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IMF: वैश्विक तनाव और AI की रफ्तार चुनौती; आईएमएफ ने घटाया दुनिया की तरक्की का अनुमान, क्या संकट में है भारत?

Wed, 08 Jul 2026 07:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 08 Jul 2026 07:35 PM IST
सार

आईएमएफ ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान घटाकर तीन प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत के बारे में भी टिप्पणी की है। युद्ध और महंगाई के इस दौर में भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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War vs Technology: IMF Trims Global Growth Outlook to 3% for 2026, Warns of Inflation Spike
आईएमएफ की रिपोर्ट में क्या खास? - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बुधवार को अपनी ताजा रिपोर्ट में दुनिया को चेतावनी देते हुए साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर के अनुमान को घटाकर 3% कर दिया है। आईएमएफ के इस आर्थिक आकलन ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि युद्ध से उपजे ऊर्जा संकट और महंगाई की नई लहर से निपटना आसान नहीं होगा।

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आईएमएफ की रिपोर्ट में भारत के बारे में क्या कहा गया?

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जुलाई 2026 के अपने विश्व आर्थिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) अपडेट में कहा है कि भारत, निकट भविष्य के विकास अनुमान में मामूली गिरावट के बावजूद  सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। 

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आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2026-27 में देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान लगाया है, जो अप्रैल में अनुमानित 6.5% से कम है। इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में यह दर बढ़कर 6.7% हो जाएगी, जो पहले के 6.5% के अनुमान से अधिक है। वित्त वर्ष 2026-27 का अनुमान आईएमएफ के अप्रैल के पूर्वानुमान से 0.1 प्रतिशत अंक कम है, जबकि वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमान में 0.2 प्रतिशत अंक की वृद्धि की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "निजी उपभोग और सेवा गतिविधियों में मजबूत गति के कारण भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है, जिसकी वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान है।"

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क्या युद्ध और तकनीक के बीच फंस गई है दुनिया की अर्थव्यवस्था?

आईएमएफ की 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (डब्ल्यूईओ) जुलाई रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया युद्ध और तकनीक की दोहरी लहरों के बीच झूल रही है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के आर्थिक असर को काफी हद तक 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और इसकी मजबूत मांग ने संभाल लिया है। इसके बावजूद, आईएमएफ ने अप्रैल में लगाए गए 3.1% के विकास अनुमान को घटाकर अब 2026 के लिए 3% कर दिया है, जो कि 2024-25 के औसत 3.5% से कम है। हालांकि, साल 2027 में इसके सुधरकर 3.4% पर पहुंचने का अनुमान है।

इस आर्थिक मंदी में कौन से देश बाजी मारेंगे और कौन पिछड़ेंगे?

आईएमएफ के अनुसार, वर्तमान में देशों का आर्थिक प्रदर्शन मुख्य रूप से दो बातों पर टिका है: पहला, वे युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा संकट से कितने प्रभावित हैं, और दूसरा, दुनिया की तकनीकी वैल्यू चेन में उनका स्थान क्या है। जो देश युद्ध में शामिल नहीं और ऊर्जा का निर्यात करते हैं, उन्हें तेल की बढ़ती कीमतों से फायदा हो रहा है। वहीं, जो देश तकनीक और एआई के क्षेत्र में आगे हैं, वे ऊर्जा आयातक होने के बावजूद मजबूत स्थिति में हैं। इसके विपरीत, तकनीक से कटे हुए ऊर्जा आयातक देशों की आर्थिक रफ्तार काफी सुस्त पड़ रही है।

महंगाई और वैश्विक व्यापार में मंदी को लेकर क्या है आईएमएफ की चेतावनी?

आम उपभोक्ताओं के लिए आईएमएफ की चेतावनी काफी चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 से कम हो रही महंगाई की रफ्तार पर अब ब्रेक लगने वाला है। वैश्विक स्तर पर हेडलाइन महंगाई दर साल 2025 के 4.1% से बढ़कर 2026 में 4.7% तक पहुंचने की आशंका है, जिसके बाद 2027 में इसके 3.9% होने की उम्मीद है। सिर्फ महंगाई ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार की गति भी धीमी होगी। वैश्विक व्यापार वृद्धि साल 2025 के 5% से गिरकर 2026 में महज 3.5% पर आ जाएगी। इसकी वजह टैरिफ का बढ़ता बोझ और सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव हैं।

दुनिया की इस सुस्ती के बीच भारत का क्या हाल होगा?

वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट के इस दौर में भी भारत के लिए एक बड़ी उम्मीद बाकी है। हालांकि आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत के जीडीपी विकास दर के अनुमान को मामूली रूप से घटाकर 6.4% कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से बना रहेगा। भारत की यह ताकत उसके मजबूत घरेलू बाजार और वैश्विक तकनीक मूल्य श्रृंखला में लगातार मजबूत होती पकड़ है।



आईएमएफ की रिपोर्ट साफ करती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अब तक युद्ध के झटकों को बेहतर तरीके से झेला है, लेकिन आगे नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं। महंगाई के दोबारा बढ़ने और वैश्विक व्यापार में सुस्ती के कारण विकासशील देशों को अधिक सतर्क रहना होगा। भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह अपनी मजबूत आर्थिक बुनियाद और तकनीकी बढ़त के दम पर इस वैश्विक संकट का मुकाबला करने के लिए बेहतर स्थिति में है।

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