करने का फैसला उनके लिए बेहद भावनात्मक और कठिन था, क्योंकि यह उनके जीवन का केंद्र था और उन्होंने इसे 2020 में शुरू कर महामारी जैसी चुनौती के बावजूद संभाला था।

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व्यापारियों ने क्या कहा?

व्यापारियों के अनुसार, महामारी अस्थायी संकट थी, लेकिन नई कर व्यवस्था दीर्घकालिक है और भविष्य में टैक्स बोझ और बढ़ने की आशंका है। सुधारों के तहत 2027 और 2028 तक कम राजस्व वाले अधिक व्यवसाय भी उच्च कर दायरे में आ जाएंगे, जिससे छोटे कारोबारों की वित्तीय स्थिति और प्रभावित हो सकती है।

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रूस की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारियों की हिस्सेदारी कितनी?

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि रूस की अर्थव्यवस्था में छोटे और मध्यम उद्यमों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक है, जो रोजगार, नवाचार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के लिए अहम मानी जाती है। कंसल्टेंसी फर्म मैक्रो-एडवाइजरी के सीईओ क्रिस वीफर के मुताबिक, छोटे कारोबारों पर वैट का दायरा बढ़ाना वित्त मंत्रालय की एक रणनीतिक पहल है। इसका उद्देश्य तेल राजस्व में गिरावट और बढ़ते बजट घाटे के बीच सरकार के लिए स्थिर और पूर्वानुमान योग्य आय सुनिश्चित करना है।


विश्लेषकों का यह भी मानना है कि 2014 में क्रीमिया संकट के बाद लगे प्रतिबंधों से ही छोटे और मध्यम उद्यम लगातार दबाव में रहे हैं, क्योंकि सरकारी समर्थन मुख्य रूप से बड़े उद्योगों को मिला। नई कर नीतियां इस दबाव को और बढ़ा सकती हैं। हालांकि इससे तत्काल आर्थिक ढांचे को बड़ा झटका लगने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन दीर्घकाल में यह आर्थिक वृद्धि, नवाचार और बाजार विस्तार की गति को धीमा कर सकती है, क्योंकि यही क्षेत्र किसी भी अर्थव्यवस्था में विकास का प्रमुख इंजन माना जाता है।


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