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Sitharaman: भारत में कैसे आएगा विदेशी निवेश? वित्त मंत्री सीतारमण ने बताई सरकार की रणनीति
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:19 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया संकट के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में सरकार विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा प्रवाह को बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही है। इसकी वित्त मंत्री ने जानकारी दी।
निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संकेत दिया कि विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कदम सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले समय में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए और भी उपाय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर कच्चे माल, कच्चे तेल और उर्वरकों के आयात का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार को पहले से तैयार रहना होगा।
बॉन्ड मार्केट बनेगा विदेशी निवेश का बड़ा केंद्र
माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक के विश्लेषण से यह सामने आया है कि भारतीय बॉन्ड बाजार विदेशी पूंजी को आकर्षित करने का एक मजबूत माध्यम बन सकता है। इसी दिशा में सरकार ने 5 जून को फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की सूची का विस्तार किया, जिससे सरकारी बॉन्ड में भी विदेशी निवेशकों की भागीदारी आसान हो सके। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट भी दी गई है। सीतारमण ने कहा, 'ये कदम विदेशी पूंजी को वापस आकर्षित करने की दिशा में पहला चरण हैं। फिलहाल ध्यान बॉन्ड बाजार पर है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।'
रिजर्व बैंक के कदमों से बैंकों को मिलेगा फायदा
रिजर्व बैंक ने 5 जून को बैंकों को 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) जमा पर करेंसी स्वैप सुविधा का उपयोग करने की अनुमति दी थी। यह सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध रहेगी। इससे बैंक अमेरिकी डॉलर में प्राप्त जमाओं को आरबीआई के साथ स्वैप कर सकेंगे और मुद्रा जोखिम का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को विदेशी वाणिज्यिक उधारी जुटाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आरबीआई ने विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा भी शुरू की है।
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5 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 71.1 करोड़ डॉलर से घटकर 681.61 अरब डॉलर रह गया था। वित्त मंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों के कारण उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते दबाव को इसकी वजह बताया।
बॉन्ड मार्केट बनेगा विदेशी निवेश का बड़ा केंद्र
माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक के विश्लेषण से यह सामने आया है कि भारतीय बॉन्ड बाजार विदेशी पूंजी को आकर्षित करने का एक मजबूत माध्यम बन सकता है। इसी दिशा में सरकार ने 5 जून को फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की सूची का विस्तार किया, जिससे सरकारी बॉन्ड में भी विदेशी निवेशकों की भागीदारी आसान हो सके। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट भी दी गई है। सीतारमण ने कहा, 'ये कदम विदेशी पूंजी को वापस आकर्षित करने की दिशा में पहला चरण हैं। फिलहाल ध्यान बॉन्ड बाजार पर है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।'
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रिजर्व बैंक के कदमों से बैंकों को मिलेगा फायदा
रिजर्व बैंक ने 5 जून को बैंकों को 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) जमा पर करेंसी स्वैप सुविधा का उपयोग करने की अनुमति दी थी। यह सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध रहेगी। इससे बैंक अमेरिकी डॉलर में प्राप्त जमाओं को आरबीआई के साथ स्वैप कर सकेंगे और मुद्रा जोखिम का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को विदेशी वाणिज्यिक उधारी जुटाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आरबीआई ने विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा भी शुरू की है।
5 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 71.1 करोड़ डॉलर से घटकर 681.61 अरब डॉलर रह गया था। वित्त मंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों के कारण उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते दबाव को इसकी वजह बताया।