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Report: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद सुधारों की रफ्तार जरूरी, विनिर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 09 Feb 2026 03:00 PM IST
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सार

भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते के बाद सिस्टमेटिक्स ग्रुप की रिपोर्ट में भारत को व्यापार उदारीकरण और संरचनात्मक सुधारों पर फोकस करने की सलाह दी गई है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

After the India-US FTA, there is a need to speed up reforms, emphasis on manufacturing and global competitiven
भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक) - फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार

अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के बाद अब भारत को व्यापार उदारीकरण और संरचनात्मक सुधारों पर फोकस करना चाहिए। इससे देश का विनिर्माण क्षेत्र मजबूत होगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यह बात सिस्टमैटिक्स ग्रुप की एक रिपोर्ट में कही गई है।

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किन-किन कारकों पर दिया गया जोर?

 

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत को सबसे पहले इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार, लॉजिस्टिक्स और कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे कदम उठाने होंगे, जिससे इनपुट लागत घटे।
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  • साथ ही, बड़े पैमाने पर उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए असेंबली-आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है।
  • सिस्टमेटिक्स ने संरक्षणवाद कम करने, अधिक मुक्त व्यापार समझौते करने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को प्रोत्साहित करने और भूमि, श्रम व कौशल से जुड़ी बाधाओं को आसान बनाने पर भी जोर दिया है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के बाद अब भारत को व्यापारिक खुलापन और गहरे सुधारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुधारों का यह एकीकृत मॉडल घरेलू कंपनियों को उन्नत मैन्युफैक्चरिंग मानकों के अनुरूप ढालने में मदद करेगा और भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) में और मजबूती से जोड़ेगा। इससे न केवल मैन्युफैक्चरिंग में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, बल्कि जोखिम भी कम होंगे और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल होगी।

अमेरिका ने भारत पर लगे टैरिफ में की कटौती 

गौरतलब है कि 7 फरवरी को घोषित अंतरिम भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता 2025 में शुरू हुए व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में एक अहम कदम है। इस अंतरिम व्यवस्था के तहत अमेरिका ने भारत से आने वाले चुनिंदा उत्पादों जैसे टेक्सटाइल, परिधान, लेदर, प्लास्टिक, केमिकल्स और मशीनरी पर 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ तय किया है।

इन क्षेत्रों को मिलेगी राहत

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि समझौते के सफल क्रियान्वयन के बाद जेनेरिक दवाओं, रत्नों, हीरों और विमान के पुर्जों जैसे अहम उत्पादों पर टैरिफ हटाने की योजना है। भारत के नजरिए से यह समझौता अहम है, क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर प्रभावी शुल्क घटकर 18 प्रतिशत रह जाएगा, जिससे उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यातकों को कीमत तय करने में अधिक लचीलापन मिलेगा।

इसके अलावा, विमान और विमान पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत लगाए गए टैरिफ हटना एविएशन सेक्टर के लिए बड़ी राहत माना गया है। ऑटोमोबाइल पुर्जों के लिए प्रेफरेंशियल कोटा मिलने से भी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अंतरिम व्यापार समझौता अल्पकाल में राहत और अवसर जरूर देता है, लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब भारत गहरे सुधारों को आगे बढ़ाए, व्यापार एकीकरण को विस्तार दे और अपनी मैन्युफैक्चरिंग रणनीति को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाले।


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