सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   India EU Trade Deal Ursula Von Der Leyen US Tariffs Donald Trump Export European Union Free Trade Agreement

कितना बड़ा होगा भारत-ईयू के बीच व्यापार समझौता: कैसे ट्रंप के टैरिफ की बन सकता है काट, इससे कितना होगा फायदा?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 27 Jan 2026 08:00 AM IST
विज्ञापन
सार

भारत और यूरोप के बीच साझेदारी के मौजूदा आंकड़े क्या हैं? यूरोपीय देशों के संगठन- ईयू और भारत के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर कब से चर्चा चल रही थी? दोनों पक्षों के बीच यह समझौता कितना बड़ा होगा? इससे भारत और यूरोपीय संघ को क्या फायदा होगा? भारत के कौन से सेक्टर इस ट्रेड डील से लाभान्वित होंगे? आगे क्या चुनौतियां हो सकती हैं? आइये जानते हैं...

India EU Trade Deal Ursula Von Der Leyen US Tariffs Donald Trump Export European Union Free Trade Agreement
भारत और यूरोपीय संघ के बीच आज होगा मुफ्त व्यापार समझौता। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय आयोग (ईसी) के अधिकारियों को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। इस समारोह के ठीक बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। अगर व्यापार समझौते पर मुहर लगाती है तो यह ऐसे समय में होगा जब भारत के अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका के साथ रिश्ते ढलान पर हैं। यह समझौता भारत के लिए यूरोप के देशों में बड़ा बाजार खोजने में एक अहम कदम साबित हो सकता है। 
Trending Videos


इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह जानना अहम है कि भारत और यूरोप के बीच साझेदारी के मौजूदा आंकड़े क्या हैं? यूरोपीय देशों के संगठन- ईयू और भारत के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर कब से चर्चा चल रही थी? दोनों पक्षों के बीच यह समझौता कितना बड़ा होगा? इससे भारत और यूरोपीय संघ को क्या फायदा होगा? भारत के कौन से सेक्टर इस ट्रेड डील से लाभान्वित होंगे? आगे क्या चुनौतियां हो सकती हैं? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
विज्ञापन

 

किन-किन चीजों का आयात-निर्यात करते हैं भारत-ईयू?

1. भारत का ईयू को निर्यात

पेट्रोलियम उत्पाद: यह भारत के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 17% है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद इन उत्पादों के निर्यात में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

फार्मास्यूटिकल्स और रसायन: दवाइयां (विशेष रूप से जेनेरिक दवाएं) और रसायन भारत के निर्यात का 15% हिस्सा बनाते हैं। भारत को दुनिया की फार्मेसी माना जाता है और यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में इनकी बड़ी भूमिका है।

इलेक्ट्रॉनिक सामान: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 11% है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में काफी तेजी आई है।

कपड़ा और तैयार परिधान: कपड़ा उद्योग निर्यात का 10% हिस्सा कवर करता है। इसमें कपड़े, जूते (फुटवियर) और चमड़े के उत्पाद शामिल हैं।

मशीनरी और उपकरण: मशीनरी और बिजली के उपकरणों का निर्यात भी कुल निर्यात का 10% है।

धातु और खनिज उत्पाद: इसमें मुख्य रूप से लोहा, इस्पात (स्टील) और एल्यूमीनियम जैसे आधार धातु और खनिज उत्पाद शामिल हैं।

अन्य क्षेत्र: भारत यूरोपीय संघ को रत्न एवं आभूषण और समुद्री उत्पाद का भी निर्यात करता है।

सेवा क्षेत्र: भारत की ओर से यूरोपीय संघ को सेवा क्षेत्र की तरफ से भी जबरदस्त निर्यात किया जाता है। भारत के सेवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) और डिजिटल सेवाओं से आता है। इसके अलावा इंजीनियरिंग, कंसल्टिंग और अन्य कौशल-आधारित सेवाओं में भी भारत अग्रणी देश है। 

2. ईयू के भारत को प्रमुख निर्यात

इलेक्ट्रॉनिक्स: यह भारत के यूरोपीय संघ से होने वाले कुल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 25% है। यूरोपीय कंपनियों के महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स की भारत में जबरदस्त मांग है।

मशीनरी और उपकरण: यह कुल आयात का लगभग 20% है। इसमें औद्योगिक मशीनरी और बिजली के उपकरण शामिल हैं।

रसायन और फार्मास्यूटिकल्स: यूरोपीय दवा कंपनियां कई दवा फॉर्मूले के रसायनों और दवाओं को भारत भेजती हैं। ईयू की ओर से भारत को कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 12% है।

परिवहन उपकरण और विमान: ईयू की तरफ से भारत को विमान और उनके पुर्जे भेजे जाते हैं। इसकी हिस्सेदारी लगभग 8% है। एयरबस जैसी विमानन कंपनियां इस क्षेत्र में निर्यात के लिए सबसे अहम हैं।

ऑटोमोबाइल और पुर्जे: ईयू की तरफ से ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स के निर्यात में हिस्सेदारी लगभग 4% है। मर्सिडीज, फोक्सवैगन आदि कंपनियां भारत को निर्यात में अहम भूमिका निभाती हैं। 

प्लास्टिक: ईयू की तरफ से भारत को निर्यात में यह भी एक अहम क्षेत्र है। इस पर भारत लगभग 10.4% शुल्क लगाता है। एफटीए में इसे लेकर बात हो सकती है।

वाइन और स्पिरिट: मौजूदा समय में इन पर भारत 150-200% तक का भारी आयात शुल्क लगाता है। यूरोपीय संघ इस शुल्क को कम करने की मांग कर रहा है।

डेयरी उत्पाद: यूरोपीय संघ पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए भी रियायतें चाहता है, हालांकि भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए इन्हें प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से बाहर रखा है।

सेवा निर्यात: 2023 में यूरोपीय संघ का भारत को सेवाओं का निर्यात करीब 30 अरब डॉलर का रहा। इनमें मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, परामर्श (Consulting), टेलीकॉम और बौद्धिक संपदा (आईपी) आधारित सेवाएं शामिल हैं।

ईयू और भारत के बीच एफटीए पर कब से चर्चा चल रही?

2007: औपचारिक शुरुआत
भारत और यूरोपीय संघ ने आधिकारिक तौर पर मुफ्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू की, जिसे उस समय *ब्रॉड-बेस्ड ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट' (BTIA) कहा जाता था।

2007-2013: वार्ताओं का दौर और गतिरोध
छह वर्षों के दौरान कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन टैरिफ (विशेषकर कारों और वाइन पर), बौद्धिक संपदा अधिकारों और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेदों के कारण 2013 में बातचीत रुक गई।

2021: मई में वार्ता को फिर शुरू करने पर बात
यूरोपीय संघ और भारत के नेताओं के बीच एक संतुलित, महत्वाकांक्षी और व्यापक व्यापार समझौते के लिए बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमति बनी।

2022: जून-जुलाई में शुरू हुई औपचारिक वार्ता
लगभग नौ साल के अंतराल के बाद, नई राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ आधिकारिक तौर पर वार्ता को फिर से शुरू किया गया।

2023: व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद का गठन
फरवरी में दोनों पक्षों ने डिजिटल परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकियों और व्यापार पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक नई  व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद का गठन किया।

2025: समापन का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयेन ने संयुक्त रूप से सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों को 2025 के अंत तक वार्ता पूरी करने की कोशिश करनी चाहिए।

2026: व्यापार समझौते को कहा गया 'मदर ऑफ ऑल डील्स'
20 जनवरी: उर्सला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में एलान किया कि वार्ता अंतिम चरण में है और वे एक ऐतिहासिक समझौते की कगार पर हैं। एफटीए को लेकर मिली अंतिम जानकारी के मुताबिक, समझौते के कुल 24 अध्यायों में से 20 अध्यायों पर नवंबर-दिसंबर में ही सहमति बन चुकी है। 

27 जनवरी: गणतंत्र दिवस समारोह और 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के मौके पर समझौते की औपचारिक घोषणा या हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है।

यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अपने आकार और आर्थिक प्रभाव के मामले में अत्यंत विशाल होगा। इसे भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने  सभी समझौतों की जननी करार दिया है।

भारत और ईयू के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ टैरिफ (आयात शुल्क) कम करने तक सीमित नहीं होगा। यह समझौता 24 अध्यायों में फैला है, जिसमें वस्तुएं, सेवाएं, निवेश संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, डिजिटल नियम और नियामक सहयोग जैसे जटिल विषय शामिल हैं।

यूरोपीय संघ भारत में अग्रणी विदेशी निवेशक भी है, इसका प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) स्टॉक 2023 में 140.1 अरब यूरो तक पहुंच गया है। इस समझौते से स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश के और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

भारत और यूरोपीय संघ को क्या फायदा होगा?

1. भारत को ट्रेड डील से फायदा, कौन से सेक्टर लाभ में

भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के 27 देशों के लगभग 45 करोड़ उच्च-आय वाले उपभोक्ताओं तक तरजीही पहुंच मिलेगी। वह भी शून्य टैरिफ या बेहद कम दरों पर। भारत श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इस डील से फायदा होगा। खासकर कपड़ा, फार्मा उद्योग, सेवाओं और पेशेवरों के क्षेत्र में। 

कपड़ा और परिधान
वैश्विक व्यापार विश्लेषक फर्म- जेफ्रीज के मुताबिक, ईयू मौजूदा समय में 125 अरब डॉलर के कपड़ों-परिधानों का आयात करता है। इनमें से भारत का हिस्सा सिर्फ 5% से 6% ही है। दूसरी तरफ चीन का मार्केट शेयर 30 फीसदी और बांग्लादेश-पाकिस्तान का साझा मार्केट 20 फीसदी का है। दरअसल, बांग्लादेश-पाकिस्तान को ईयू से जीरो टैरिफ का फायदा मिलता है। एफटीए इन शुल्कों को हटाकर भारत को उनके बराबर खड़ा कर देगा। इसका असर यह होगा कि जिस भारतीय कपड़ा उद्योग को अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ की वजह से नुकसान हो रहा था, उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए नया बाजार मिल जाएगा। 

चमड़ा, जूते और रत्न
जूते, चमड़े के सामान और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों को कम टैरिफ और बेहतर बाजार पहुंच के कारण निर्यात में बड़ी बढ़त मिलेगी।
 

फार्मास्यूटिकल्स और रसायनों के लिए नियामक राहत
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए मुख्य लाभ केवल शुल्क कटौती में नहीं, बल्कि नियामक बाधाओं को कम करने और मानकों की आपसी मान्यता में है। इससे भारतीय जेनेरिक दवाओं और विशेष रसायनों को यूरोपीय बाजार में अधिक आसानी से प्रवेश मिलेगा।

सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही
भारत अपने आईटी, इंजीनियरिंग और चिकित्सा पेशेवरों के लिए यूरोपीय संघ में आसान वीजा और पहुंच की मांग कर रहा है। अगर इस पर सहमति बनती है तो अमेरिका की संरक्षणवादी नीति के मुकाबले यह भारत के लिए नया बाजार होगा। इससे अमेरिका पर भारत की निर्भरता भी कम होगी।

रणनीतिक और निवेश में फायदे
यह समझौता भारत में यूरोपीय निवेश को आकर्षित करेगा, खासकर स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में। इसके अलावा भारतीय फर्म्स यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) में ज्यादा गहराई से जुड़ सकेंगी, जिससे वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

कृषि-डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा
भारत ने इस समझौते में अपनी रेड लाइन को बरकरार रखा है, जिसके तहत कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। 

2. यूरोप को व्यापार समझौते से क्या फायदा?

यूरोप को एक ऐसा बाजार मिलेगा, जहां तेजी से बढ़ता और महत्वाकांक्षी मध्यमवर्ग है। रणनीतिक रूप से, यूरोपीय संघ अपनी सप्लाई चेन को विविध करना चाहता है, ताकि वह चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता को कम कर सके। ऐसे में इस समझौते के बाद भारत विश्वसनीय और भू-राजनीतिक रूप से अहम साझेदार बन सकता है।

ऑटोमोबाइल
यूरोपीय संघ भारत के यात्री वाहन बाजार में बेहतर पहुंच चाहता है, जहां वर्तमान में आयात शुल्क 100% से 125% तक है।

वाइन और स्पिरिट्स
यूरोपीय शराब और स्पिरिट्स पर वर्तमान में 150% से 200% तक का भारी शुल्क लगता है। समझौते के तहत यूरोपीय संघ इन शुल्कों में कटौती और प्रमाणन प्रक्रियाओं में छूट मिल सकती है।

कृषि और डेयरी 
यूरोपीय संघ अपने पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के साथ-साथ रसायनों और मशीनरी के लिए भी कम टैरिफ चाहता है। जहां डेयरी पर भारत की तरफ से छूट मिलने की संभावना कम है, वहीं रसायन और मशीनरी के लिए बाजार को और ज्यादा खोलने पर सहमति बन सकती है।

सेवा क्षेत्र और निवेश सुरक्षा
यूरोपीय संघ भारत के वित्तीय, कानूनी, बैंकिंग और टेलीकॉम क्षेत्रों में को ज्यादा खोलने की मांग कर रहा है। वह भारत में निवेश करने वाली अपनी लगभग 6,000 कंपनियों के लिए एक पारदर्शी, खुला और अनुमानित नियामक वातावरण चाहता है, जिसमें उनके निवेश और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित हो। भारत की ओर से भी इस पर छूट देने की बात कही गई है।

कच्चा माल और हरित ऊर्जा
यूरोपीय संघ की ऊर्जा परिवर्तन रणनीति के लिए भारत के कच्चे माल और दुर्लभ खनिजों तक सीधी पहुंच आवश्यक है। इस समझौते से स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

सरकारी खरीद
इस व्यापार समझौते के जरिए यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर अपने सरकारी खरीद बाजार को यूरोपीय कंपनियों के लिए खोले, जिससे निर्माण, परिवहन और आईटी जैसे क्षेत्रों को लाभ हो।
 

कैसे लागू होगा समझौता?

लीगल स्क्रबिंग: समझौते के समापन की घोषणा के बाद दोनों पक्ष इसकी कानूनी बारीकियों की जांच करंगे।
हस्ताक्षर: यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त और उनके भारतीय समकक्ष एक-एक नियम को औपचारिक मंजूरी देंगे।
अनुमोदन: यूरोपीय संसद में मतदान और यूरोपीय परिषद की मंजूरी। यही प्रक्रिया भारत में दोहराई जाएगी।
 

एफटीए से क्या उम्मीद 

  • कपड़ा, चमड़ा और रत्न जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को काफी फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि मौजूदा समय में इन पर करीब 10-12% का शुल्क लगता है।
  • भारत मौजूदा समय में पेशेवर और कुशल कर्मियों की आवाजाही के लिए यूरोपीय संघ के साथ बातचीत कर रहे प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में और अधिक रियायतों की मांग कर रहा है।
  • ईयू से निर्यात होने वाले प्लास्टिक पर भारत लगभग 10.4% शुल्क लगाता है। एफटीए में इसे लेकर बात हो सकती है। इससे यूरोप के प्लास्टिक बाजार को भारत में एक बड़ा बाजार मिलेगा।
  • यूरोपीय संघ भारत से वाइन और स्पिरिट्स शुल्क को कम करने की मांग कर रहा है। अगर एफटीए में बात बनती है तो भारत में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन से आने वाली स्पिरिट्स की कीमतें कम हो सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed