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एक्सपायर कार्ड की टेंशन खत्म: अब नहीं रुकेंगे आपके ओटीटी और बिजली के बिल; RBI ने दी बड़ी राहत
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 21 Apr 2026 09:13 PM IST
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सार
भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल पेमेंट के नियमों में बदलाव करते हुए ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। अब कार्ड एक्सपायर होने या दोबारा जारी होने पर पुराने ई-मैंडेट, ऑटो-पेमेंट अपने आप नए कार्ड पर शिफ्ट हो जाएंगे। साथ ही, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे बड़े भुगतानों के लिए बिना ओटीपी की सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है।
आरबीआई
- फोटो : PTI
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विस्तार
अगर आपका पुराना डेबिट या क्रेडिट कार्ड एक्सपायर हो गया है, तो अब आपको अपनी सब्सक्रिप्शन सेवाओं के लिए बार-बार बैंक के चक्कर काटने या ऐप अपडेट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कार्ड जारी करने वाले बैंकों और संस्थाओं को एक नई सुविधा देने की मंजूरी दे दी है। अब बैंक आपके पुराने ई-मैंडेट को सीधे आपके नए कार्ड पर मैप कर सकेंगे।
क्या है ई-मैंडेट मैपिंग?
अक्सर कार्ड बदलने पर नेटफ्लिक्स, जिम की फीस या बिजली के बिल जैसे ऑटो-डेबिट पेमेंट रुक जाते थे। ग्राहकों को हर जगह जाकर नए कार्ड की डिटेल डालनी पड़ती थी। आरबीआई के नए निर्देश के बाद, बैंक पुराने कार्ड पर चल रहे सभी पेमेंट निर्देशों को नए कार्ड पर ट्रांसफर कर देंगे। इससे ग्राहकों का समय बचेगा और पेमेंट फेल होने का डर भी खत्म होगा।
यह भी पढ़ें: Economy: तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अस्थिरता से विकास पर असर, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत
बड़ी रकम के भुगतान अब और आसान
रिजर्व बैंक ने इस नोटिफिकेशन में एक और बड़ा एलान किया है। अब इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट के लिए एक लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन (एएफए) यानी ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। सामान्य ई-मैंडेट के लिए यह सीमा 15,000 रुपये तय की गई है। इससे ऊपर की रकम के लिए ही आपको ओटीपी देना होगा।
आरबीआई ने साफ किया है कि ई-मैंडेट की सुविधा देने के लिए बैंक ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। साथ ही, हर ट्रांजैक्शन के बाद मिलने वाले मैसेज में अब शिकायत निवारण की जानकारी देना अनिवार्य होगा। अगर कोई अनधिकृत लेनदेन होता है, तो ग्राहकों की सुरक्षा के लिए लिमिटेड लायबिलिटी के नियम यहां भी लागू होंगे। मर्चेंट को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, जिसकी जिम्मेदारी एक्वाइरिंग बैंक की होगी।
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क्या है ई-मैंडेट मैपिंग?
अक्सर कार्ड बदलने पर नेटफ्लिक्स, जिम की फीस या बिजली के बिल जैसे ऑटो-डेबिट पेमेंट रुक जाते थे। ग्राहकों को हर जगह जाकर नए कार्ड की डिटेल डालनी पड़ती थी। आरबीआई के नए निर्देश के बाद, बैंक पुराने कार्ड पर चल रहे सभी पेमेंट निर्देशों को नए कार्ड पर ट्रांसफर कर देंगे। इससे ग्राहकों का समय बचेगा और पेमेंट फेल होने का डर भी खत्म होगा।
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बड़ी रकम के भुगतान अब और आसान
रिजर्व बैंक ने इस नोटिफिकेशन में एक और बड़ा एलान किया है। अब इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट के लिए एक लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन (एएफए) यानी ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। सामान्य ई-मैंडेट के लिए यह सीमा 15,000 रुपये तय की गई है। इससे ऊपर की रकम के लिए ही आपको ओटीपी देना होगा।
आरबीआई ने साफ किया है कि ई-मैंडेट की सुविधा देने के लिए बैंक ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। साथ ही, हर ट्रांजैक्शन के बाद मिलने वाले मैसेज में अब शिकायत निवारण की जानकारी देना अनिवार्य होगा। अगर कोई अनधिकृत लेनदेन होता है, तो ग्राहकों की सुरक्षा के लिए लिमिटेड लायबिलिटी के नियम यहां भी लागू होंगे। मर्चेंट को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, जिसकी जिम्मेदारी एक्वाइरिंग बैंक की होगी।
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