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आरबीआई का बड़ा फैसला: छोटे निर्यातकों-आयातकों को मिली राहत, जानिए रिपोर्टिंग नियम कैसे हुए आसान

Tue, 03 Nov 2026 06:32 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 03 Nov 2026 06:32 PM IST
सार

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने छोटे सेवा निर्यातकों और आयातकों के लिए रिपोर्टिंग नियमों को आसान बनाया है।
  • इससे व्यापार करना सुगम होगा और अनुपालन बोझ कम होगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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RBI Eases Reporting Norms for Small Service Exporters and Importers
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को छोटे सेवा निर्यातकों और आयातकों के लिए रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को आसान बनाया है। केंद्रीय बैंक ने निर्यात घोषणाओं को दाखिल करने के नियमों में भी ढील दी है। ये महत्वपूर्ण बदलाव विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात) विनियमों में किए गए हैं।

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संशोधित नियमों के तहत, सेवा निर्यातक को भुगतान प्राप्त होने की जानकारी अधिकृत डीलर को अपने खातों में जमा करने के लिए देने पर निर्यात घोषणापत्र (ईडीएफ) जमा माना जाएगा। निवासी व्यक्तियों के अलावा अन्य निर्यातकों के लिए, यह सुविधा एक सेवा के लिए 10 लाख रुपये या उसके बराबर विदेशी मुद्रा तक के आवक भुगतानों पर उपलब्ध होगी। आरबीआई ने सेवा आयातों के लिए आयात डेटा प्रसंस्करण और निगरानी प्रणाली (आईडीपीएमएस) रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को भी कुछ विशिष्ट शर्तों के अधीन आसान बनाया है।

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सेवा निर्यातकों को क्या फायदा मिलेगा?

नए नियमों के अनुसार, सेवा निर्यातकों को अब अलग से निर्यात घोषणापत्र (ईडीएफ) जमा करने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें केवल अधिकृत डीलर को भुगतान प्राप्त होने की जानकारी देनी होगी। यह जानकारी देने पर ही उनका ईडीएफ जमा माना जाएगा। यह प्रक्रिया छोटे निर्यातकों के लिए अनुपालन बोझ को कम करेगी। निवासी व्यक्तियों के अलावा अन्य निर्यातकों के लिए, यह सुविधा 10 लाख रुपये तक के आवक भुगतानों पर लागू होगी। यह नियम विदेशी मुद्रा में प्राप्त होने वाले भुगतानों पर भी समान रूप से लागू होगा, जिससे प्रक्रिया सरल होगी।

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आयातकों के लिए क्या बदलेगा?

आरबीआई ने सेवा आयातों के लिए आयात डेटा प्रसंस्करण और निगरानी प्रणाली (आईडीपीएमएस) की रिपोर्टिंग आवश्यकताओं में भी ढील दी है। संशोधित विनियमों के तहत, अधिकृत डीलर बैंकों को आईडीपीएमएस में सेवा आयात का विवरण तभी दर्ज करना होगा। यह नियम तब लागू होगा जब आयातक निवासी व्यक्ति न हो। साथ ही, चालान या अनुबंध मूल्य 10 लाख रुपये या उसके बराबर विदेशी मुद्रा से अधिक हो। बैंकों को यह जानकारी प्राप्त होने के पांच कार्य दिवसों के भीतर दर्ज करनी होगी, जिससे अनावश्यक रिपोर्टिंग से बचा जा सकेगा।

ये नए नियम कब से लागू होंगे?

आरबीआई द्वारा जारी किए गए ये संशोधित नियम पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होंगे। इसका अर्थ है कि ये नियम पिछली किसी तारीख से प्रभावी माने जाएंगे। ये नियम 1 अक्तूबर, 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। यह तिथि भविष्य की है, लेकिन स्रोत में यही दी गई है। यह बदलाव छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन को सरल बनाने में मदद करेगा।

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