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60 साल पुराने गन्ना कानून में बदलाव की तैयारी: इथेनॉल व डिजिटल नियम जोड़े गए; सरकार ने 20 मई तक मांगे सुझाव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Wed, 22 Apr 2026 03:59 PM IST
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सार

केंद्र सरकार 1966 के पुराने गन्ना नियंत्रण कानून को बदलकर नया नियम लाने जा रही है। इसमें चीनी के साथ इथेनॉल उत्पादन, डिजिटल रिपोर्टिंग और फैक्ट्री मंजूरी के नए प्रावधान शामिल होंगे। 600 लीटर इथेनॉल को 1 टन चीनी के बराबर माना जाएगा। नए नियम इथेनॉल उद्योग को बढ़ावा देंगे और किसानों के भुगतान नियम पहले जैसे ही रहेंगे।

Government overhauls six-decade-old sugarcane law seeks comments on draft by May 20 News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik
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विस्तार

केंद्र सरकार ने चीनी उद्योग को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। सरकार 1966 के पुराने शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर को हटाकर एक नया और आधुनिक कानून लाने की तैयारी में है। इस नए ड्राफ्ट में चीनी उत्पादन के साथ-साथ इथेनॉल उत्पादन, डिजिटल रिपोर्टिंग और फैक्ट्री की मंजूरी से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं। इस पर 20 मई तक जनता से सुझाव मांगे गए हैं। नए नियमों में पुराने कानून की कुछ मुख्य बातें बरकरार रखी गई हैं, जैसे गन्ने का उचित मूल्य, गन्ना आपूर्ति की व्यवस्था, 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान और देरी होने पर 15% सालाना ब्याज।

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लेकिन सबसे बड़ा बदलाव इथेनॉल को लेकर किया गया है। अब चीनी फैक्ट्रियों की परिभाषा में इथेनॉल उत्पादन को भी शामिल किया जाएगा। यानी गन्ने के रस, सिरप, चीनी और शीरे (मोलासेस) से इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों को भी इस कानून के तहत माना जाएगा। नए नियम में यह भी तय किया गया है कि 600 लीटर इथेनॉल को 1 टन चीनी के बराबर माना जाएगा। इससे उत्पादन का हिसाब आसान होगा। इसके अलावा जो फैक्ट्रियां सिर्फ इथेनॉल बनाती हैं और गन्ना खुद नहीं पीसतीं, उन्हें बैंक गारंटी की सख्त शर्तों से छूट दी गई है। यह कदम इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

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नए ड्राफ्ट में क्या-क्या नए नियम?
बता दें कि नए ड्राफ्ट में पहली बार फैक्ट्री खोलने, मंजूरी लेने, न्यूनतम दूरी तय करने और प्रोजेक्ट पूरा करने की समय सीमा जैसे नियम जोड़े गए हैं। ऐसे में अगर कोई फैक्ट्री 7 साल तक बंद रहती है तो उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। सरकार ने डिजिटल रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग सिस्टम भी शुरू करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे हर फैक्ट्री को एक कोड दिया जाएगा और ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी।

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उद्योग से जुड़े संगठनों ने क्या कहा?
इसके साथ ही अब चीनी उद्योग के उप-उत्पाद जैसे इथेनॉल, बिजली और जैविक खाद के मूल्य को भी नए तरीके से जोड़ा जाएगा। मामले में उद्योग से जुड़े संगठनों ने कहा है कि 1966 का कानून पुराना हो चुका है और इथेनॉल जैसी नई तकनीक को इसमें शामिल करना जरूरी था। हालांकि कुछ संगठनों ने खांडसारी इकाइयों पर बढ़ी सख्ती पर चिंता भी जताई है। भारत दुनिया में ब्राजील के बाद चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

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