Share Market: एआई के बुलबुला सबित होने की आशंका के बीच भारतीय बाजार कितने सुरक्षित? रिपोर्ट में कही गई यह बात
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजारों में एआई से जुड़े शेयरों में बुलबुले का खतरा बढ़ा है, लेकिन भारत में एआई कंपनियों में सीमित निवेश और विविध बाजार संरचना के कारण भारतीय शेयर बाजार इस जोखिम से अपेक्षाकृत सुरक्षित और अधिक संतुलित स्थिति में है।
विस्तार
मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इक्विटी बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े संभावित बुलबुले को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय इक्विटी बाजार इस जोखिम के मुकाबले अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में विशुद्ध रूप से एआई-आधारित कंपनियों में निवेश अभी सीमित है और बाजार की संरचना अधिक संतुलित व विविधतापूर्ण है।
रिपोर्ट के आंकड़ों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जहां वैश्विक बाजारों में विशेष रूप से अमेरिका में प्रौद्योगिकी प्रधान सूचकांकों की वजह से संचालित तेज उछाल और मंदी के चक्र देखे गए हैं, वहीं भारतीय बाजारों ने ऐतिहासिक रूप से ऐसे चरणों के दौरान अधिक लचीलापन दिखाया है।
वैश्विक MAG7 शेयर के बाजार
रिपोर्ट में की गई प्रमुख तुलनाओं में से एक वैश्विक MAG7 शेयर के बाजार पूंजीकरण और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बीच की गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि MAG7 देशों का बाजार पूंजीकरण 19.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो चीन के 19.4 ट्रिलियल अमेरिकी डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बराबर है और जर्मनी (5.3ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर), जापान (4.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर), भारत (4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) और ब्रिटेन (3.7 ट्रलियन अमेरिकी डॉलर) जैसे देशों के सकल घरेलू उत्पाद से काफी अधिक है। यह वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रधान बाजारों में मूल्यांकन जोखिम के पैमाने को उजागर करता किया।
क्या है MAG7?
यह अमेरिकी शेयर बाजार में उच्च प्रदर्शन करने वाली और प्रभावशाली कंपनियों के समूह, जिन्हें 'द मैग्निफिसेंट सेवन' कहा जाता इनमें अल्फाबेट (गूगल), अमेजन, एप्पल, मेटा प्लेटफॉर्म्स, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला कंपनियां शामिल हैं।
डॉट कॉम बबल की अवधि के दौरान नैस्डैक 100 और निफ्टी 50 के प्रदर्शन की तुलना
रिपोर्ट में डॉट कॉम बबल की अवधि के दौरान नैस्डैक 100 और निफ्टी 50 के प्रदर्शन की तुलना की गई है। इसमें 1996 और 2000 के बीच नैस्डैक 100 में 643 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी 50 में अपेक्षाकृत मामूली 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जब 2000 और 2003 के बीच बाजार का बुलबुला फूटा तो नैस्डैक 100 में 75 प्रतिशत की भारी गिरावट आई जबकि निफ्टी 50 में 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। साल 2003 में 2007 तक आर्थिक सुधार के दौर में नैस्डैक 100 में 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी 50 ने 557 प्रतिशत की कही अधिक मजबूत वृद्धि दर्ज की। इसलिए रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार यह ऐतिहासिक रुझान दिखाता है कि भारत डॉटकॉम के दौरान देखे गए अत्यधिक उछाल-गिरावट चक्र से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहा।
क्या है डॉट-कॉम बबल ?
डॉट कॉम बुलबुला इंटरनेट-आधारित कंपनियों में अत्यधिक सट्टा निवेश का एक दौर था, जो लगभग 1995 से 2000 तक चला, जिसका चरम 10 मार्च, 2000 को था, और उसके बाद 2002 तक एक तीव्र गिरावट आई।
नैस्डैक और निफ्टी 50 का रिटर्न
रिपोर्ट के अनुसार हाल के प्रदर्शन को देखते हुए जनवरी 2016 से जनवरी 2026 तक नैस्डैक 100 ने 494 प्रतिशत का रिटर्न दिया, तो निफ्टी 50 ने 246 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया जो काफी अधिक है। हालांकि मूल्यांकन में हुई बढ़ोतरी एक अलग सी कहानी बात रही है।
इसी अवधि के दौरान नैस्डैक 100 के लिए पीई री-रेटिंग 88 प्रतिशत रही, जबकि निफ्टी 50 के लिए यह केवल 28 प्रतिशत थी, जो भारतीय इक्विटी में कम मूल्यांकन संबंधी अतिरिक्त संकेत देती है।
भारतीय बाजार है संभावित एआई बुलबुले से सुरक्षित
रिपोर्ट के अनुसार, एआई-आधारित कंपनियों में भारत की अपेक्षाकृत सीमित भागीदारी, एआई-संचालित किसी संभावित बुलबुले के फटने की स्थिति में बाजार को सुरक्षा की एक परत प्रदान करती है। कुछ चुनिंदा उच्च-मूल्य वाले प्रौद्योगिकी शेयरों पर कम निर्भरता के चलते भारतीय इक्विटी बाजार की संरचना अधिक संतुलित बनी हुई है। इसी कारण भारतीय बाजारों को एआई को लेकर अत्यधिक आशावाद से उत्पन्न तेज गिरावट के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माना जाता है।