डब्ल्यूजीसी: ऊंची कीमतों के कारण सोने की वैश्विक मांग घटी, आभूषणों पर असर; जानिए रिपोर्ट में क्या?
विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की तीसरी तिमाही में सोने की वैश्विक मांग 1% घटी। ऊंची कीमतों के कारण आभूषणों की मांग में 17% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि गोल्ड ईटीएफ और केंद्रीय बैंकों की खरीद बढ़ी।
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विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार 2026 की तीसरी तिमाही में सोने की वैश्विक मांग में एक फीसदी की कमी आई है। ऊंची कीमतों और बाजार में अनिश्चितता के कारण यह मांग 1,369 टन रह गई। हालांकि, मांग का कुल मूल्य 22 फीसदी बढ़कर 188 अरब डॉलर पहुंच गया। ऊंची कीमतों का सबसे अधिक असर आभूषणों की मांग पर पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में सोने की औसत कीमत 4,262 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रही। गोल्ड ईटीएफ और केंद्रीय बैंकों की खरीद में मजबूती देखने को मिली। व्यक्तिगत निवेशकों की ओर से सोने की छड़ और सिक्कों की खरीदारी में कमजोरी दर्ज की गई। इनकी वैश्विक मांग 19 फीसदी घटकर 268 टन रह गई। कीमतों को लेकर स्पष्ट दिशा न होने से निवेशकों ने खरीदारी से दूरी बनाए रखी। चीन और भारत में मौसमी सुधार तथा कीमतों में नरमी से तिमाही-दर-तिमाही आधार पर सोने की मांग में 12 फीसदी का सुधार हुआ।
आभूषणों की मांग क्यों घटी?
डब्ल्यूजीसी की 'तीसरी तिमाही 2026 स्वर्ण मांग रुझान' रिपोर्ट बताती है कि ऊंची कीमतों के कारण आभूषणों की वैश्विक मांग 17 फीसदी गिरकर 313 टन हो गई। यह किसी भी तीसरी तिमाही का अब तक का सबसे कमजोर आंकड़ा है। महामारी से प्रभावित 2020 की तीसरी तिमाही में भी 331 टन की मांग दर्ज हुई थी। ग्राहकों के बीच हल्के और कम कैरेट वाले आभूषण खरीदने का रुझान जारी रहा। डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय सीईओ (भारत) सचिन जैन के अनुसार, चीन में आभूषणों की मांग करीब 22 फीसदी घटी। भारत में भी यह लगभग 19.5 फीसदी कम हुई।
गोल्ड ईटीएफ में निवेश का क्या रहा हाल?
तीसरी तिमाही में भौतिक सोने से समर्थित गोल्ड ईटीएफ में फिर से निवेश आया। इनमें 211 टन सोना जुड़ा, जो दूसरी तिमाही में हुई निकासी के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है। यूरोप में सूचीबद्ध फंडों ने इस निवेश की अगुवाई करते हुए 92 टन सोना जोड़ा। यह 2022 की पहली तिमाही के बाद सबसे बड़ी तिमाही वृद्धि है। सचिन जैन ने बताया कि आमतौर पर कीमतों में गिरावट पर ईटीएफ से निकासी होती है। लेकिन इस तिमाही में इसके उलट काफी निवेश आया।
केंद्रीय बैंकों ने कितना सोना खरीदा और क्यों?
जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों ने अपने भंडार में शुद्ध रूप से 321 टन सोना जोड़ा। यह सालाना आधार पर 42 फीसदी अधिक है। यह 2024 की चौथी तिमाही के बाद सबसे बड़ा तिमाही आंकड़ा है। पोर्टफोलियो में विविधता लाना इस खरीदारी का प्रमुख कारण रहा। जोखिम प्रबंधन भी एक अहम वजह थी। चीन, पोलैंड और चेक गणराज्य ने इस रुझान को मजबूती दी।