पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   How Was India's Biggest IPO Planned? Know About 'Project Jupiter', the Secret Mission

Explainer: कैसे तैयार हुआ भारत का सबसे बड़ा आईपीओ? जानिए क्या है 10 महीने गुप्त तरह से चला प्रोजेक्ट जुपिटर

Tue, 30 Jun 2026 03:41 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 30 Jun 2026 03:41 PM IST
सार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत के सबसे बड़े आईपीओ की तैयारी 'प्रोजेक्ट जुपिटर' नाम के एक बेहद गोपनीय मिशन के तहत की गई। इस योजना पर महीनों तक बंद कमरों में काम हुआ और इसकी जानकारी सिर्फ चुनिंदा अधिकारियों व वरिष्ठ इन्वेस्टमेंट बैंकरों तक ही सीमित रखी गई। आइए विस्तार से जानते हैं इसकी इनसाइड स्टोरी। 

विज्ञापन
How Was India's Biggest IPO Planned? Know About 'Project Jupiter', the Secret Mission
जियो के आईपीओ से जुड़ी इनसाइड स्टोरी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ लॉन्च करने की तैयारी सिर्फ एक कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि महीनों तक चली एक बेहद गोपनीय रणनीति का हिस्सा था। दावा किया जा रहा है कि इस मिशन को रिलायंस ने प्रोजेक्ट जुपिटर नाम दिया, जिसके तहत सीमित लोगों की टीम, कागजी दस्तावेज, बंद कमरे की बैठकों और बदलते बाजार हालात के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर बाजार तक पहुंचाने की पूरी योजना तैयार की गई।

विज्ञापन


आइए जानते हैं कि कैसे बना भारत के सबसे बड़े आईपीओ का मास्टरप्लान? इस मिशन की जानकारी किसे थी? प्रोजेक्ट जुपिटर के दौरान क्या हुआ? इसके लिए कितनी लंबी तैयारी करनी पड़ी और क्या-क्या बदलाव किए गए?

विज्ञापन

कैसे बनी यह योजना?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल अगस्त में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को एक वादा किया। उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्मस लिमिटेड शेयर बाजार में 2026 की पहली छमाही में सूचीबद्ध हो जाएगा। इसके बाद अंबानी ने जियो के आईपीओ को लेकर एक गुप्त प्लान बनाया।  रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने बंद कमरों में जीओ के मेगा आईपीओ की तैयारी शुरू कर दी थी। कंपनी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
  • पहली: आईपीओ के नियमों में बदलाव के लिए नियामकों को राजी करना।
  • दूसरी: बड़े निवेशकों को अपने कुछ शेयर बेचने के लिए मनाना।
  • तीसरी: इस मेगा आईपीओ की योजना को पूरी तरह गोपनीय रखते हुए तैयार करना। 

How Was India's Biggest IPO Planned? Know About 'Project Jupiter', the Secret Mission
जियो आईपीओ - फोटो : Amar Ujala

इस मिशन की जानकारी किसे थी? 

इस पूरे मिशन को कंपनी के भीतर प्रोजेक्ट जुपिटर नाम दिया गया था। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह नाम इस प्रोजेक्ट के बड़े पैमाने और महत्व को देखते हुए रखा गया था। कई महीनों तक, इस प्लान की जानकारी रिलायंस के कुछ चुनिंदा अधिकारियों और वरिष्ठ इन्वेस्टमेंट बैंकरों को ही थी।

कैसे तैयार किए गए दस्तावेज?

  • आईपीओ से जुड़े ड्राफ्ट दस्तावेज, निवेशकों के लिए प्रेजेंटेशन और दूसरे अहम कागजात ज्यादातर कागजी रूप में ही साझा किए गए।
  • डिजिटल रिकॉर्ड बनने से बचने के लिए ईमेल और दूसरे ऑनलाइन माध्यमों का बहुत कम इस्तेमाल किया गया। 
  • वहीं, इस प्रोजेक्ट से जुड़ी बैठकें भी केवल शीर्ष अधिकारियों तक ही सीमित रहीं।

करीब नौ महीने बाद रिलायंस की सालाना आम बैठक (एजीएम) में मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि जियो अब शेयर बाजार में उतरने के लिए तैयार है। इसके कुछ ही घंटों बाद कंपनी ने आईपीओ का ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर दिया। इसकी तैयारी पहले से पूरी थी और इन्वेस्टमेंट बैंकर पहले ही सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए तैयार बैठे थे।

How Was India's Biggest IPO Planned? Know About 'Project Jupiter', the Secret Mission
जियो आईपीओ - फोटो : Amar Ujala

प्रोजेक्ट जुपिटर के दौरान क्या हुआ?

मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, रिलायंस की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मौजूदा शेयरधारकों की सहमति हासिल करना था। आखिरकार केकआर, मेटा प्लेटफॉर्म, अल्फाबेट और अन्य निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी का लगभग आठ प्रतिशत हिस्सा प्रो-राटा आधार पर कम करने पर सहमति दी। प्रो-राटा आधार का मतलब है कि हर निवेशक ने अपनी-अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में शेयर बेचे, ताकि सभी की हिस्सेदारी समान अनुपात में कम हो और उनका आपसी स्वामित्व संतुलित बना रहे। इससे कंपनी सार्वजनिक शेयरधारिता की जरूरी शर्त पूरी कर सकी और निवेशकों की आपसी हिस्सेदारी का अनुपात भी बना रहा।

सेबी ने क्या बदलाव किए?

इसी दौरान नियामकीय स्तर पर भी बदलाव हुए। सितंबर 2025 में सेबी ने पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक वैल्यूएशन वाली कंपनियों के लिए आईपीओ में न्यूनतम हिस्सेदारी बेचने की सीमा पांच फिसदी से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दी। पहले यह सीमा पांच प्रतिशत थी। मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने इन नियमों को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया, जिससे जोयो के लिए आईपीओ की राह आसान हो गई।

सेबी ने यह भी बताया कि उसने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की लंबे समय से अटकी आईपीओ प्रक्रिया से जुड़े कानूनी विवाद के निपटारे के आवेदन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि बहुत बड़े आईपीओ आने पर बाजार पर एक साथ ज्यादा शेयरों का दबाव न पड़े और ऐसे आईपीओ आसानी से पूरे हो सकें। साथ ही सबी आईपीओ से जुड़े नियमों को सरल बनाने और मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने पर भी काम कर रहा है। 

How Was India's Biggest IPO Planned? Know About 'Project Jupiter', the Secret Mission
जियो आईपीओ - फोटो : Amar Ujala

आईपीओ की संरचना क्यों बदली?

शुरुआत में रिलायंस की योजना थी कि आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। इसके तहत मौजूदा निवेशक जियो में अपनी लगभग 2.8% हिस्सेदारी बेचते, जबकि कंपनी खुद कोई नया शेयर जारी नहीं करती। ऑफर फॉर सेल का मतलब है कि कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती, बल्कि उसके मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं।

लेकिन मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, शेयर बाजार में कमजोरी, रुपये में गिरावट का डॉलर में मिलने वाले रिटर्न पर असर और प्रस्तावित वैल्यूएशन को लेकर कुछ शेयरधारकों की चिंता के कारण इस योजना पर सहमति नहीं बन सकी। इसी दौरान भारत सरकार विदेशी पूंजी को देश में बनाए रखने के लिए भी कदम उठा रही थी।

इसके बाद रिलायंस ने आईपीओ की संरचना बदलने का फैसला किया और इसे पूरी तरह प्राइमरी इश्यू बना दिया। इससे आईपीओ के जरिए जुटाए जाने वाले लगभग चार अरब डॉलर सीधे कंपनी के पास आएंगे और यह पूंजी भारत में ही रहेगी। प्राइमरी इश्यू का मतलब है कि कंपनी पहली बार नए शेयर जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती है।

How Was India's Biggest IPO Planned? Know About 'Project Jupiter', the Secret Mission
जियो आईपीओ - फोटो : Amar Ujala

19 तारीख क्यों रही खास?

19 जून 2026 को रिलायंस ने 19 सलाहकारों के साथ जियो आईपीओ का ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह तारीख 19 जून थी और मुकेश अंबानी का जन्म भी 19 अप्रैल को हुआ था। इस प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों ने इसे एक रोचक संयोग के रूप में देखा। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ रिलायंस समूह का करीब 20 साल बाद पहला आईपीओ होगा। इससे पहले 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी, जिसे बाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) में मिला दिया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed