India-AI Summit: एआई ट्रेनिंग में न्यूज कंटेंट के मुफ्त इस्तेमाल पर पब्लिशर्स सख्त, उचित भुगतान की मांग तेज
AI Summit India 2026: एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारतीय न्यूज पब्लिशर्स ने कहा कि पत्रकारिता कंटेंट को बिना अनुमति एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल करना गलत है और इसके लिए उचित भुगतान व लाइसेंसिंग जरूरी है। उन्होंने एआई को पत्रकारों का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपकरण बताते हुए डेटा पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यूज कंटेंट को सामान्य इंटरनेट डेटा से अलग मानने की मांग की।
विस्तार
जनरेटिव एआई के दौर में टेक प्लेटफॉर्म्स के साथ बढ़ते टकराव के बीच भारतीय न्यूज पब्लिशर्स ने अपने पत्रकारिता कंटेंट के बिना अनुमति और बिना भुगतान इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि समाचार सामग्री को एआई सिस्टम की ट्रेनिंग के लिए मुफ्त डेटा की तरह इस्तेमाल करना उचित नहीं है, क्योंकि यह पेशेवर मेहनत, संसाधन और निवेश से तैयार की गई बौद्धिक संपदा है।
राजधानी दिल्ली में 16 फरवरी को आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन सत्र में मीडिया और पब्लिशिंग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि एआई मॉडलों को ट्रेन करने में इस्तेमाल होने वाले पत्रकारिता कंटेंट के लिए पब्लिशर्स को उचित भुगतान मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी जोर दिया कि न्यूज कंटेंट को सामान्य इंटरनेट डेटा से अलग माना जाना चाहिए, क्योंकि सत्यापित और पेशेवर रिपोर्टिंग न केवल मॉडल की सटीकता बढ़ाती है बल्कि गलत या भ्रामक उत्तर की संभावना को भी कम करती है।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने 'एआई एंड मीडिया: अपॉर्च्युनिटीज, रिस्पॉन्सिबल पाथवेज एंड द रोड अहेड' विषय पर सत्र आयोजित किया। सत्र में अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी, दैनिक भास्कर ग्रुप के उप प्रबंध निदेशक पवन अग्रवाल, बेनेट कॉलमैन ग्रुप के सीओओ मोहित जैन, द हिंदू समूह के सीईओ नवनीत एलवी, इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन के डिजिटल प्लेटफॉर्म इनीशिएटिव के हेड रॉबर्ट व्हाइटहेड और ईवाई समूह के आशीष फेरवानी ने हिस्सा लिया।
पत्रकारिता कंटेंट बौद्धिक संपदा है, मुफ्त डेटा नहीं
पैनलिस्ट्स ने जोर देकर कहा कि प्रोफेशनल पत्रकारिता कंटेंट को सामान्य इंटरनेट डेटा से अलग समझा जाना चाहिए, क्योंकि यह निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रतिभा से तैयार होने वाली बौद्धिक संपदा है। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के कंटेंट का उपयोग अनुबंध के आधार पर होना चाहिए, न कि बिना अनुमति या भुगतान के।
यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और अमेरिका सहित कई देशों में पब्लिशर्स के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि उनके कॉपीराइटेड कंटेंट, जैसे समाचार रिपोर्ट्स, का उपयोग एआई कंपनियां बिना अनुमति और भुगतान के अपने फाउंडेशनल मॉडल्स को ट्रेन करने में कर रही हैं। इसी मुद्दे पर डीएनपीए से जुड़े पब्लिशर्स ने भारत में ओपनएआई के खिलाफ कथित 'कॉपीराइटेड सामग्री के अवैध उपयोग' को लेकर कानूनी चुनौती भी दी है।
क्या एआई पत्रकारों की जगह ले लेगा?
अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने इसका जावब देते हुए कहा, ''हमारे लिए एआई एक तकनीक की तरह ही है। किसी भी दूसरी तकनीक के अच्छे और बुरे, दोनों पहलू होते हैं। इसका क्लासिक उदाहरण परमाणु प्रौद्योगिकी है। इससे दुनिया का सबसे खतरनाक बम भी बन सकता है और दूसरी तरफ यह ऊर्जा के सबसे स्वच्छ स्रोतों में से एक भी है। एआई के साथ भी कुछ ऐसा ही है। सवाल यही है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। आपको इसके साथ हमेशा इंसानों को जोड़ना होगा। अमर उजाला में हम व्यापक दृष्टिकोण लेकर चलते हैं। हम टियर-टू, टियर-थ्री शहरों में मौजूद पाठकों और वहां से आ रही खबरों पर जोर देते हैं। इंसान जो काम करते हैं, एआई का इस्तेमाल उसकी मदद करने के लिए हो सकता है ताकि कंटेंट में और गहराई लाई जा सके और उसकी सामग्री को बेहतर बनाया जा सके। इसलिए हम एआई को किसी भी चीज का विकल्प नहीं मानते।''
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एआई से पत्रकारिता का मूल्य घटेगा नहीं, बल्कि भरोसे की अहमियत बढ़ेगी
टाइम्स ग्रुप के मोहित जैन ने कहा कि एआई सूचना को कमोडिटी बना सकता है, लेकिन इससे विश्वसनीयता और जवाबदेही की प्रीमियम वैल्यू बढ़ेगी। उनके अनुसार विविध और जटिल समाज में संपादकीय विवेक, सत्यापन और संस्थागत स्मृति पत्रकारिता की बुनियादी जरूरत हैं, जो भरोसा निर्माण का प्रमुख आधार हैं।
हालांकि आईएनएमए के रॉबर्ट व्हाइटहेड ने चेतावनी दी कि एआई चैटबॉट्स और एआई ओवरव्यू जैसे फीचर्स के कारण पिछले एक वर्ष में सर्च इंजन और सोशल मीडिया से पब्लिशर्स को मिलने वाला रेफरल ट्रैफिक तेजी से घटा है, जिससे उनके बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ रहा है।
न्यूजरूम में AI का उपयोग, लेकिन मानव भूमिका अहम
पैनल में यह भी स्पष्ट किया गया कि AI पत्रकारों का विकल्प नहीं है, बल्कि एक सहायक उपकरण है। अमर उजाला के माहेश्वरी ने कहा कि ''हम एआई को खबरों की गुणवत्ता बेहतर करने के एक साधन के रूप में देखते हैं। आखिर में हमारा लक्ष्य अपने यूजर के लिए और बेहतर कंटेंट तैयार करना है। हम कभी यह नहीं मानते कि एआई किसी की जगह ले लेगा। इस पूरे एआई इंजन में कंटेंट की लेयर सबसे महत्वपूर्ण परत है। इसके अलावा डेटा लेयर, प्रोसेसिंग लेयर, एप्लिकेशन लेयर और पावर-एनर्जी लेयर भी शामिल हैं। लेकिन कंटेंट लेयर ही इकलौती ऐसी परत है, जो बदलती रहती है। एक जिम्मेदार संगठन के रूप में हमारा मानना है कि हमें इसी परत का उपयोग अपनी कंटेंट प्रोडक्शन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए। आमतौर पर इसके उपयोग के उदाहरणों में कंटेंट की गहराई बढ़ाना, एक जैसे और बार-बार दोहराए जाने वाले काम को ऑटोमेट करना और उससे बचाए गए समय का इस्तेमाल ज्यादा शोध-आधारित और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए करना शामिल है।''
इंडिया टुडे की कल्ली पुरी ने 'AI सैंडविच' मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि प्रक्रिया की शुरुआत और अंतिम निर्णय मानव द्वारा ही लिया जाता है, जबकि बीच में एआई सहायक भूमिका निभाता है। द हिंदू समूह ने भी बताया कि वह AI का उपयोग पाठकों की गहराई से समझ बढ़ाने और एंगेजमेंट सुधारने के लिए कर रहा है, साथ ही अपने आर्काइव पर आधारित इन-हाउस AI मॉडल विकसित किया है जिससे हैल्युसिनेशन की संभावना कम होती है।
बहुभाषी न्यूज प्रोडक्शन में एआई की भूमिका
इस सवाल पर कि जब भारतीय भाषाओं में एआई मॉडलों का इस्तेमाल करते हैं, तो क्या संदर्भ सही तरह से काम करता है? इसके जवाब में तन्मय माहेश्वरी ने कहा, ''नहीं। इसलिए मैं कहूंगा कि भाषाओं पर आधारित मॉडलों में सटीकता 50-55% से भी कम रहती है। इस बारे में सैम ऑल्टमैन का एक बहुत प्रसिद्ध कथन भी है। वो कहते हैं कि एआई हमें दुनिया के अंत तक ले जा सकता है, लेकिन तब तक हम कुछ बेहतरीन कंपनियां जरूर बना लेंगे। ...अब यह हम सभी के लिए एक तरह का डार्क ह्यूमर हो सकता है, लेकिन जब भी हम कुछ नया बनाते हैं, तो वह भविष्य के लिए, अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए होता है। हम तो केवल संरक्षक हैं। यह दुनिया हमें सौंपी गई है और हमें इसे बेहतर और संतुलित रूप में आगे सौंपना है।
जवाबदेही और नियमों की मांग तेज
पब्लिशर्स ने AI से उत्पन्न गलत या भ्रामक कंटेंट की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की। उनका कहना था कि जिस तरह पारंपरिक मीडिया कानूनी और नैतिक मानकों के प्रति जवाबदेह है, उसी तरह AI कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स को भी समान मानकों के तहत जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
वक्ताओं का तर्क था कि अगर पारंपरिक मीडिया अपने प्रकाशित कंटेंट के लिए जवाबदेह है और संपादकीय स्तर पर कड़े मानकों का पालन करता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और AI आधारित सेवाओं को भी समान जिम्मेदारी के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा समय में पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के बीच 'इनाम और सजा' के नियमों में असमानता है, जहां एक ओर स्थापित मीडिया सख्त दिशानिर्देशों के तहत काम करता है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर अक्सर उन्हीं मानकों का उल्लंघन होता रहता है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।
समिट के निष्कर्षों में पब्लिशर्स ने नौ-सूत्रीय एजेंडा पेश करते हुए प्रशिक्षण डेटा की पारदर्शिता, कंटेंट की स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेसबिलिटी व सत्यापित कंटेंट को वास्तविक मूल्य देने की मांग की। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि सरकारें ऐसे कानून लाएं, जिनसे पत्रकारिता कंटेंट पर आधारित AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए मीडिया संस्थानों को उचित भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।