पश्चिम एशिया संकट के बीच अर्थव्यवस्था पर दबाव घटाने में डीपीआई और फिनटेक की क्या भूमिका? समझें सबकुछ
पश्चिम एशिया में जारी संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच जानें कैसे फिनटेक और डीपीआई भारतीय अर्थव्यवस्था की ढाल बन रहे हैं। छोटे शहरों के शहरों के विकास मॉडल और डिजिटल अर्थव्यवस्था देश के मौजूदा वित्तीय हालात को कैसे थामे हुए हैं, आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं।
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वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिम एशिया संकट और बाजार में जारी अस्थिरता का असर भले ही वैश्विक व्यापारिक मोर्चे पर दिख रहा हो, लेकिन भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहने के लिए मजबूती से तैयार है। देश का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और फिनटेक सेक्टर इन भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच एक मजबूत लचीला आधार दे रहा है।
डीपीआई के तहत डिजिटल पहचान (आधार), रीयल-टाइम तेज भुगतान (यूपीआई), और सहमति-आधारित डेटा साझाकरण प्रणालियां आती हैं। ये भारत के डिजिटल स्टैक का आधार हैं और सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने में मदद करती हैं। देश का मौजूदा वित्तीय ढांचा कैसे इनकी मदद से बाहरी झटकों को झेल पा रहा है। आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं।
सवाल: पश्चिम एशिया संकट और भू-राजनीतिक तनाव का व्यवसायों पर क्या असर पड़ रहा है और वे इससे कैसे निपट रहे हैं?
जवाब: पश्चिम एशिया का तनाव हो, जलवायु परिवर्तन (जैसे एल नीनो) या फिर कोविड जैसी महामारी, अब ये भू-राजनीतिक और वैश्विक चुनौतियां एक सामान्य बात हो गई हैं। इन संकटों के कारण वैश्विक पूंजी बाजार प्रभावित होता है, जिससे बाजार में पूंजी की लागत बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी का प्रभावी इस्तेमाल करके अपनी परिचालन लागत कम कर रही हैं। जब परिचालन लागत नियंत्रित रहती है, तो बाहरी वित्तीय दबावों के बावजूद व्यवसायों को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है और ग्राहकों को किफायती कीमत पर सेवाएं दी जा सकती हैं।
सवाल: वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत का 'डीपीआई मॉडल' कैसे अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है?
जवाब: भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) मॉडल चीन जैसे देशों से बिल्कुल अलग और पारदर्शी है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन में वित्तीय तकनीक कुछ प्राइवेट कंपनियों तक सीमित है, जिससे बाजार में उनका एकाधिकार पैदा होता है। इसके विपरीत, भारत ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) का अनूठा रास्ता अपनाया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट व मुथुट फिनकॉर्प वन के सीईओ चंदन खेतान के अनुसार यहां सरकार यूपीआई और फास्टैग जैसे डीपीआई प्लेटफॉर्म बनाती है, और प्राइवेट सेक्टर उस पर इनोवेशन करता है। इसी सफलता को देखते हुए अब ऊर्जा क्षेत्र (ईवी चार्जिंग और मैन्युफैक्चरिंग) के लिए भी नया डीपीआई तैयार किया जा रहा है। यह मॉडल संकट के समय भी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और गतिशील बनाए रखता है।
सवाल: अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में टियर-4 शहरों की क्या भूमिका है?
जवाब: कोरोना महामारी के बाद से ग्रामीण और छोटे शहरों में डिजिटल सेवाओं को अपनाने के प्रति डर लगभग खत्म हो गया है। खेतान ने बताया कि फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर अब लगभग 45 प्रतिशत यूजर्स टियर-3 और 4 शहरों से आ रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि वित्तीय समावेशन का दायरा महानगरों से निकलकर देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच गया है। भारत और इंडिया के बीच की यह कम होती खाई स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, जिससे वैश्विक संकटों का असर सीमित हो जाता है।
सवाल: बढ़ते खर्च और बाहरी दबावों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व्यवसायों के लिए कैसे मददगार है?
जवाब: वित्तीय क्षेत्र में व्यवसाय अपनी क्षमता बढ़ाने और खर्च घटाने के लिए एआई का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहे हैं। खेतान के अनुसार, जो लोन अप्रूवल और केवाईसी प्रक्रियाएं पहले ब्रांच में जाने पर कई दिन का समय लेती थीं, वे अब एआई के जरिए महज चार मिनट में पूरी हो रही हैं। इसके अलावा, एआई का उपयोग साइबर सिक्योरिटी को चाक-चौबंद करने, मार्केटिंग कैंपेन में तेजी लाने और कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया संकट जैसे झटकों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था अपने मजबूत डिजिटल ढांचे डीपीआई के दम पर डटकर खड़ी है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए यह तकनीकी एकीकरण और 140 करोड़ लोगों का पूर्ण वित्तीय समावेशन सबसे अहम माध्यम साबित हो रहा है।