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GST कटौती का असर खत्म: साबुन-तेल से लेकर रोजमर्रा के सामान पांच फीसदी तक महंगे, कई कंपनियों ने बढ़ाए दाम

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 19 Feb 2026 05:49 AM IST
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सार

पिछले साल जीएसटी कटौती से सस्ती हुई रोजमर्रा की वस्तुएं अब फिर महंगी हो गई हैं, क्योंकि एफएमसीजी कंपनियों का खर्च बढ़ा है और रुपये की कीमत गिरने से लागत ज्यादा हो गई है। ये कंपनियां दाम पांच फीसदी तक बढ़ा रही हैं। पढ़ें रिपोर्ट- 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार

जीएसटी दरों में कटौती पिछले साल सितंबर में लागू होने के बाद आम लोगों को बड़ी राहत मिली थी, जब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और तेल जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हो गई थीं। हालांकि, अब वह राहत खत्म हो रही है, क्योंकि एफएमसीजी कंपनियां इनपुट लागत में बढ़ोतरी के चलते अब उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में पांच फीसदी तक बढ़ोतरी कर रही है। 
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एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद कुछ महीनों तक रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें स्थिर रखी गईं या घटाई गईं। उसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट और वैश्विक बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते इनपुट लागत के मोर्चे पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका कुछ भार अब ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है।
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वितरकों ने बताया, डिटर्जेंट एवं हेयर ऑयल से लेकर चॉकलेट, नूडल्स और अनाज समेत रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं के चुनिंदा पैकेट इस तिमाही में बढ़ी हुई कीमतों के साथ दुकानों तक पहुंचने लगे हैं। बिस्कुट, नूडल्स और स्नैक्स फूड पर जीएसटी दरों में कटौती से संबंधित छूट के कारण बिक्री मात्रा में औसतन 6 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई है।

डाबर ने दो फीसदी तक बढ़ाए दाम
डाबर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने बताया, कंपनी चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कीमतों में दो फीसदी वृद्धि कर रही है। बढ़ी हुई कीमतें अगले साल भी लागू रहेंगी। हमें मुनाफाखोरी-रोधी उपायों के कारण मूल्य वृद्धि को स्थगित करना पड़ा।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक सुनील डीसूजा ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के कंपनी के नतीजों की घोषणा के दौरान कहा था, दिसंबर तिमाही के अंत में चाय की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई थी। लेकिन, जनवरी से अप्रैल तक के आंकड़े शुरुआती कीमतों को निर्धारित करेंगे। हमने इस तिमाही में अधिकांश बढ़ोतरी ग्राहकों पर लागू कर दी है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर के मुख्य वित्तीय अधिकारी निरंजन गुप्ता ने पिछले सप्ताह निवेशकों संग बैठक में कहा, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट और पर्सनल केयर उत्पादों के निर्माता कच्चे तेल से बने उत्पादों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, जिसका असर लिक्विड पैराफिन और सर्फेक्टेंट जैसी वस्तुओं पर भी पड़ता है। होम केयर उत्पादों की कीमतें जल्द बढ़ेंगी। कुछ पैकेट (बढ़ी कीमतों वाले) बाजार में आ चुके हैं और कुछ जल्द आएंगे। कंपनी सर्फ एक्सेल, रिन, विम और डोमेक्स सहित सभी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है।

रुपये में गिरावट ने बढ़ाई मुश्किल
  • विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर की तुलना में रुपया कई महीनों से लगातार नीचे गिर रहा है। व्यापार घाटे और वैश्विक असंतुलन के प्रभाव से 30 जनवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 92.02के सार्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया।
  • विश्लेषकों का कहना है कि नाश्ते में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें जैसे ओट्स और बादाम आयात की जाती हैं। रुपये की कीमतें गिरने से इनके आयात की लागत में काफी वृद्धि हुई है।
  • नाश्ते के अनाज, मूसली और ओट्स जैसे उत्पाद बनाने वाली कंपनी बैग्रीज का भी कहना है कि वह इस तिमाही के दौरान कुछ चुनिंदा पैकेटों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।

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नियमों के डर से कंपनियों ने दिया था लाभ
कई उपभोक्ता श्रेणियों में जीएसटी दरों में कटौती के बाद एफएमसीजी कंपनियों ने मुनाफाखोरी-रोधी नियमों के तहत नियामक जांच के डर से कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने में तेजी दिखाई थीं। लेकिन, कंपनियां अब धीरे-धीरे उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वस्तुओं की लागत बढ़ रही है और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।

एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें हाल के सप्ताह में बढ़ी है, जिससे सल्फर और एन-पैराफिन जैसी संबंधित वस्तुओं की लागत बढ़ गई है। वहीं, नारियल तेल की कीमतें पिछले एक साल में दोगुनी हो गई हैं। रुपये के अवमूल्यन ने इनपुट लागतों को और बढ़ा दिया है।

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