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Export Duty: सरकार ने डीजल और एटीएफ के निर्यात शुल्क में की बढ़ोतरी, घरेलू ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 16 Jun 2026 09:05 AM IST
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सार
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने एटीएफ और डीजल के निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए इन दोनों ईंधनों पर निर्यात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की है। नई दरें मंगलवार से लागू हो गई हैं।
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- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
केंद्र सरकार ने सोमवार को डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में 14 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात शुल्क में 12.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मंगलवार को लागू हो गईं नई दरें
राजस्व विभाग द्वारा जारी आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया जाएगा। संशोधित दरें मंगलवार से प्रभावी होंगी। सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यात को कम करने के उद्देश्य से 27 मार्च से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर लागू किया था।
देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता
इन शुल्क दरों की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े की जाती है। पिछली बार संशोधन 1 जून से लागू किया गया था। शुल्क दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों के आधार पर तय की जाती हैं। इस बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है तथा नागरिकों और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने ऊर्जा संरक्षण पर जोर दिया और बड़े औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से अपने उपभोक्ता पंपों के माध्यम से डीजल खरीदने का आग्रह किया, ताकि खुदरा पेट्रोल पंपों पर दबाव कम हो सके।
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उन्होंने बताया कि सरकार ने खुदरा पेट्रोल पंपों पर भीड़ और दबाव को कम करने के लिए अस्थायी व्यवस्था लागू की है। शर्मा के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है, रिफाइनरियां अपनी क्षमता के अनुरूप काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि समस्या आपूर्ति की नहीं, बल्कि खपत के स्वरूप में बदलाव की है। मई के दौरान लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले थोक अथवा उपभोक्ता पंपों के माध्यम से वितरित होता था, खुदरा आउटलेट्स की ओर शिफ्ट हो गया, जिससे कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा।
सरकार ने डीजल बिक्री 200 लीटर प्रति व्यक्ति तय की
आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने 11 जून को जारी अधिसूचना के तहत खुदरा पंपों से डीजल बिक्री की सीमा 200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तय कर दी है। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए उपभोक्ता पंपों का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। सुजाता शर्मा ने साफ किया कि यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू की गई है और इसका उद्देश्य आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाना है।
मंगलवार को लागू हो गईं नई दरें
राजस्व विभाग द्वारा जारी आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया जाएगा। संशोधित दरें मंगलवार से प्रभावी होंगी। सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यात को कम करने के उद्देश्य से 27 मार्च से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर लागू किया था।
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देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता
इन शुल्क दरों की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े की जाती है। पिछली बार संशोधन 1 जून से लागू किया गया था। शुल्क दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों के आधार पर तय की जाती हैं। इस बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है तथा नागरिकों और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने ऊर्जा संरक्षण पर जोर दिया और बड़े औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से अपने उपभोक्ता पंपों के माध्यम से डीजल खरीदने का आग्रह किया, ताकि खुदरा पेट्रोल पंपों पर दबाव कम हो सके।
उन्होंने बताया कि सरकार ने खुदरा पेट्रोल पंपों पर भीड़ और दबाव को कम करने के लिए अस्थायी व्यवस्था लागू की है। शर्मा के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है, रिफाइनरियां अपनी क्षमता के अनुरूप काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि समस्या आपूर्ति की नहीं, बल्कि खपत के स्वरूप में बदलाव की है। मई के दौरान लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले थोक अथवा उपभोक्ता पंपों के माध्यम से वितरित होता था, खुदरा आउटलेट्स की ओर शिफ्ट हो गया, जिससे कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा।
सरकार ने डीजल बिक्री 200 लीटर प्रति व्यक्ति तय की
आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने 11 जून को जारी अधिसूचना के तहत खुदरा पंपों से डीजल बिक्री की सीमा 200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तय कर दी है। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए उपभोक्ता पंपों का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। सुजाता शर्मा ने साफ किया कि यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू की गई है और इसका उद्देश्य आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाना है।