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Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी पर लग सकता है प्रतिबंध, क्यों केवल 25 फीसदी लोगों ने दी निवेश की जानकारी?

Thu, 09 Jul 2026 03:38 AM IST
Devesh Tripathi बोनस डेस्क, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 09 Jul 2026 03:38 AM IST
सार

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियामकीय रुख और सख्त होता दिखाई दे रहा है। आरबीआई ने एक बार फिर क्रिप्टो परिसंपत्तियों और निजी स्टेबलकॉइन्स से जुड़े जोखिमों का हवाला देते हुए कड़े प्रतिबंधों की वकालत की है। वहीं, आयकर विभाग के अनुसार बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपने आयकर रिटर्न में क्रिप्टो लेनदेन की पूरी जानकारी नहीं दी। 

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क्रिप्टोकरेंसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल अब और गहरे हो गए हैं। दो सबसे बड़ी नीतिगत संस्थाओं आरबीआई और आयकर विभाग ने क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ तेवर और कड़े कर दिए हैं।
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सरकारी दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि सीमित विनियामक स्पष्टता के पक्ष से हटकर सख्त प्रतिबंधों की तैयारी चल रही है। प्रमुख अधिकारी देश की वित्तीय स्थिरता के बढ़ते जोखिमों को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि क्रिप्टो का व्यापार बिना स्पष्ट नियमों के लगातार जारी है।
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क्रिप्टो से जुड़े जोखिमों पर क्या बोला आरबीआई?
क्रिप्टो से जुड़े जोखिमों पर बार-बार चेतावनी देने वाले आरबीआई ने फिर से कहा है कि इस पर प्रतिबंध वाली नीति ही अपनानी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने कहा, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टो संपत्तियों एवं निजी तौर पर जारी किए गए स्टेबलकॉइन्स को रखने, व्यापार करने या उनमें एक्सपोजर लेने से रोका जाना चाहिए, ताकि इसके जोखिमों को सीमित किया जा सके।
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वर्तमान में, भारतीय बैंकों को क्रिप्टो में लेनदेन से प्रतिबंधित नहीं किया गया है, लेकिन प्रमुख कर्जदाताओं ने इसेे दूरी बनाई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि क्रिप्टो को वित्तीय तंत्र में प्रवेश मिला, तो यह बैंकिंग स्थिरता के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। 


25% से कम लोगों ने दी क्रिप्टो में निवेश की सूचना
आयकर विभाग ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। 
  • भारत में करीब 3.9 करोड़ क्रिप्टो निवेशक हैं, जिनके पास 2.1 अरब डॉलर की डिजिटल संपत्ति है।
  • विभाग ने पाया कि मार्च, 2023 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में जिन 6.45 लाख लोगों ने क्रिप्टो में लेनदेन किया।
  • इनमें से 25 फीसदी से भी कम लोगों ने अपने टैक्स रिटर्न में इसकी सही जानकारी दी।

स्टेबलकॉइन्स बन रहा है नया खतरा
आरबीआई के अनुसार, विदेशी मुद्राओं से समर्थित स्टेबलकॉइन्स, घरेलू संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करते हैं। स्टेबलकॉइन्स को अनुमति देने से क्रिप्टो से होने वाले मुनाफे का पता लगाना और उन पर टैक्स लगाना अधिक कठिन हो सकता है, क्योंकि इससे होल्डिंग्स को फिएट करेंसी में बदलने की जरूरत कम हो जाएगी। भारत क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले मुनाफे पर अभी 30 फीसदी की दर से टैक्स लगाता है।
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