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घर खरीदना होगा आसान: कमाई बढ़ने से कीमतों में तेजी का नहीं पड़ेगा असर, EMI का घटेगा बोझ; सीबीआरई का दावा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shivam Garg Updated Fri, 27 Mar 2026 07:06 AM IST
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सार

सीबीआरई की रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक घरों की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है। आय बढ़ने से ईएमआई का बोझ घटेगा, लेकिन सस्ते घरों की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है।

Home Buying Easier in India: Rising Income Won’t Spike Property Prices
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

घर खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर है। इस साल भारत में घरों की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है। 2021 के बाद पहली बार घरेलू आय में बढ़ोतरी की रफ्तार प्रॉपर्टी की कीमतों को पीछे छोड़ देगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में पहली बार आम लोगों की कमाई अचल संपत्ति की कीमतों से अधिक रहने की उम्मीद है। इससे घर खरीदने की क्षमता बेहतर होगी। यह रिपोर्ट रियल एस्टेट सेक्टर में काम करने वाली संस्था सीबीआरई के अध्ययन पर आधारित है। पिछले तीन वर्षों में ब्याज दरों में तेजी और प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल के कारण आम लोगों पर होम लोन की किस्त का बोझ लगातार बढ़ रहा था, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार लोगों की आय के मुकाबले ईएमआई का अनुपात 2028 तक स्थिर रहने की संभावना है। इससे घर खरीदने वालों पर आर्थिक दबाव कम होगा। पिछले 3 साल में ब्याज दर बढ़ने और प्रॉपर्टी महंगी होने से घरों की किस्त का बोझ लगातार बढ़ रहा था। जानकारों का कहना है कि ब्याज दरों में नरमी, प्रॉपर्टी कीमतों की रफ्तार धीमी होना और लोगों की आय और खर्च करने की क्षमता बढ़ने से पूरा परिदृश्य बदल गया है। रिपोर्ट में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे जैसे बड़े शहरों को शामिल किया गया। यह अध्ययन 40 लाख से 1 करोड़ रुपये सालाना आय वाले परिवारों पर आधारित है।

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भारत के हाउसिंग बाजार में बड़ा बदलाव
घरों की बिक्री में लगभग 8 फीसदी की कमी आई, लेकिन कुल वैल्यू करीब 15 फीसदी बढ़ गई। इससे पता चलता है कि लोग अब महंगे घरों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (दक्षिण-पूर्व एशिया) अंशुमान मैगजीन ने कहा, भारत का हाउसिंग बाजार एक संरचनात्मक मोड़ पर है। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति में नरमी, कीमतों में बढ़ोतरी की गति में कमी और घरेलू खर्च योग्य आय में बढ़त होने से शहरों और मध्यम आय वर्ग में घर खरीदने की स्थितियों में सुधार होने की उम्मीद है। रिपोर्ट बताती है कि इस क्षेत्र में 2026 तक बिक्री के मूल्य-बनाम-मात्रा के समीकरणों में बड़ा अंतर दिख सकता है।

सस्ते घरों की चुनौती बरकरार
45 लाख से कम कीमत वाले घरों की उपलब्धता पर अब भी दबाव बना है। इनकी निर्माण लागत बढ़ गई है। सरकारी छूट कम हो गई है। अगर सरकार कीमत और क्षेत्रफल से जुड़े नियमों में बदलाव करे तो इस सेगमेंट की हिस्सेदारी फिर से 25-30 फीसदी हो सकती है।

आलीशान घरों की मांग बढ़ी

  • 2025 में हाउसिंग मार्केट में बड़ा बदलाव देखा गया।
  • 2.7 लाख से ज्यादा नए घर बने।
  • 2.7 लाख से ज्यादा घर बिके।
  • लक्जरी और प्रीमियम घरों की बिक्री 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी।
  • कुल बिक्री में हाई-एंड सेगमेंट की हिस्सेदारी 27 फीसदी रही।
  • कुल बिक्री में 8 फीसदी की हल्की गिरावट आई।
  • घरों की कुल वैल्यू 15 फीसदी बढ़ी, यानी लोग महंगे घर ज्यादा खरीद रहे हैं।

ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूती
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूती बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च तिमाही में देश के टॉप 7 शहरों में ऑफिस स्पेस की लीजिंग 15 फीसदी बढ़कर 183 लाख वर्ग फीट हो गई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 15.9 मिलियन वर्ग फीट था। बंगलूरू सबसे बड़ा ऑफिस मार्केट बना रहा, जहां लीजिंग 18 फीसदी बढ़कर 53 लाख वर्ग फीट पहुंच गई।  

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