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भारत में अवसरों की भरमार: सिंगापुर दौरे पर बोले केंद्रीय सचिव- लॉजिस्टिक्स-औद्योगिक हब बनने की राह पर बंदरगाह

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Wed, 22 Apr 2026 02:52 PM IST
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सार

भारत ने कहा है कि देश के बंदरगाह अब सिर्फ कार्गो केंद्र नहीं, बल्कि ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब बन रहे हैं। सरकार 2047 तक पोर्ट क्षमता बढ़ाने, जहाज निर्माण में टॉप-5 देशों में शामिल होने और ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित करने पर तेजी से काम कर रही है।

Union Secretary on Singapore visit: Port on the path to becoming a logistics-industrial hub
बंदरगाह (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार

भारत के बंदरगाह अब सिर्फ कार्गो आवाजाही के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि तेजी से एकीकृत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब में बदल रहे हैं। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बुधवार को यह जानकारी दी।
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उन्होंने सिंगापुर समुद्री सप्ताह 2026 के दौरान आयोजित राउंड-टेबल बैठक में करीब 200 निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत निरंतर और निर्णायक रूप से ऐसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का अहम हिस्सा बन सके, निवेश आकर्षित करे और दीर्घकालिक विकास बनाए रखे।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 से अब तक भारत के बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता दोगुनी होकर 1,400 एमटीपीए से बढ़कर 2,771 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। सरकार ने 2030 तक इसे 3,500 एमटीपीए और 2047 तक 10,000 एमटीपीए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915 मिलियन टन से अधिक कार्गो संभाला, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

विजय कुमार ने कहा कि भारत जहाज निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। देश में राष्ट्रीय कंटेनर लाइन बनाई जा रही है, ऊर्जा बेड़े का विस्तार हो रहा है और गीफ्ट सीटी में जहाज वित्तपोषण योजना लागू की गई है।

उन्होंने बताया कि अगले 15 वर्षों में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये की लागत से 437 जहाजों की मांग को पूरा करने की योजना है। इसमें तेल और गैस कंपनियों,  भारतीय जहाजरानी निगम, ग्रीन टग्स और ड्रेजर्स की जरूरतें शामिल हैं। 34 जहाजों के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

भारत ने 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में सीएमए सीजीएम ने कोचीन शिपयार्डमें 6 ड्यूल-फ्यूल LNG कंटेनर जहाजों का ऑर्डर दिया है, जबकि नॉर्वे की कंपनी रेड्रीएट स्टेनरसन ने स्वान एनर्जी के पीपावाव शिपयार्ड में 6 केमिकल टैंकरों का ऑर्डर दिया है।

सतत विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के समुद्री विकास का फोकस ग्रीन पोर्ट, ग्रीन फ्यूल और ग्रीन वेसल्स पर है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत कांडला बंदरगाह, पारादीप बंदरगाह और तूतीकोरिन बंदरगाह को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। बैठक के दौरान सात बिजनेस-टू-बिजनेस समझौतों का आदान-प्रदान भी हुआ, जो भारत के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

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