Gold Silver Price: कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक कमजोरी से सोना 800 रुपये गिरा, क्या है बाजार का हाल?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दिल्ली में सोना 800 रुपये गिरकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जानें वैश्विक बाजार और भू-राजनीतिक स्थिति का सोने पर क्या असर हो रहा है।
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देश की राजधानी दिल्ली में सोने का भाव लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में नरम पड़ा। बुधवार को सोना 800 रुपये गिरकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की दरों में वृद्धि और कमजोर वैश्विक रुझानों ने निवेशकों की भावना को प्रभावित किया।
99.9 फीसदी शुद्धता वाला यह पीला धातु 800 रुपये घटकर 1,48,450 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। मंगलवार को इसका बंद भाव 1,49,250 रुपये प्रति 10 ग्राम था। हालांकि, चांदी की कीमतें 2,39,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर अपरिवर्तित रहीं।
सोने की कीमतों में गिरावट का क्या कारण है?
व्यापारियों ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ाया। इससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत हुए, जिससे बुलियन पर दबाव बना रहा। HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से कीमती धातुओं के प्रति भावना कमजोर हुई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का क्या प्रदर्शन रहा?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 49.46 अमेरिकी डॉलर या 1.2 फीसदी गिरकर 4,056.24 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी गिरकर 58.61 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। मीरा एसेट शेयरखान के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौते को 'समाप्त' घोषित करने के बाद वैश्विक बाजारों में हाजिर सोने पर दबाव बढ़ गया।
भू-राजनीतिक तनाव का क्या असर हुआ?
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 7 फीसदी बढ़ गईं। ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर सूचकांक भी मजबूत हुए। ऊर्जा की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकती हैं और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती हैं। ऑगमांट की अनुसंधान प्रमुख रेनिशा चैनानी ने कहा कि निवेशक फेडरल रिजर्व की एफओएमसी बैठक के विवरण का इंतजार कर रहे थे। इससे ब्याज दरों की दिशा के बारे में नए संकेत मिलने की उम्मीद थी।